मच्छरों की रोकथाम के लिए सावधानी जरूरी

2018-08-20T06:00:20Z

40 लाख का बजट विभाग ने मच्छर मारने के लिए मांगा

2 सालों में मिल चुके हैं कई मलेरिया के मरीज

20 अगस्त को हर वर्ष मनाया जाता है विश्व मच्छर दिवस

Meerut। एक मच्छर का डंक इंसान की जान पर भारी पड़ता है। मच्छर के डंक से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, वायरल, एड्स जैसी खतरनाक बीमारियों के होने का खतरा रहता हैं। जिसके तहत हर साल 20 अगस्त को विश्व मच्छर दिवस मनाया जाता हैं। वजह इस दिन डॉक्टर सर रोनाल्ड रास ने वर्ष 1896 में यह खोज की थी कि इंसान में मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के लिए मादा मच्छर रेस्पोंसिबल है। जिसके बाद से ही इस दिन को दुनियाभर में विश्व मच्छर दिवस के रूप में मनाया जाता है।

ये भी जानें

मलेरिया मादा मच्छर एनाफलीज के काटने से होता है।

3 हफ्ते तक मलेरिया के पैरासाइट एनाफलीज के साथ रहते हैं। इस दौरान मादा मच्छर 10 लोगों को काटती है।

4 प्रकार का मलेरिया भारत में पाया जाता है।

प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम

प्लास्मोडियम विवैक्स

प्लास्मोडियम ओवेल

प्लास्मोडियम मलेरिये

2 प्रकार का मलेरिया प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम यानी पीएफ व प्लास्मोडियम विवैक्स यानि पीवी उत्तरी भारत में होता है।

प्लास्मोडियम फैल्सीपैरम मलेरिया में जान जाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

महिलाओं और बच्चों में मलेरिया होने की संभावना ज्यादा होती है।

इसकी जांच स्लाइड ब्लड टेस्ट या किट द्वारा की जा सकती है।

50 से 150 रूपये प्राइवेट लैब में जांच के लगते हैं।

मेरठ में सभी सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल व एलएलआरएम कॉलेज में नि:शुल्क जांच व इलाज होता है।

90 प्रतिशत मलेरिया के मामलों में मच्छरों का वाहक गंदगी होती है।

हर साल जून को मलेरिया माह के रूप में मनाया जाता है।

जुलाई, अगस्त, सितंबर में मलेरिया फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

2016 जुलाई में 33, अगस्त में 51 व सितंबर में 66 केस मिले थे।

2017 में जुलाई में 18, अगस्त में 17 व सितंबर में 12 केस मिले थे।

2017 में डेंगू के भी 660 केस मिले थे।

2016 में चिकनगुनिया के 1100 से अधिक केस मिले थे।

बचाव के लिए मच्छरदानी और कीड़े भगाने वाली दवाओं का प्रयोग किया जाना चाहिए।

मच्छर भगाने के लिए डीएमओ की ओर से लगातार एंटीलार्वा स्प्रे और फॉगिंग करवाई जा रही है।

वर्ष 2018 में मच्छर भगाने के लिए 40 लाख रूपये के बजट का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जबकि इससे पहले तक यह 8 से 10 लाख रूपये ही मिलता था।

मेरठ जनपद में मलेरिया की स्थिति

वर्ष--जांचे--पीवी--पीएफ- कुल

2013- 45674- -99--06-105

2014- 41991- -83- -02-85

2015- 65478- -185 -09-194

2016- 68220- -204 -07-211

2017- 41536- -90 -03-93

2018- 5337- -03- -00-03

मार्च तक

मच्छरों की रोकथाम के लिए हमने पूरी तैयारी शुरू कर दी है। रोजाना शहर के अलग-अलग इलाकों में फॉगिंग और एंटी लार्वा स्प्रे कराया जा रहा है। इसके अलावा अवेयरनेस प्रोग्राम की तैयारी भी चल रही है।

डॉ। योगेश सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी, मेरठ

Posted By: Inextlive

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