कैंट में लूट

2012-04-25T01:29:01Z

Bareilly शहर की सबसे बड़ी वारदात कैंट में हो रही है यहां दिन दहाड़े लोगों को लूट लिया जा रहा है न कोई मुकदमा न कोई एफआईआर इसलिए बोर्ड भी खामोश है सेना के अधिकारी भी कुछ नहीं कर सकते लोकल पुलिस की तो बात ही बेमानी है आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले 16 महीने में यहां बरेली के लोगों से करीब दस लाख रुपए लूट लिए गए हैं आईनेक्स्ट की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

कैंट बोर्ड में लूट की छूट
शहर में खुलेआम हो रही है लूट. ठगे जा रहे हैं बरेलियंस. इस बारे में ज्यादातर लोगों को कोई जानकारी नहीं है. वे चुपचाप खुद को लुटने दे रहे हैं. जिन इलाकों में इस लूट की छूट मिली है वे सभी बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा गवर्न किए जाते हैं. सिविल एरिया में ठगी की बात तो आम है, लेकिन जब बात सैन्य क्षेत्र की हो तो लोगों को ठगी जैसे शब्द पर आसानी से विश्वास नहीं होता है. आई-नेक्स्ट रिपोर्टर ने एक आम शहरी बनकर इस लूट के पूरे नेक्सस की हकीकत पता करने की कोशिश की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.
पार्क में मनमानी इंट्री फीस
कैंट एरिया में स्थापित है फूलबाग और चिल्ड्रन पार्क. काफी खूबसूरत बने इन पार्क में दो पल सुकून को बिताने के लिए हर महीने करीब ढ़ाई से तीन हजार लोग पहुंचते हैं. पार्क में इंट्री के लिए बोर्ड ने बकायदा एक मिनिमम रेट तय कर रखा है. जबकि हाल यह है कि यहां मनमानी इंट्री फीस वसूली जाती है. पार्कों में लोगों से मनमानी वसूली की जा रही है और लोग बढ़े दाम देने को मजबूर हैं. कई बार इस इसे लेकर पार्कों में कहासुनी तक हो जाती है, लेकिन ठेकेदारों की दबंगई के आगे एक आम शहरी अपनी ताकत खो देता है, क्योंकि या तो वह अपनी फ्रेंड के साथ यहां पहुंचता है या अपनी फैमिली के साथ.
हकीकत जरा नजदीक से
कैंट बोर्ड की जमीनी हकीकत जानने जब आईनेक्स्ट टीम मंडे को चिल्ड्रन पार्क पहुंची तो वहां के हालात बद से बदतर थे. मनमानी रेट वसूलने में ठेकेदार बिल्कुल भी पीछे नहीं थे. चिल्ड्रन पार्क में आई-नेक्स्ट रिपोर्टर ने इंट्री टिकट लिया. उससे 20 रुपए वसूले गए. इसमें 10 रुपए पार्किंग और 10 रुपए गेट एंट्री के लिए गए. पूछने पर पता चला कि ये रेट कैंटोनमेंट द्वारा निर्धारित हैं. इसे तो देना ही होगा. इसके बाद टीम पहुंची फूलबाग जहां चिल्ड्रन पार्क से मिलते जुलते हालात थे. टीम से यहां 25 रुपए वसूले गए. 15 रुपए इंट्री के और 10 रुपए टू व्हीलर पार्किंग के. पूछने पर पता चला कि फोर व्हीलर की पार्किंग फीस 20 रुपए है. ये पैसा बोर्ड के खाते में जमा होता है.

