मायावती का इशारा उनके बाद पार्टी की कमान संभालेगा उनका परिवार भाईभतीजे को साैंपे ये पद

2019-06-24T10:01:58Z

मायावती ने भाई और भतीजे को संगठन में अहम पद देकर साफ कर दिया कि उनके बाद पार्टी के कर्ताधर्ता उनके परिवार के सदस्य ही रहेंगे।

- मायावती ने अपने रिश्तेदारों को संगठन में सौंपे अहम पद
- दानिश अली को लोकसभा में बसपा दल का नेता बनाया

- नई दिल्ली में हुई अहम बैठक में गठबंधन पर फिर हमला
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LUCKNOW :
अपने परिवार के किसी सदस्य को कभी राजनीतिक विरासत न सौंपने का ऐलान करने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती ने लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद अपने भाई और भतीजे को संगठन में अहम पद देकर साफ कर दिया कि उनके बाद पार्टी के कर्ताधर्ता उनके परिवार के सदस्य ही रहेंगे। चंद माह पूर्व बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटाए गये अपने भाई आनंद कुमार को उन्होंने फिर से यह पद सौंप दिया है। साथ ही भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया है। रविवार को नई दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने एक बार फिर सपा से गठबंधन को लेकर तमाम तल्ख टिप्पणियां भी की।
रामजी गौतम का भी बढ़ा कद
मायावती ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को राज्यसभा में नेता बसपा दल बनाने का ऐलान किया है। इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव रामजी गौतम को भी नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि बसपा में कोऑर्डिनेटर का पद बेहद अहम माना जाता है। रामजी गौतम भी मायावती के रिश्तेदार बताए जाते हैं। अमरोहा से लोकसभा चुनाव जीत कर आए कुंवर दानिश अली को लोकसभा में पार्टी का नेता सदन बनाया गया है। इसके अलावा नगीना लोकसभा सीट से जीते गिरीश चंद्र को लोकसभा में पार्टी का सचेतक बनाया गया है। संगठन में हुए इस अहम फेरबदल से यह भी साफ हो गया कि पार्टी का पूरा दारोमदार मायावती के बाद उनके करीबी रिश्तेदारों के जिम्मे ही रहेगा। उनके बाद आनंद की पार्टी में फिर से नंबर टू की हैसियत हो गयी है तो आकाश और रामजी गौतम की नेशनल कोआर्डिनेटर के पद पर तैनाती से साफ है कि भविष्य में होने वाले सभी चुनावों में दोनों की बड़ी भूमिका होगी।

कर्नाटक चुनाव के बाद हटाया था

ध्यान रहे कि मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पिछले वर्ष कर्नाटक चुनाव के बाद 27 मई को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटा दिया था। उस दौरान मायावती ने यह भी ऐलान किया था कि कोई उनके उत्तराधिकारी बनने का सपना न देखे। उन्होंने कहा था कि भविष्य में उनके परिवार को कोई भी सदस्य पार्टी संगठन के वरिष्ठ पद पर नहीं रहेगा, ना ही उसे चुनाव लड़ाकर सांसद, एमएलसी या मंत्री आदि बनाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने बाकायदा पार्टी संविधान में कुछ संशोधन भी किए थे। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने अपने भतीजे आकाश की पार्टी में एंट्री कराई और इसके बाद आनंद को जरूरत पडऩे पर चुनाव लड़ाने की बात भी कही थी।
सपा से और बढ़ी दूरियां
सूत्रों की मानें तो बैठक में मायावती ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव में सपा के साथ हुए गठबंधन को लेकर तमाम तल्ख टिप्पणियां की और सपा को ही गठबंधन की हार का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चुनाव के दौरान अखिलेश यादव से हुई चुनावी रणनीति के बारे में भी पदाधिकारियों को अवगत कराते हुए कहा कि मैंने अखिलेश को फोन करके परिवार के सदस्यों की हार पर दुख जताया था। ध्यान रहे कि लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मायावती ने सपा से गठबंधन तोडऩे के संकेत दिए थे। बाद में अखिलेश ने भी खुद को इंजीनियरिंग का स्टूडेंट बताते हुए गठबंधन को एक प्रयोग करार दिया था। उन्होंने कहा था कि जरूरी नहीं कि हर प्रयोग सफल हो जाए।
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आकाश पर ज्यादा भरोसा

मायावती के इन फैसलों से साफ है कि वे अपने भतीजे आकाश पर ज्यादा भरोसा जता रही हैं। इसकी वजह यह है कि आकाश ने लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई थी और टिकटों के बंटवारे से लेकर चुनाव प्रबंधन की कमान तक उनके पास थी। लंदन से पढ़ाई करके आए आकाश ही सोशल मीडिया की दुनिया से दूर रहने वाली मायावती का ट्विटर हैंडिल भी बनवाया जिसके जरिए वे अपने समर्थकों तक अपने संदेश भेजती रहती हैं। मायावती ने चुनाव के दौरान ही आकाश को पार्टी में कोई अहम जिम्मेदारी देने की घोषणा भी की थी।



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