विश्व युद्ध में मान लिया था मरा वो क्रिकेटर जिंदा निकला और ठोंक दिए 20000 रन

2018-10-26T08:15:21Z

क्रिकेट जगत में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो खास होकर भी आम हो गए। ऐसे ही एक क्रिकेटर हैं हैरी विलियम ली। जो जेल गए बुरी तरह चोटिल हुए और जीवनभर लंगड़ाए फिर भी 20 हजार से ज्यादा रन बनाकर चले गए।

कानपुर। 26 अक्टूबर 1890 को लंदन में जन्में हैरी विलियम ली क्रिकेट मैदान के अलावा बाहर भी चर्चा में रहे। यह दुनिया के इकलौते टेस्ट क्रिकेटर हैं जिन्हें प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जेल में डाला गया था। जेल से निकलने के बाद क्रिकेट में उनकी वापसी कई लोगों के लिए मिसाल है। हेनर ली इंग्लिश क्रिकेट टीम की तरफ से मैच खेला करते थे। हालांकि उन्हें इंटरनेशनल क्रिकेट में इतनी पहचान नहीं मिली मगर घरेलू क्रिकेट में उनके जैसा रिकॉर्ड कम ही क्रिकेटरों का होता है।
जेल में मरने की खबर

इंग्लिश क्रिकेटर रहे हैरी ली ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत 1911 में की थी। तब वह मिडिलसेक्स की तरफ से मैच खेला करते थे। अभी उन्हें क्रिकेट करियर शुरु किए चार साल ही हुए थे कि 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरु हो गया। जर्मनी की सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। खबर आने लगी कि जेल में ही हैरी की मृत्यु हो गई। मगर हैरी जब जेल से बाहर आए तो सभी को चौंका दिया।
खराब हो चुके पैर के साथ 20 साल खेला क्रिकेट
हैरी को जेल के अंदर काफी प्रताड़ित किया गया था। सबसे ज्यादा चोट उनके पैरों में आई, जांघ बुरी तरह जख्मी हो चुकी थी। खैर कुछ दिनों बाद वह जेल से तो छूट गए मगर उनका एक पैर खराब हो चुका था। वह लंगड़ा कर चलने लगे और यह पीड़ा उन्हें जिंदगीभर झेलनी पड़ी। सभी ने कहा कि हैरी अब कभी क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे। मगर उन्होंने इस बात को तब झूठा साबित किया जब वह एक फर्स्ट क्लॉस मैच खेलने उतरे और उसमें सेंचुरी जमाई। इसके बाद हैरी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अगले 20 सालों तक क्रिकेट खेलते रहे।

फर्स्ट क्लॉस क्रिकेट में 20 हजार रन

हैरी फर्स्ट क्लॉस क्रिेकेट के बेहतरीन ऑलराउंडर माने जाते थे। 20 साल लंबे करियर में उन्होंने 437 मैच खेले जिसमें उनके नाम 20,158 रन और 401 विकेट दर्ज हैं। यही नहीं हैरी के बल्ले से 38 शतक और 81 अर्धशतक भी निकले। मिडिलसेक्स की तरफ से खेलते हुए हैरी का हाईएस्ट इंडिविजुअल स्कोर 243 रन है।
एकमात्र टेस्ट खेला
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन का इनाम है कि हैरी को 1931 में इंग्लिश क्रिकेट टीम में जगह मिल गई। वह बतौर ऑलराउंडर जोंहासंबर्ग में साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच खेलने उतरे। हालांकि जैसा उन्होंने सोचा, वैसा प्रदर्शन डेब्यू मैच में नहीं कर पाए। वह दोनों पारियों में कुल 19 रन बना पाए, जिसमें पहली पारी में 18 और दूसरी पारी में 1 रन बनाए। इसके बाद उनकी टीम से छुट्टी हो गई और वह दोबारा घरेलू मैच खेलने लगे।
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