चुंगी पर भी मनमानी

इसके बाद टीम ने रुख किया कैंट स्थित चुंगी का. यहां पहले तो हालात सामान दिखे, लेकिन कुछ देर रुकने पर वहां के हालात की पोल भी खुलनी शुरू हो गई. कैंट बोर्ड ने यहां के लिए भी रेट निर्धारित कर रखे हैं. इसके अलावा कई वाहनों को चुंगी से छूट भी मिली हुई है. जमीनी हकीकत है कि नियमत: जिन वाहनों से वसूली की जानी चाहिए थी उससे तो चुंगी वसूली ही जाती है. उसके अलावा जुगाड़ और छोटे ऑटो चालकों से भी वसूली की जाती है. वसूली भी सिर्फ हाथों हाथ होती है, इसकी कोई रसीदे नहीं दी जाती है. हद की बानगी तो तब दिखी जब टीम की मौजूदगी में चुंगी पर तैनात लोगों ने किसानों को भी नहीं बक्शा और भूसे लदे ट्रैक्टर से भी उन्होंने पैसे वसूल लिए. जब जाकर जब वाहन चालकों से टीम ने बातचीत की तो उन्होंने बताया कि ये हालात सालों से चले आ रहे हैं, लेकिन कोई भी इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. आर्मी एरिया के नाम पर कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं करता और चुंगी वाले अपनी वसूली में लगे रहते हैं. हालांकि इन्होंने इस हकीकत को भी स्वीकार किया कि हाथों हाथ पैसा देने में उन्हें भी फायदा होता है. जहां सौ रुपए इंट्री की फीस है वहां पचास रुपए देकर भी काम चल जाता है.
डिस्पले क्यों नहीं?
यह सवाल अपने आप में काफी बड़ा है कि जब कैंट बोर्ड के पार्क को खुद बोर्ड गवर्न करता है तो क्यों नहीं वहां इंट्री फीस का डिस्पले लगाया गया है. सालों से यहां बड़े-बड़े होर्डिंग में पार्क के नियम कानून को डिस्पले किया गया है, जबकि पार्किंग फीस से लेकर इंट्री फीस का कोई डिस्पले नहीं लगा है. लोगों को इंट्री फीस की सही जानकारी नहीं मिल पाती है. यही नहीं न तो पार्किंग की टिकट पर और न इंट्री फीस टिकट पर कोई रेट प्रिंट है. अगर कोई रेट लिखने की बात कहता है तो उस पर मनमाना रेट लिख दिया जाता है. इन प्रश्नों का जवाब बोर्ड को बरेली की जनता को दिया जाना चाहिए.
16 महीने का हिसाब
हर साल पार्कों का ठेका होता है. इसमें इंट्री फीस और पार्किंग का ठेका शामिल होता है. कैंट बोर्ड के अनुसार इस साल अभी ठेका नहीं दिया गया है. इसका मतलब है 16 महीने से ठेका एक ठेकेदार के पास है. अगर इन 16 महीनों के हिसाब का मोटा-मोटा अंदाज लगाया जाए तो यह रकम करीब दस लाख तक पहुंचती है. एक महीने में इन पार्कों में करीब चार हजार लोग पहुंचते हैं. ऐसे में पिछले 16 महीने में यहां करीब 64 हजार लोग पहुंचे. इनसे 10 रुपए के हिसाब से छह लाख चालीस हजार रुपए वसूले गए. इसी तरह अगर टू व्हीलर और फोर व्हीलर की पार्किंग का हिसाब किया जाए तो इसका भी आंकड़ा चार से पांच लाख का बैठता है. हालात यह हैं कि इस तरह की वसूली पिछले कई सालों से की जा रही है और बोर्ड चुपचाप बैठा है. न तो पार्कों के बाहर इंट्री फीस और पार्किंग फीस डिस्पले बोर्ड लगवाया गया है और न रसीद पर रेट प्रिंट किया गया है.
बोर्ड द्वारा स्वीकृत पार्किंग की दरें
कैंटोनमेंट बोर्ड के वाइस प्रेसीडेंट शशिकांत जायसवाल के अनुसार-
पार्किंग
साइकिल            3 रुपए
मोटरसाइकिल    5 रुपए
कार            10 रुपए
पार्कों की एंट्री फीस
2 रुपए प्रति व्यक्ति
हर दिन मार्निंग में 7 से 8 बजे तक और शाम को 5 से 6 बजे तक एंट्री फ्री.
 
चुंगी पर इंट्री फीस
कार जो कॉमर्शियली यूज के लिए है 25 रुपए
लाइट कॉमशर््िायल व्हीकल 50 रुपए
हैवी कॉमर्शियल व्हीकल, ट्रेलर, क्रेन और अन्य बड़े व्हीकल    100 रुपए
हमें इस बार में कोई जानकारी नहीं है कि पार्कों में ठेकेदारों द्वारा जनता से अवैध वसूली की जा रही है. हम पूरा प्रयास करेंगे कि जनता ठगी का शिकार न हो. जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ नियमनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. मामला सही पाए जाने पर ठेकेदारों के ठेके भी निरस्त किए जा सकते हैं.
 -शशिकांत जायसवाल, वाइस प्रेसीडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड


Report by: Amber Chaturvedi

Posted By: Inextlive

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