यहां जनरल स्टोर पर मिलते हैं बस पास

2013-06-25T21:54:39Z

GORAKHPUR रोडवेज बस में फर्जी पास जारी कर ट्रेवल करने का जबरदस्त खेल चल रहा है हाल ही में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं आई नेक्स्ट ने जब इन फर्जी पास के बारे में जानकारी जुटाई तो चौंकाने वाला मामला सामने आया रोडवेज के सामने एक किराने की दुकान से यह पूरा खेल संचालित हो रहा है इस दुकान पर खुलेआम धड़ल्ले से फर्जी पास के फॉर्म बेचे जा रहे हैं आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने इस दुकान पर एक कस्टमर बनकर बात की तो शॉपकीपर ने मात्र 1 रुपए में पास फार्म दे दिया आपको सुनकर हैरानी होगी कि 1 रुपए में मिले इस फार्म पर रोडवेज के किसी अधिकारी का फर्जी सील ठप्पा लगाकर कोई भी 100 किलोमीटर के अंदर फ्री सफर कर सकता है

परचून नहीं 'बस पास' की दुकान
रोडवेज बसों में आए दिन हो पकड़े जा रहे फर्जी पास पर आई नेक्स्ट ने एक वीक तक इंवेस्टिगेशन किया. इंवेस्टिगेशन में  में खुलासा हुआ कि यह पूरा रैकेट एक परचून की दुकान से चल रहा है. गोरखपुर डिपो के सामने स्थित एक जनरल मर्चेंट की शॉप पर फर्जी पास फार्म बेचे जा रहे हैं. इंफारमेशन मिलते ही आईनेक्स्ट रिपोर्टर ने शॉप पर पहुंचा. वहां शॉपकीपर से बात की तो कई चौंकाने वाले मामले सामने आए. पेश है रिपोर्टर और शॉपकीपर की बातचीत के कुछ अंश-

रिपोर्टर - भईया एक रोडवेज के पास का फॉर्म चाहिए था.
शॉपकीपर- अभी तो फार्म नहीं है.
रिपोर्टर - बहुत जरूरी है.
शॉपकीपर - अच्छा रुकिए देखता हूं शायद एक-दो मिल जाएं.
रिपोर्टर - देख लीजिए एक भी मिल जाएगा तो मेरा काम हो जाएगा.
शॉपकीपर- अच्छा ठीक है. कितने चाहिए.
रिपोर्टर- पांच दे दीजिए.
शॉपकीपर ने दुकान के अंदर रखे एक प्लास्टिक के थैले से रोडवेज पास फार्म का एक बंडल निकाला और उसमें से पांच फार्म रिपोर्टर को दे दिए.
शॉपकीपर- ये लीजिए फार्म.
रिपोर्टर- कितने रुपए हुए.
शॉपकीपर- पांच रुपए.
रिपोर्टर- आपके पास रोडवेज के यह पास फार्म कहां से आते हैं?
शॉपकीपर- पहले से रखा हुआ था.
रिपोर्टर - कौन-कौन खरीदता है?
शॉपकीपर- विभागीय कर्मचारी खरीदते हैं और कौन खरीदेगा.
फॉर्म के बाद फ्री ट्रेवल-
परचून की दुकान से मिले रोडवेज पास फार्म के बाद कोई भी व्यक्ति 10-15 दिन तक बसों में फ्री ट्रेवल कर सकता है. केवल उसे इस फार्म पर वरिष्ठ केंद्र प्रभारी की फर्जी सील और साइन की जरूरत होती है.
100 किलोमीटर तक फ्री सफर-
इस फर्जी पास से कोई भी व्यक्ति 100 किलोमीटर तक फ्री में ट्रेवल कर सकता है. रोडवेज के एक परिचालक ने बताया कि कई बार तो लोग इसी पास से लखनऊ तक सफर कर लेते हैं.
7-15 दिन के लिए होता है वैलिड
रोडवेज डिपार्टमेंट से मिली जानकारी के मुताबिक यह पास गोरखपुर व राप्तीनगर डिपो से लखनऊ, कुशीनगर, आजमगढ़, सोनौली व पड़रौना आदि रूट्स पर यात्री लेकर चलते हैं. इसके लिए वरिष्ठ केंद्र प्रभारी के फर्जी स्टैंप से सफर करने वाला 7-15 दिन तक सफर कर सकता है. इस तरह अगर कोई यात्री गोरखपुर से बस्ती के बीच सफर करता है तो उसके 15 दिन के 1800 रुपए किराये की बचत हुई. उसके बाद फिर 15 दिन का फर्जी पास जारी कर वह दूसरे ट्रिप में भी यात्रा कर सकता है. जो नियमानुसार गलत है.

