'गॉड पार्टिकल' की खोज करने वालों को नोबेल

2013-10-09T10:46:00Z

बेल्जियम के भौतिक विज्ञानी फ़्रांस्वा इंगलर्ट और ब्रिटेन के पीटर हिग्स को 2013 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ़ साइंसेस ने पुरस्कार का ऐलान करते हुए कहा, "दोनों वैज्ञानिकों ने परमाणु से छोटे कणों के द्रव्यमान को समझाने की प्रक्रिया की सैद्धांतिक खोज की है."
एकेडमी के अनुसार बीते साल जेनेवा में एक प्रयोगशाला में हिग्स पार्टिकल की खोज से इन वैज्ञानिकों के सिद्धांतों की पुष्टि हुई है. इस कण को हिग्स बोसॉन भी कहा जाता है.

रॉयल स्वीडिश एकैडमी ऑफ साइंसेस के स्थायी सचिव स्टैफन नॉरमार्क ने कहा, “इस साल का पुरस्कार एक बहुत छोटी चीज़ के बारे में है जो बहुत बड़ा असर डालती है.”
प्रोफ़ेसर हिग्स मीडिया से दूर रहने के लिए जाने जाते हैं और जब नोबल पुरस्कार का ऐलान हुआ उसके ठीक बाद भी उनसे इंटरव्यू के लिए संपर्क नहीं किया जा सका.
एडिनबरा विश्वविद्यालय में उनके साथ काम करने वाले ऐलन वॉकर ने ब्रितानी मीडिया को कहा, "वह मीडिया से बचने के लिए बगैर फ़ोन लिए छुट्टी पर गए हुए हैं. उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है."
'दशकों बाद पुष्टि'
एडिनबरा विश्वविद्यालय ने हिग्स का एक बयान जारी किया. हिग्स एडिनबरा विश्वविद्यालय में सैद्धांतिक भौतिकी के अवकाश प्राप्त मानद प्रोफ़ेसर हैं.
उनके बयान में कहा गया है, "मैं ये पुरस्कार पाकर बेहद ख़ुश हूं और रॉयल स्वीडिश एकैडमी को धन्यवाद देता हूं. उन सभी लोगों को भी बधाई जिन्होंने इस नए कण की खोज में योगदान दिया और मेरे परिवार, दोस्तों और साथी कर्मचारियों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद.”
फ्रांस्वा इंगलर्ट ने कहा कि वो “बहुत खुश” हैं. उन्होंने कहा, “पहले लगा कि मुझे ये पुरस्कार नहीं मिला है क्योंकि मैं पुरस्कार का ऐलान नहीं देख पाया.”
इंगलर्ट और हिग्स उन कई भौतिकविज्ञानियों में शामिल हैं जिन्होंने 1960 में ब्रह्मांड में मूलभूत पदार्थ की सरंचना को लेकर एक प्रक्रिया का सुझाव दिया था.
इस प्रक्रिया में एक कण- हिग्स बोसोन- होने का अनुमान लगाया गया था.
जेनेवा के परमाणु अनुसंधान संगठन सर्न के वैज्ञानिक 2012 में इस कण को खोज पाए. यूरोपियन पार्टिकल फिज़िक्स लैबोरेट्री ने जुलाई में इसका ऐलान किया था.
हिग्स बोसॉन को "गॉड पार्टिकल" भी कहा जाता है. इस कण की खोज के लिए हज़ारों वैज्ञानिकों को लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में प्रोटॉनों की टक्कर से मिले काफ़ी लंबे-चौड़े आंकड़ों को खंगालना पड़ा.
लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर की लागत 10 अरब डॉलर यानी करीब 62 हज़ार करोड़ रुपए है और ये स्विटज़रलैंड और फ्रांस की सीमा पर 27 किलोमीटर में फ़ैला हुआ है.
लेकिन 10 खरब में से एक टक्कर से ही एक हिग्स-बोसॉन मिल पाता है. सर्न को ये तय करने में भी कुछ समय लगा कि ये खोजा गया कण हिग्स-बोसॉन ही है और उसी तरह का कोई दूसरा कण नहीं है.



This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.