गोलमाल का 'पावर ऑफ अटार्नी'

2016-11-30T07:41:13Z

डेढ़ साल में डूबे अरबों

-कालेधन पर केंद्र सरकार की पहल के बाद टूटी राज्य सरकार की नींद

-प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में पावर ऑफ अटार्नी पर लगाई रोक

-लखनऊ के निर्देश पर निबंधन विभाग ने लागू किया शासनादेश

आई इनवेस्टीगेशन

Meerut: पावर ऑफ अटार्नी के मामले में हाईकोर्ट का एक आदेश डेढ़ साल तक फाइलों में दबा रहा और प्रॉपर्टी की बेधड़क खरीद-फरोख्त जारी रही। कालेधन पर केंद्र सरकार की चोट और कड़े आदेशों के बाद राज्य सरकार नींद से जागी। फाइलों में कागजात तलाशे गए और आनन-फानन में जनपद मुख्यालय को पावर ऑफ अटार्नी से खरीद-फरोख्त पर रोक के आदेश दे दिए। यदि डेढ़ साल पहले आदेश का ख्याल आता तो सरकार को शायद अरबों रुपए का लाभ होता।

कर रहे हैं राजस्व हानि

देखने में आया है कि जमीनों की खरीद-फरोख्त में पावर ऑफ अटार्नी के विकल्प को मुख्य धारा में शामिल कर लिया गया। इसका असर यह रहा कि दूसरे शहरों, प्रदेशों यहां तक के विभिन्न संप्रदाय के लोग भी एक-दूसरे को पावर ऑफ अटार्नी करने लगे। संपत्ति की खरीद-फरोख्त में पावर ऑफ अटार्नी का प्रयोग दस्तावेज के तौर पर शुरू हो गया तो रजिस्ट्री न होने से सरकार को राजस्व हानि होने लगी। तो वहीं संपत्ति विवाद प्रकाश में आए। पावर ऑफ अटार्नी की आड़ में संपत्ति का मालिकाना हक बदल रहा था और पर्दे के पीछे अटार्नी करने वाले और कराने वाले के बीच कालेधन का लेनदेन हो रहा था।

2010 में लगाई थी रोक

पावर ऑफ अटार्नी के माध्यम से हो रहे गोरखधंधे को संज्ञान में लेते हुए महानिरीक्षक कार्यालय (लखनऊ) ने 21 मई 2010 को शासनादेश जारी कर पावर ऑफ अटार्नी पर रोक लगा दी थी। आदेश के विरोध में हाईकोर्ट में एक याचिका (प्रेमपाल बनाम उप्र सरकार) दर्ज की गई। कोर्ट ने 7 मार्च 2011 को सरकार के आदेश को स्टे कर दिया और सूबे में फिर से पावर ऑफ अटार्नी का गोरखधंधा शुरू हो गया। चार वर्ष बाद हाईकोर्ट ने अपने स्टे ऑर्डर को समाप्त करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया। याचिका निरस्त होने के बाद शासन का 21 मई 2010 का आर्डर इम्प्लीमेंट हो रहा है।

डेढ़ साल बाद जागे

महानिरीक्षक निबंधन अनिल कुमार द्वारा सूबे के सभी जनपदों को 21 नवंबर को जारी शासनादेश में कोर्ट की प्रक्रिया और याचिका को खारिज करने का जिक्र करते हुए पावर ऑफ अटार्नी पर रोक के आदेश दिए हैं। सवाल यह है कि सरकार ने कोर्ट के आदेश को डेढ़ साल तक क्यों दबाए रखा? आखिर क्यों सरकार ने अपने पूर्व आदेश पर अमल नहीं किया? जबकि सरकार यह पहले ही घोषित कर चुकी है कि पावर ऑफ अटार्नी के नाम पर गोरखधंधा और कालेधन का लेनदेन हो रहा है।

रखी जाएगी शर्त

पावर ऑफ अटार्नी पर रोक के साथ ही सरकार द्वारा कंडिशनल अटार्नी को एसेप्ट किया जाएगा।

-पॉवर ऑफ अटार्नी करने वाले व्यक्ति का निवास और संपत्ति उसी क्षेत्र में होनी चाहिए जिस कार्यालय में वो अटार्नी को रजिस्टर्ड कराने आया है। निवास के साक्ष्य भी देने होंगे।

-अटार्नी के दस्तावेजों में दर्ज प्रतिफल की धनराशि मूल स्वामी (मुख्तारदाता) को प्राप्त हो रही है, वो भी उसके बैंक खाते में। ये सुनिश्चित करने के बाद ही पावर ऑफ अटार्नी को मान्य करेंगे।

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संपत्ति के खरीद-फरोख्त में पावर ऑफ अटार्नी को रजिस्टर्ड करने पर सरकार ने रोक लगा दी है। कालेधन के प्रयोग और राजस्व को हानि कर हो रही पावर ऑफ अटार्नी रजिस्टर्ड नहीं हो सकेगी।

-संजय श्रीवास्तव, एआईजी, निबंधन

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Posted By: Inextlive

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