नौनिहालों के निवाले पर बजट का संकट

2018-10-14T06:00:19Z

जिले के 100 से ज्यादा स्कूलों में बंद की गई योजना

नहीं मिल रहा योजना का बजट, रसोइये का मानदेय भी नहीं

Meerut। नौनिहालों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकारी स्कूलों में दिए जा रहे मिड डे मील पर एक बार फिर संकट गहरा रहा है। बजट की किल्लत के चलते स्कूल मिड डे मील से हाथ खींच रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि उन्हें न तो बजट मिल रहा है, न ही कुक कम हैल्पर का मानदेय दिया जा रहा है। स्कूलों में मिड डे मील का चूल्हा का ठंडा होने के कगार पर पहुंच गया है।

कई जगह हुआ बंद

मिड डे मील के लिए बजट न होने की समस्या से 100 से ज्यादा स्कूलों ने अगस्त से ही मिड डे मील देना बंद कर दिया है, जबकि अन्य स्कूल भी ग्रांट प्राप्त न होने के चलते इसे बंद करने का मन बना रहे हैं। स्कूलों को पहली तिमाही (अप्रैल से जून) और दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) तक का बजट जारी होना था, लेकिन स्थिति यह है कि स्कूलों को पिछले 6 महीने की ग्रांट का एक रुपया भी प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं पिछले एक साल से प्राथमिक स्कूलों के रसोइयों का पैसा भी रिलीज नहीं हुआ है।

उधार से चल रहा मील

छह महीने से बजट न मिलने के बावजूद स्कूलों में उधार पर मिड डे मील तैयार करवाया जा रहा था। जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षक अपने पास से ही पैसे की व्यवस्था कर इसे तैयार करवा रहे हैं, लेकिन बढ़ती उधारी के चलते तमाम स्कूल इससे मुंह मोड़ रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि एक दो महीने की उधारी चल सकती है, लेकिन छह महीने के बाद उधार मिलना मुश्किल है।

जिला स्तर पर अटकी ग्रांट

मिड डे मील के मंडलीय समन्वयक वीरेंद्र कुमार का कहना है कि स्कूलों में पिछले कई महीनों से ग्रांट नहीं मिली है। स्टेट से ग्रांट रिलीज होने के बाद जिला स्तर पर ग्रांट अटकी हुई है। कई स्कूलों में मिड डे मील दो महीने पहले ही बंद हो गया है, जबकि बजट के अभाव में अधिकतर स्कूल मिड डे मील जारी रखने में असमर्थता जता रहे हैं।

Posted By: Inextlive

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.