फर्जी पास का महाखेल

केस वन
डेट- 18 जून
परिवहन निगम की बस को आरएम स्क्वॉयड ने माड़ापार स्टापेज के पास छापा मारा. छापेमारी के दौरान बस में फर्जी पास लिए हुए सज्जाद अली नाम का एक व्यक्ति था. जो गोरखपुर से देसही देवरिया के लिए सफर कर रहा था. पकड़े गए व्यक्ति से जब आरएम स्क्वॉयड ने पूछताछ की तो उसने बताया कि वह राप्तीनगर डिपो के वर्कशॉप में बेल्डर के पद पर तैनात हैं. इस मामले में कार्रवाई के लिए आरएम स्क्वॉयड ने आरएम और मुख्यालय दोनों को ही रिपोर्ट की है.
केस टू
डेट - 2 जून
गोरखपुर से बड़हलगंज के बीच विंध्यनगर डिपो की बस संख्या यूपी-65 सीटी 1256 को आरएम स्क्वॉयड ने चेक किया. चेकिंग दौरान बस में कुल 65 यात्री सवार थे. जिसमें दो यात्री ऐसे मिले जिनके पास फर्जी पास था. जो गोरखपुर से मऊ के लिए राप्तीनगर डिपो से इश्यू किए गए थे. फर्जी पास पर वाइफ एंड डॉटर ऑफ स्टेशन इंचार्ज राप्तीनगर डिपो दर्ज था. इसके अलावा वरिष्ठ केंद्र प्रभारी उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम की स्टैंप लगी हुई थी. इस मामले में कार्रवाई के लिए यूपीएसआरटीसी हेड क्वार्टर लखनऊ को भेज दी गई है.
बीबी और बच्चे बनाकर इश्यू कराते हैं पास
आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने जब इस फर्जीवाड़े के डेप्थ में इंफारमेशन जुटाई तो पता चला कि ज्यादातर रोडवेजकर्मी अपने किसी जानने वाले को फर्जी पास इश्यू करते हैं. कोई अपनी बीबी बनाकर यात्रा कराता है तो कोई अपना बच्चा. जबकि हकीकत में न तो उस कर्मचारी की बीबी होती है और ना ही उसका बच्चा. इसका भी खुलासा आरएम स्क्वॉयड पहले कर चुकी है.
स्टेशन इंचार्ज के नाम का लगता है स्टैंप
आरएम स्क्वॉयड के मेंबर ने बताया कि ज्यादातर रोडवेज कर्मचारी खुद ही वरिष्ठ केंद्र प्रभारी के नाम का स्टैंप लगा लेते हैं. अगर किन्हीं कारण से फर्जी पास स्टैंप नहीं लग पाया है तो कुछ रुपए भी देकर स्टैंप लगवा लेते हैं. उसके बाद उस फर्जी पास को अपने किसी जानने वाले को जारी कर देते हैं.
क्या है यूपीएसआरीटीसी एमडी का आदेश
यूपीएसआरटीसी हेड क्वार्टर से मिली जानकारी के मुताबिक, निगम की बसों में परिवहन निगम के कायार्लयों के नामो का दुरुपयोग कर फर्जी पासों के आधार पर कुछ यात्रियों द्वारा अनाधिकृत यात्रा की जा रही है. जो गलत है. परिवहन निगम के केवल नियमित अधिकारियों और कर्मचारियों को निगम की बसों में यात्रा हेतु निशुल्क फैमिली पास और ड्यूटी पास सक्षम अधिकारियों द्वारा बनाए जाते हैं. रेगुलर और संविदा कर्मचारी अगर ड्यूटी पास अथवा फैमिली पास के बिना यात्रा करते हैं तो उन्हें नियमानुसार टिकट लेना अनिवार्य होगा.
जनरल मर्चेंट की दुकान पर अगर फर्जी पास फॉर्म बिक रहा है और फर्जी स्टैंप लगाकर लोगों को यात्रा कराया जा रहा है तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जो भी इस खेल में शामिल होगा. उसके खिलाफ गाज गिरना तय है.
अतुल जैन, आरएम, यूपीएसआरटीसी, गोरखपुर रीजन



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