सीबीएसई में स्कूल चेंज करना होगा महंगा

2019-07-16T06:01:06Z

बोर्ड ने फेल होने के नियमों के लिए जारी की नई पॉलिसी

बोर्ड ईयर में एडमिशन देने पर स्कूल को भी देनी होगी पूरी डिटेल

Meerut। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई में इस बार बोर्ड ईयर में स्कूल चेंज करना स्टूडेंट्स को काफी महंगा पड़ रहा है। बोर्ड की ओर से इस बार स्कूल चेंज करने पर पांच हजार रुपए एक्सट्रा फीस ली जा रही है। अगर स्टूडेंट बोर्ड क्लास में फेल हो जाता है तो इस स्थिति में भी उसे दोबारा इतनी ही फीस भरनी होगी। सीबीएसई ने बोर्ड क्लासेज में एडमिशन के नियमों को सख्त बनाते हुए ये बदलाव किया है।

ये हैं निर्देश

9वीं व 11वीं के बाद स्कूल चेंज करने के लिए पेरेंट्स को पहले कारण बताना होगा।

1 हजार रुपये फीस बहुत जरूरी जैसे ट्रांसफर केस में बोर्ड लेगा।

5 हजार फीस दूसरे सभी ग्राउंड के लिए जरूरी

पहले स्टूडेंट को कोई बोर्ड फीस के नाम पर कोई फीस नहीं जमा करानी होती थी।

नियम बदलने के कारण

स्कूल बदलने की वजह से बच्चे की पढ़ाई के साथ ही माहौल में भी चेंज होता है। जिसका सीधा असर रिजल्ट पर पड़ता है।

रिजल्ट की क्वालिटी खराब होती है।

स्कूल चेंज करने के लिए बोर्ड ने स्कूल चेंज करने के लिए कुछ वैलिड कारणों की सूची भी जारी की है।

बोर्ड ने कारण बताने के साथ ही उसके प्रमाण के लिए डॉक्यूमेंट देने की शर्त भी रखी है। जिससे यह पता चल सके कि किस वजह से स्कूल बदला है।

स्कूल चेंज करने के ग्रांउड

पेरेंट्स का ट्रांसफर

स्थान बदल देना

हॉस्टल में भर्ती होने पर

हॉस्टल से दूसरी जगह जाने पर

किसी भी वजह से फेल होने पर

स्कूल और आवास के बीच दूरी होने पर

मेडिकल रिजन

ये डॉक्यूमेंट्स हैं जरूरी

ट्रांसफर होने पर पेरेंट्स का रिक्वेस्ट लेटर, एनरोलमेंट नंबर, रिपोर्ट कार्ड, प्रोविजिनल ट्रांसफर सर्टिफिकेट, पेरेंट्स का ट्रांसफर लेटर जरूरी होगा

जगह बदलने पर रेंट एग्रीमेंट के अलावा आवास प्रमाणपत्र भी जरुरी होगा।

हॉस्टल में शिफ्ट होने या हॉस्टल से दूसरी जगह जाने पर हॉस्टल के डॉक्यूमेंट, फीस, फीस का बैंक ट्रांजेक्शन व हास्टल का लेटर

फेल होने पर पुराना रोल नंबर, मार्कशीट आदि देनी होगी।

क्वालिटी एजुकेशन के लिए स्कूल चेंज करने के लिए स्टूडेंट को अपना पुराना रिपोर्ट कार्ड देना होगा।

बोर्ड ईयर में एडमिशन लेने पर स्कूल को भी पूरी डिटेल देनी होगी।

क्लास 1 से लगाए 12 तक के सभी स्टूडेंट्स की संख्या, सेक्शन और टीचर्स की डिटेल भी स्कूल को देनी होगी।

बोर्ड क्लासेज में स्टूडेंट्स स्कूल चेंज कर लेते हैं जिसकी वजह से उनकी पढ़ाई का स्तर भी गिर जाता है। इस कदम से रिजल्ट में भी सुधार होगा।

वाग्मिता त्यागी, वाइस प्रिंसिपल, गार्गी ग‌र्ल्स स्कूल


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