कमाई से ज्यादा खर्च करेगा नगर निगम

2019-03-03T06:00:49Z

हंगामे के बीच सर्वसम्मति से पास हुआ नगर निगम का 412 करोड़ का बजट

- 366 करोड़ रुपये खर्च और 306 करोड़ रुपये आय का प्रावधान

- पिछले साल की तुलना में करीब 34 करोड़ रुपये से अधिक का है बजट

बरेली : हंगामे के बीच सैटरडे को नगर निगम की बोर्ड बैठक में 412 करोड़ का बजट पेश हुआ। सर्वसम्मति से इसे मंजूरी भी मिल गई। इस बजट से वित्तीय वर्ष 2019-20 में शहर में विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें समस्त छोटे बड़े निर्माण कार्य भी शामिल हैं। बैठक में करीब 46 पार्षद मौजूद रहे। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए बजट में 366 करोड़ रुपये व्यय और 306 करोड़ रुपये आय का प्रावधान किया गया है। यह बजट पिछले साल की अपेक्षा करीब 34 करोड़ रुपये अधिक है।

50 लाख से होगी डोर टू डोर सफाई

मेयर डॉ। उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन की मौजूदगी में शहर के समस्त वार्डो की साफ सफाई के लिए 50 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। शहर में गंदगी का आलम यह है कि कई बार पार्षदों ने इसको लेकर निगम की बैठकों में जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया। हर बार निगम गंदगी हटाने को लेकर नई व्यवस्था लागू करता है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

3 करोड़ 75 लाख पेयजल के लिए

3 करोड़ 75 लाख रुपये से शहर की पेयजल व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इससे नये ट्यूबवेल व पम्पों की मरम्मत, सीवर लाइन की मरम्मत व अन्य कार्य कराए जाएंगे। वहीं शहर में कई स्थानों पर नये हैंडपंप भी लगाए जाएंगे।

50 लाख से नालों की सफाई

नालों की सफाई के लिए 50 लाख रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। इसी बजट से नियमित रूप से सफाई अभियान भी चलाए जाएंगे। इस अभियान की मासिक रिपोर्ट नगर आयुक्त को सौंपी जाएगी।

अमृत योजना के लिए दो करोड़ इस योजना के तहत पार्को के सौंदर्यीकरण के लिए 4 करोड़ के व्यय का प्रस्ताव रखा गया, जिसको घटाकर 2 करोड़ रुपए कर दिया गया।

बैठक के बीच में निकल गए विपुल लाला

बैठक के दौरान मेयर डॉ। उमेश गौतम और पार्षद विपुल लाला के बीच छिड़ी रार का असर साफ तौर पर नजर आया। मेयर ने पार्षदों से अपना पक्ष रखने को कहा तो सभी ने अपने सुझाव दिए। जैसे ही विपुल लाला ने कुछ बोलना चाहा तो मेयर ने उन्हें बाहर जाने को बोल दिया। इसके बाद विपुल लाला बैठक को बीच में ही छोड़कर चलते बने।

बैठक का बना दिया मखौल

सदन की नियमावली की माने तो बोर्ड बैठक में बजट संबंधी सुझाव ही रखने का प्रावधान है। लेकिन निगम में इस नियमावली का सरेआम मखौल बनाया गया। बैठक की शुरुआत में ही नाली नाला और जन शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया। इसका बैठक में मौजूद कई पार्षदों ने विरोध किया।

नगर आयुक्त को सिखाया नियमावली का पाठ

बैठक की शुरुआत में पार्षद विकास शर्मा सदन की नियमावली लेकर पहुंचे जिसका कई पार्षदों ने मजाक भी उड़ाया। वह नगर आयुक्त को बार-बार नियमावली के नियम समझाते नजर आए।

नगर आयुक्त और मम्मा में बहस

बैठक में सबसे आगे वाली सीट पर पार्षद सतीश चंद्र मम्मा और विकास शर्मा बैठे थे। बार-बार मेयर और नगर आयुक्त के सुझाव पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे। जिस पर नगर आयुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई।

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बॉक्स : विशेष निधियों से प्राप्त बजट

। राज्य वित्त आयोग - 50 करोड़

2. अवस्थापना निधि - 15 करोड़

3. 14 वां वित्त आयोग - 70 करोड़


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