नॉट रिचेबल होती बीएसएनएल लैंडलाइन सेवा

2019-06-28T06:01:06Z

- हर 6 महीने पर हो रहा 50 लाख का लॉस

- गोरखपुर बीएसएनएल ऑफिस को नहीं मिलता मेंटनेंस का पैसा, दूर होते जा रहे कंज्यूमर्स

GORAKHPUR: ट्रिन-ट्रिन की आवाज आई और फोन उठा, उधर से आवाज आई मैं मुंबई से अजय बोल रहा हूं, आपके बगल में शर्मा जी का मकान है, जरा उनको बुला दिजिए। आधे घंटे बाद फिर फोन करूंगा। इसके बाद चाहे कड़ी दोपहर हो या फिर रात अपने पड़ोसी को बुलाकर बैठाया जाता था। जब तक फोन न आ जाए उनकी आवभगत भी होती रहती थी। वहीं जब भी कोई घंटी बजी पड़ोसी से फोन उठाने को कहा जाता था। करीब सन 98-2000 की ये बातें आज भी गोरखपुराइट्स को याद होंगी। इतनी यादों से जुड़ा बीएसएनएल लैंडलाइन आज लोगों से दूर होता जा रहा है। इस बारे में गोरखपुराइट्स से बात की गई तो उन्होंने बताया कि बार-बार लाइन का खराब होना, कंप्लेन के बाद भी टाइम पर ठीक ना हो पाना और समय के साथ बीएसएनएल का अपडेट ना होना ऐसी वजह हैं जिनके चलते लोग बीएसएनएल की लैंडलाइन सेवा से दूर होते चले गए। वहीं घटते बिजनेस की वजह से ही गोरखपुर में बीएसएनएल कर्मियों की सैलरी भी रुक-रुक कर मिल रही है।

एक करोड़ पर सिमटा तीन करोड़ का बिजनेस

बीएसएनएल कर्मी ने बताया कि लैंडलाइन, ब्रॉड बैंड और बीएसएनएल सिम से छह माह पहले तक तीन करोड़ का बिजनेस था जो घटकर करीब एक करोड़ हो गया है। इसके साथ ही हर छह माह में 25 प्रतिशत बिजनेस डाउन हो रहा है। इतने रुपए से अगर केवल सैलरी बांटी जाए तो वो कम पड़ जाएगी। इस समय गोरखपुर टेलीफोन ऑफिस में 320 कर्मचारी हैं।

डेवलपमेंट भी कारण

गोरखपुर शहर में डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है। इसके कारण आए दिन सड़क खोदी जा रही है। सड़कों को खोदने के दौरान ही बार-बार टेलीफोन लाइनें भी कट जाती हैं। खराब लाइन ठीक कराते ही फिर कहीं और कट जाती हैं। जिससे कंज्यूमर्स परेशान होते हैं। रोज-रोज की कंप्लेन से तंग आकर वे लाइन ही कटवा लेते हैं।

मेंटनेंस के लिए नहीं मिल रहा बजट

बीएसएनएल कर्मी ने बताया कि पहले हर महीने मेंटनेंस के नाम पर बजट आता था जो अब नहीं आता है। कभी-कभार आता भी है तो बहुत ही कम होता है जिससे कुछ नहीं हो सकता है। वहीं बीएसएनएल का केबल एक बार कट गया तो फिर दोबारा वहां नया केबल नहीं डाला जाता है। क्योंकि बीएसएनएल के पास इसके लिए बजट आना बंद हो गया है, इस कारण खराब केबल को टेंपररी तौर पर जोड़ कर चलाया जाता है या फिर बंद कर दिया जाता है। इससे उस केबल से जुड़े कंज्यूमर्स का कनेक्शन अपने आप कट हो जा रहा है।

इन एरियाज में कटा केबल

गोरखपुर के बरगदवां, मेडिकल कॉलेज, एयरफोर्स सहित अन्य एरिया में तेजी से डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं। यहां निर्माण के दौरान केबल कटने के बाद उसे दोबारा दुरुस्त नहीं कराया गया जिससे इन एरियाज के कंज्यूमर्स बीएसएनएल सेवा से दूर हो गए।

गोरखपुर में बचे 12 हजार कनेक्शन

कुछ साल पहले तक गोरखपुर में बीएसएनएल लैंडलाइन के 45-50 हजार कनेक्शन हुआ करते थे जो समय के साथ धीरे-धीरे घटते चले गए। इस समय गोरखपुर जिले में 12 हजार कनेक्शन रह गए हैं जिनमें से 9 हजार केवल शहरी एरिया में हैं।

हर महीने लग रहे 100 नए कनेक्शन

कर्मियों का कहना है कि गोरखपुर में हर महीने 90 से 100 नए कनेक्शन लगाए जाते हैं लेकिन हर महीने 70-80 कनेक्शन बंद भी हो रहे हैं जिससे स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है।

कर्मचारियों में सैलरी को लेकर संशय

लगातार घाटे में जाते बीएसएनएल को अगर सरकार की तरफ से मदद नहीं मिली तो इसका ग्राफ और गिरता जाएगा। यहां के कर्मियों की इधर सैलरी भी कई बार रुक-रुक कर आई है जिससे उनका भी हौसला टूटा है।

बॉक्स

बिजली कटौती से हांफने लग रहे टावर

रूरल एरिया में लगे बीएसएनएल के टावर्स में पैसों के अभाव में डीजल नहीं पड़ पा रहे हैं। जिससे लाइट जाते ही टावर बैट्री के भरोसे हो जाते हैं। वहीं बैट्री भी पुरानी और वीक हो चुकी हैं जिसके कारण वो ज्यादा देर तक काम नहीं कर पा रहीं। इस वजह से नेटवर्क की प्रॉब्लम हमेशा बनी रहती है। इसकी वजह से भी लोग बीएसएनएल से दूरी बना रहे हैं।

गोरखपुर बीएसएनएल में टेलिफोन कर्मी- 320

कंज्यूमर्स- 12 हजार टोटल

केवल शहर में कंज्यूमर- 9000

ब्रॉड बैंड कनेक्शन- 6 हजार

इस समय बिजनेस -करीब एक करोड़ रुपए

वर्जन

मेंटनेंस के अभाव में लाइनें बंद होती जा रही है। इसके लिए बजट भी नहीं मिल रहा है। जिसके कारण कंज्यूमर्स भी घटते जा रहे हैं। बीएसएनएल को अपडेट करने की जरूरत है उसके लिए बजट मिलता नहीं।

- देवेन्द्र सिंह, प्रधान महाप्रबंधक, बीएसएनएल


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