200 करोड़ का घाटा खाकर सिंडिकेट के आगे झुकी सरकार

2019-06-20T06:00:24Z

- शराब की 234 बची दुकानें को आखिर 270 करोड़ का घाटा खाकर सिंडिकेट के आगे झुकी सरकार

- कैबिनेट ने निर्धारित से 35 परसेंट कम रेट पर इन दुकानों को अब लॉटरी से आवंटित करने का लिया डिसीजन

देहरादून,

शराब की 234 बची दुकानें मिनिमम रेट से कम पर आवंटित नहीं करने की जिद पकड़कर बैठी सरकार को आखिर 270 करोड़ का घाटा खाकर सिंडिकेट के आगे झुकना पड़ा। कैबिनेट ने निर्धारित से 35 प्रतिशत कम रेट पर इन दुकानों को अब लॉटरी से आवंटित करने का डिसीजन लिया है। इस डिसीजन को स्टेट में शराब कारोबार करने वाले सिंडिकेट की जीत बताया जा रहा है।

270 करोड़ का घाटा

शराब की ये 234 दुकानें अप्रैल में ही आवंटित होनी थी, लेकिन इनका आवंटन नहीं हो पाया। 234 दुकानों से मिलने वाला अनुमानित रेवेन्यू करीब 1000 हजार करोड़ वार्षिक है। वित्त वर्ष के 80 दिन बीत चुके हैं, लेकिन दुकानों का अब तक आवंटन नहीं हुआ। कैबिनेट डिसीजन का नोट आबकारी विभाग तक पहुंचने और लॉटरी प्रक्रिया पूरी करने में 10 दिन का समय और लग सकता है। ऐसे में इस डिसीजन की वजह से नुकसान का कैलकुलेशन करें तो समय की वजह से 3 माह का राजस्व नुकसान 270 करोड़ आंका गया है।

शराब कारोबारियों का सिंडिकेट पड़ा भारी

स्टेट में शराब की 619 दुकानें निर्धारित हैं, जिनका हर वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक मिनिमम रेट पर इच्छुक कारोबारी को आवंटन किया जाता है। शराब कारोबारियों ने सिंडिकेट बनाकर सरकार पर अप्रैल में दुकानों के रेट कम करने के लिए दबाव बनाया था, तब सरकार नहीं झुकी, तो शराब कारोबारियों ने सिंडिकेट बना लिया और सबसे अधिक राजस्व वाली दुकानों का आवंटन नहीं होने दिया। सरकार ने कई प्रयास किए लेकिन बात नहीं बनी और 234 दुकानें आज तक आवंटित नहीं हो पाई। ऐसे में इन दुकानों को 35 प्रतिशत रेट कम कर लॉटरी माध्यम से आवंटित करने का फैसला सिंडिकेट की जीत मानी जा रही है।

जिन्होंने पहले दुकान ली वो पशोपेश में

619 में से अब तक आवंटित 385 दुकानों के ओनर इस फैसले से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि 234 दुकानें अब तक आवंटित न होने से इन्होंने जमकर चांदी काटी, फिर भी ये लोग सरकार को अपना रेवेन्यू टारगेट कम करने के लिए दबाव बनाने का प्लान कर रहे हैं।

10 परसेंट का गेम

वित्तीय वर्ष के 12 में 3 माह बीत जाने के बाद समय के हिसाब से कैलकुलेट करें तो 25 परसेंट रेवेन्यू कम होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने अगले 9 माह में सिर्फ 65 परसेंट रेवेन्यू अचीव करने का डिसीजन लिया। ऐसे में 10 परसेंट का असल नुकसान सरकार को ओर लाभ सिंडिकेट को मिलेगा।

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हमने 12 माह के हिसाब से एवरेज निकालकर 3 माह का राजस्व कम कर अगले 9 माह के लिए 65 परसेंट कम रेवेन्यू टारगेट दिया है। सरकार को इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री, प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार

Posted By: Inextlive

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