बोरवेल हादसा यूं ही कब तक जाती रहेगी मासूमों की जान

2015-06-29T07:01:44Z

यूं ही कब तक जाती रहेगी मासूमों की जान

PATNA : शहर में एक तरफ प्रशासन की लापरवाही के गढ्डे जहां तहां बने हुए हैं तो दूसरी ओर हमने खुद भी गड्डे खोद रखे हैं। वैसे तो सरकारी महकमे से लेकर जरूरतमंद तक जहां-तहां गढ्डे खोदते रहते हैं लेकिन ये गढ्डे चर्चा में तब तक नहीं आते जबतक कोई हादसा नहीं हो जाता। आखिर लापरवाही के इन गढ्डों के लिए जिम्मेदार कौन है? ट्यूबवेल और बोरवेल से होने वाले हादसे आखिर कब तक होते रहेंगे? इतनी घटनाओं के बाद भी हम सबकी लापरवाही बदस्तूर जारी है। हर जगह मौत के ऐसे गढ्डे दिखते हैं, लेकिन न तो प्रशासन चेत रहा है और न ही लापरवाह नागरिक। आखिर कब तक मासूमों की जिंदगी से ऐसे ही खिलवाड़ चलता रहेगा? ट्यूबवेल और बोरवेल से होने वाले हादसों पर डालते हैं एक नजर :

ख्8 जनवरी ख्00म्

इंदौर में तीन साल का दीपक ख्ख् फीट गहरे गढ्डे में फंस गया। दीपक खेलते-खेलते अचानक गढ्डे में गिर गया था। गढ्डा ट्यूबवेल लगाने के लिए खोदा गया था। हालांकि प्रशासन और गांववालों की मदद से कई घंटे बाद दीपक को निकाल लिया गया था।

ख्फ् जुलाई ख्00म्

प्रिंस को शायद अब तक किसी ने नहीं भूला होगा जो खेलते-खेलते अचानक एक ट्यूबवैल के लिए खोदे गए गढ्डे में जा गिर गया था। बच्चे को बचाने के लिए ऑपरेशन प्रिंस अभियान चलाया गया। सेना ने बड़ी सावधानी से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और कुरुक्षेत्र के प्रिंस को बचा लिया गया।

ख् जनवरी ख्007

झांसी के पास एक गांव में फ्0 फुट गहरे गढ्डे में फंसे ढ़ाई साल के बच्चे की मौत हो गई थी। क्8 घंटे की मशक्कत के बाद जब सेना ने बच्चे को गढ्डे से निकाला तब तक वो मर चुका था। जब बच्चे को निकाला गया तो उसके सिर पर चोट के निशान थे और, उसे सांप ने भी डंस लिया था।

ब् फरवरी ख्007

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में तीन साल का एक मासूम अमित म्0 फिट गहरे गढ्डे में गिर फंस गया था। सेना की मदद से पांच फुट की दूरी पर दूसरा गढ्डा खोदकर उसे निकालने का काम शुरू हुआ। करीब क्क् घंटे की मशक्कत के बाद अमित को गढ्डे से निकाला जा सका।

9 अक्टूबर ख्008

आगरा के पास लहरापुर में म्भ् फीट बोरवेल में गिरने से दो साल के सोनू की मौत हो गई थी। सोनू खेलते-खेलते गढ्डे में गिर गया था। सेना और प्रशासन की टीम सोनू को गढ्डे से निकालने के लिए जुटी थी।

9 नवंबर ख्008

कन्नौज में भगरवाड़ा गांव में म्0 फुट गहरे बोरवेल में फंसे पुनीत को क्8 घंटों की कोशिशों के बावजूद जिंदा बाहर नहीं निकाला जा सका था। पुनीत खेलते-खेलते खुले बोररवेल में गिर गया था।

ख्क् जून ख्009

राजस्थान के दौसा में ख्00 फीट गहरे एक बोरवेल में चार साल की बच्ची अंजू खेलते-खेलते गिर गई थी। ख्क् घंटे की जद्दोजहद के बाद अंजू को बचा लिया गया था।

क्7 सितंबर, ख्009

गुजरात के साबरकांठा जिले में ग्यारह साल का एक बच्चा बोरवेल में गिर गया था। क्क् साल का चिंतन क्00 फीट गहरे बोरवेल में गिरा और ब्0 फीट की गहराई में फंसा गया था। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद चिंतन को बाहर निकाल लिया गया लेकिन अस्पताल ले जाते वक्त उसकी मौत हो गई थी।

लापरवाही बदस्तूर है जारी

ट्यूबवेल और बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ख्7 नवम्बर ख्009 को केंद्र और सभी राज्य सरकारों को सख्त हिदायत दी थी। सभी राज्य सरकारों ने भी अपने सभी अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने को भी कहा था। इसके बावजूद भी ऐसी घटनाएं बदस्तूर जारी है आइए एक नजर डालते हैं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस पर:

- ट्यूबवेल और बोरवेल खुदवाने से क्भ् दिन पहले जमीन या भवन के मालिक को इसकी जानकारी पहले क्षेत्र के जिला कलेक्टर/जिलाधीश/ग्राम सरपंच/सम्बन्धित अधिकारी को लिखित में सूचित करना अनिवार्य है।

- बोलवेल खोदने वाली कंपनियों का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा और बोरवोल खोदते वक्त कंपनी को अपने नाम का बोर्ड मौके पर लगाना होगा।

- बोरवेल की खुदाई के वक्त कंटीली तारों से उसका घेराव कराना अनिवार्य होगा। बोरवेल के चारों तरफ कंक्रीट की फ्0 सेमी दीवार होनी चाहिए।

- गाइडलाइंस के पालन की जिम्मेदारी शहर के कलेक्टर की होगी

- ग्रामीण क्षेत्र में बोरवेल/ट्यूबवेल के खुदाई के कार्य की निगरानी सम्बन्धित सरपंच व कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

- शहरी क्षेत्र में इसकी निगरानी भू-जल विभाग तथा जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता व अभियंता तथा नगर परिषद द्वारा किया जाएगा।

- बोरवेल व ट्यूबवेल लगाने वाले मालिक को उस जगह पर सूचना पट्टी भी लगवाना अनिवार्य है।

- सूचना पट्टी पर बोरवेल की खुदाई करने वाली एजेंसी, उसका पूरा पता, बोरवेल/ट्यूबवेल के उपयोग कर्ता एवं इसके मालिक का नाम व पता आदि भी लिखवाना जरूरी है।

- कुएं की खुदाई करने वाली एजेंसी का जिला प्रशासन के पास पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।

- कुएं को ढकने के लिए मजबूत स्टील के ढक्कन का उपयोग होना चाहिए जिसे जरूरत पड़ने पर खोला व बंद किया जा सके।

- ट्यूबवेल निर्माण व इसके मरम्मत का कार्य पूरा होने के बाद आस-पास के गढ्डो को मिट्टी से पूरी तरह पाटना अनिवार्य है, जिससे किसी भी दुर्घटना की आशंका से बचा जा सके।

- बेकार ट्यूबवेल/बोरवेल को मिट्टी रेत व कंकरीट आदि से अच्छी तरह से भर दें, ताकि किसी भी व्यक्ति या जानवर के इसमें गिरने की संभावना न रहे।

(बोरवेल एवं ट्यूबवेल में छोटे बच्चों के गिरने जैसी घातक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया था.)


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.