गीतांजली श्री बुकर जीतने वाली पहली भारतीय लेखिका बन गई हैं। उन्‍होंने अपनी हिंदी उपन्यास 'रेत समाधि' के लिए यह पुरस्‍कार जीता है। इस किताब का डेज़ी रॉकवेल ने अंग्रेजी अनुवाद किया और उसका नाम 'टॉम्ब ऑफ सैंड' हैं।


लंदन (पीटीआई)। गीतांजलि श्री ने अपनी हिंदी उपन्यास 'रेत समाधि' के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता है। साथ ही वह यह पुरस्‍कार जीतने वाली पहली भारतीय लेखिका बन गई हैं। टॉम्ब ऑफ सैंड', उत्तरी भारत में एक 80 वर्षीय महिला के बारे में एक पारिवारिक गाथा है। जो पार्टिशन के अपने किशोर अनुभवों के अनसुलझे ट्रामा का कन्फ्रन्ट करने के लिए पाकिस्तान की यात्रा करती ह। साथ ही रीइवैलूऐट करती है कि एक माँ, एक बेटी, एक महिला और एक नारीवादी होने का क्या मतलब है। गुरुवार को लंदन में एक समारोह में, नई दिल्ली की 64 वर्षीय लेखिका ने कहा कि वह बहुत खुश थी क्योंकि इसके लिए उन्होंने अपना 50,000 पाउंड का पुरस्कार स्वीकार किया है। साथ ही इस पुस्तक की अंग्रेजी अनुवाद डेज़ी रॉकवेल के साथ भी शेयर किया है। पुरस्कार लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से बॉटा है।
कभी नहीं देखा था बुकर जीतने का सपना


गीतांजलि श्री ने आगे कहा कि मैंने मैंने कभी बुकर का सपना नहीं देखा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कर सकती हूं। साथ ही कहा कि मैं आश्चर्यचकित, प्रसन्न, सम्मानित और विनम्र हूँ। अमेरिका के वरमोंट में रहने वाली एक चित्रकार, लेखिका और अनुवादक रॉकवेल उनके साथ मंच पर शामिल हुईं। उन्होंने नोवेल का अनुवाद करने के लिए उन्हें हिंदी भाषा के लिए लव लेटर के रूप में डिस्क्राइब किया। कौन है गीतांजलि श्रीतीन नोवेल और कई कहानी कलेक्शन की लेखिका श्री का जन्‍म मैनपुरी में हुआ है। उन्‍होंने अपने कार्यों का अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, सर्बियाई और कोरियाई में अनुवाद किया है। 'टॉम्ब ऑफ सैंड' ओरिजनली 2018 में हिंदी में पब्लिश्ड हुई थी। जो अगस्त 2021 में टिल्टेड एक्सिस प्रेस द्वारा यूके में अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाली उनकी पहली पुस्तक है। फिक्शन के लिए बुकर पुरस्कार के कॉम्प्लीमेंटींग के रूप में, अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हर साल एक पुस्तक के लिए प्रदान किया जाता है। जिसका अंग्रेजी में अनुवाद किया जाता है और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित किया जाता है।

Posted By: Kanpur Desk