Chardham Yatra केदारनाथ में चहेती हेली कंपनी को ठेका देने के लिए सैटिंग का नया टेंडर

2019-05-21T09:56:43Z

Chardham Yatra के तहत केदारनाथ में हेली सेवा के टेंडर में लगातार धांधली उजागर हो रही हैं

उत्तराखंड सिविल एविएशन डवेलपमेंट अथॉरिटी का नया कारनामा

डीजीसीए के नियमों और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर जारी किया नया टेंडर

एक ही कंपनी को दूसरा हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति देने के लिए खेल की चर्चा

dehradun@inext.co.in
DEHRADUN: केदारनाथ में हेली सेवा के टेंडर में लगातार धांधली उजागर हो रही हैं. ताजा मामला मंडे को जारी किए गए एक टेंपरेरी टेंडर का है. यूकाडा ने चार दिन के लिए सेरसी से हेली सेवा संचालित करने का टेंपरेरी टेंडर जारी किया है. जबकि इस टेंडर की 21 मई लास्ट डेट हैं और 22 मई से 25 मई तक हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति हैं. टेंडर निकल भी गया तो नई कंपनी इसलिए आवेदन नहीं कर पाएगी क्योंकि उसे टेंडरिंग के बाद डीजीसीए की क्लियरेंस में ही दो दिन लग जाएंगे. क्लियरेंस मिल भी गया तो सिर्फ दो एक दिन फ्लाइंग हो पायगी, फिर चार दिन का टेंडर समझ से परे है.

चार दिन के लिए यह कैसा टेंडर
मंडे को यूकाडा ने सेरसी से केदारनाथ के लिए सिर्फ चार दिन 22 से 25 मई तक के लिए एक्स्ट्रा हेली सेवा शुरू करने का टेंडर जारी किया है. इस टेंडर की लास्ट डेट 21 मई रखी है. नई कंपनी आवेदन करेंगी तो उन्हें टेंडर मिलने के बाद भी डीजीसीए क्लियरेंस में ही दो दिन लग सकते हैं, ऐसे में दो दिन तो इसी में निकल जाएंगे. तब चार दिन के टेंडर का क्या मतलब.

निर्धारित से अधिक रेट भी नहीं हो सकता
इस टेंडर में यूकाडा ने यह भी शर्त रखी है कि फ्लाइंग करने के लिए इंटरेस्टेड कंपनी का रेट भी वहां पहले डिक्लेयर हो चुके 2470 रूपए के रेट से अधिक नहीं होना चाहिए. केदारनाथ के लिए इस सीजन में पहली बार 9 मई को हुए हेली सेवाओं के टेंडर में सेरसी से तीन कंपनियों हिमालयन,हेरीटेज और ग्लोबल विक्ट्रा ने एप्लाई किया था. रेट 2470 का निकला था. इनमें से दो कंपनियों ने टेंडर निकलने के बाद भी फ्लाइंग शुरू नहीं की. चर्चा है कि वे इतने कम रेट पर फ्लाईग करने में असमर्थ थी.वर्तमान में सेरसी से सिर्फ एक कंपनी हिमालयन ही हेली सेवा का संचालन कर रही है.चर्चा है कि इसी कंपनी को दूसरा हेलीकॉप्टर उड़ाने के लिए चार दिन का लिए ठेका देने का यह सांठगांठ का टेंडर जारी किया गया है. क्योंकि इस कंपनी के पास डीजीसीए की क्लियरेंस भी है और दूसरा हेलीकॉप्टर भी मौके पर ही मंगवा रखा है.

चहेती कंपनी के लिए टेंडरिंग को ऐसे समझिए
सेरसी में 6 हेलीपैड हैं. उनमें से एक हिमालयन के पास, दूसरा ग्लोबल विक्ट्रा,तीसरा सिमसैन,चौथा सोना एविएशन,पांचवा हेरिटेज एविएशन और छठां राजीव धर के पास है. छह में से दो कंपनियां पहले ही बैक हो चुकी, दो इंटरेस्टेड नहीं हैं, अगर टेंडर में आई भी तो डीजीसीए क्लियरेंस में समय लगेगा और रहा पांचवा हेलीपेड वह सिफ किराए पर दिया जा सकता है. ऐसे में हेलीकॉप्टर कहां से लाएंगे. अब बची एक कंपनी जो इस टेंडर के मुताबिक सेरसी से उसी रेट पर फ्लाइंग कर सकती है. ऐसे में अगर एक ही कंपनी को टेंडर देने के लिए यह मशक्कत चल रही है तो सीधे ही दे देते, टेंडरिंग प्रक्रिया कर समय और सरकारी धन की बर्बादी क्यों?

एक हेलीपैड, दो हेलीकॉप्टर कैसे?
सेरसी के छह हेलीपैड और एक कंपनी फिजिबल होने के बावजूद अगर टेंडर उसी कंपनी को दे दिया जाएगा तो डीजीसीए के नियमों का उल्लंघन होगा. डीजीसीए के रूल्स के मुताबिक एक हेलीपैड से सिर्फ एक हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकता है. मौजूदा कंपनी के पास दूसरा हेलीपैड है नहीं, ऐसे में उसे टेंडर दे भी दिया तो वह दूसरा हेलीकॉप्टर भी उसी हेलीपैड से उड़ाकर नियमों की अवहेलना के साथ यात्रियों की जान के साथ बड़ा खिलवाड़ करेगी.

केदारघाटी में अवैध उड़ान पर हेली कंपनी को नोटिस
केदारनाथ के लिए हेलीसेवाओं का संचालन कर रही एक कंपनी को यूकाडा ने नियमों की अवहेलना का नोटिस भी जारी किया है. यह कंपनी एक हेलीकॉप्टर की अनुमति की आड में दो हेलीकॉप्टर का संचालन अवैध रूप से कर रही है. मंडे को उसे नोटिस जारी कर फिलहाल उस कंपनी के दूसरे हेलीकॉप्टर की उड़ान रोक दी गई,लेकिन यात्रियों की जान से खिलवाड़ के इस खेल में हेली कंपनियों पर लगाम लगाने में यूकाडा फेल साबित हो रहा है. डीजीसीए ने केदारघाटी की चौड़ाई को देखते हुए यहां एक समय में सिर्फ 6 हेलीकॉप्टर उड़ाने की ही अनुमति दे रखी है. छह कंपनियां पहले से घाटी में उड़ान भर रही हैं.

टेंडर की एक शर्त का तो पहले से उल्लंघन
नए टेंडर में यूकाडा ने शर्त रखी है कि उत्तराखंड हिल्स या मंदाकिनी वैली में फ्लाइंग ऑपरेशन चलाने के अनुभव वाली कंपनी को ही टेंडर दिया जाएगा, लेकिन इस शर्त का तो पहले से ही उल्लंघर हो रहा है. फांटा से दो दिन पहले उड़ान भरने वाली कंपनी उत्तराखंड हिल्स में पहली बार ऑपरेशन संचालित कर ही है. ऐसे में उसे अनुमति देकर तो यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर दिया गया.
टेंडर की प्रति दैनिक जारगण आई नेक्स्ट के पास है.

इस मुद्दे पर सिविल एविएशन के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वे कुछ भी नहीं बोल पाए.

टेंडर की शर्तो और नियमों का आंकलन कर आप खुद इस खेल का गणित समझ सकते हैं.

 

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Posted By: Ravi Pal

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