मुक्तिपथ की चिट्ठी में फंसे विधायक

2015-01-20T07:01:08Z

- सोशल साइट्स पर अपमानित करने का लगा है आरोप

- बड़हलगंज पुलिस को कोर्ट ने दिया मुकदमे का आदेश

GORAKHPUR: चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ सोशल साइट्स पर गलत तथ्यों के आधार पर अपमानित करने वाली सूचनाएं देने का आरोप लगा है। उन्होंने कुछ दिन पहले बड़हलगंज के शमशान घाट मुक्तिपथ की चिट्ठी नामक एक लेख सोशल साइट्स पर पोस्ट की थी। आज यह पोस्ट मुकदमे तक पहुंच गई है। आखिर क्या है इस पोस्ट में बताते हैं आपको।

यह है मामला

बड़हलगंज में एक बड़ा शमशान घाट है। कुछ साल पहले इस शमशान घाट को रिनोवेट कराकर मुक्तिपथ नाम दिया गया। जब मुक्तिपथ बना तो एक समिति भी बनी। इस समिति के संस्थापक और विधिक सलाहकार प्रेम शंकर मिश्र और अध्यक्ष एमएलए राजेश त्रिपाठी को बनाया गया। नवंबर ख्0क्ब् में राजेश त्रिपाठी ने अपने सोशल साइट्स पर एक लेख पोस्ट की। लेख का टाइटल था मुक्तिपथ की चिट्ठी। इस लेख में उन्होंने शमशान से मुक्तिपथ के सफर तक को फ‌र्स्ट पर्सन में लिखा था। यानी उनकी लेखनी कुछ इस तरह थी। मैं मुक्तिपथ हूं। मैं पहले शमशान हुआ करता था

फिर शुरू हुआ कोर्ट केस

इस लेख को लेकर प्रेमशंकर नाराज हुए। उन्होंने राजेश त्रिपाठी के खिलाफ बड़हलगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाने का प्रयास किया, लेकिन वहां से इंकार मिलने के बाद वे एसएसपी के दरवाजे पहुंचे। उनका आरोप था कि राजेश त्रिपाठी के इस लेख से उन्हें आहत किया है और यह लेख सरासर झूठ और गलत तथ्यों पर आधारित है। एसएसपी से भी निराशा हाथ लगने पर प्रेम शंकर ने राजेश त्रिपाठी के खिलाफ कोर्ट में अपील की, जिसका निर्णय क्फ् जनवरी ख्0क्भ् को आया। निर्णय में 7 दिन के अंदर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा गया है।

एप्लीकेशन के आधार पर दिया आदेश

अदालत ने एप्लीकेशन के आधार पर एसओ बड़हलगंज को आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि एक हफ्ते के भीतर मुकदमा दर्ज करके विवेचना करें। विवेचना के बाद अपनी आख्या कोर्ट में भेजें। पुलिस का कहना है कि इसके तहत आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा। सोशल साइट्स से मुक्तिपथ की चिट्टी को हटाने के तहत केस बन सकता है। कोर्ट में दिए गए प्रार्थना पत्र में राजेश त्रिपाठी को सिर्फ मुक्तिपथ का अध्यक्ष संबोधित किया गया है। वर्ष ख्0क्ब् में दीपावली के पहले सोशल साइट्स पर मुक्तिपथ की चिट्ठी पोस्ट की गई थी।

बच्चा चोरी के आरोप में खूब रही चर्चा

चिल्लूपार के विधायक, पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी के खिलाफ गुलरिहा थाना में बच्चा चोरी का मामला भी दर्ज हुआ। बीआरडी मेडिकल कालेज से बच्चा चुराकर अपने घर में रखने का आरोप लगाया गया था। क्म् जनवरी ख्00ब् को मेडिकल कालेज से बच्चा चोरी हो गया। देवरिया जिले के सोहनपुर निवासी प्रमिला मेडिकल कालेज में एडमिट थीं। उनको आपरेशन से बेटा पैदा हुआ। इस मामले में राजेश त्रिपाठी के खिलाफ गुलरिहा थाना में किडनैपिंग का मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। अक्टूबर ख्00ब् में डीएनए जांच की बात उठी। राजेश त्रिपाठी की पत्‍‌नी की तरफ से हाईकोर्ट में प्रोटेस्ट किया गया। कोर्ट ने डीएनए जांच के लिए बाध्य न किया जाने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद मामला शांत हो गया। राजेश त्रिपाठी ने कई बार डीएनए जांच कराने की बात कही।

प्रेमशंकर के बेटे के खिलाफ भी मुकदमा

विधायक राजेश त्रिपाठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश से चिल्लूपार में गहमा-गहमी बढ़ गई है। यह भी सामने आया है कि युवा चिल्लूपार नाम से फेसबुक आईडी बनाई गई। इस प्रोफाइल में राजेश त्रिपाठी के खिलाफ अगस्त माह में अशोभनीय टिप्पणी की गई। अज्ञात लोगों की तरफ से की गई टिप्पणी की शिकायत विधायक ने पुलिस अफसरों से की। एमएलए से जुड़ा मामला होने की वजह से पुलिस फौरन हरकत में आई। इस मामले में प्रेम शंकर के बेटे पर आरोप लगा। क्राइम ब्रांच की टीम ने पूछताछ भी की। प्रेम शंकर ने बेटे पर झूठा आरोप लगाने, क्राइम ब्रांच में ले जाकर पिटाई करने की शिकायत आईजी से की। तत्कालीन एसएसपी आरके भारद्वाज को भी कटघरे में खड़ा किया। बेटे के खिलाफ झूठी कार्रवाई के खिलाफ आमरण अनशन शुरू कर दिया। बाद में अफसरों के हस्तक्षेप से मामला सुलझ गया। राजेश त्रिपाठी से जुड़े लोगों का कहना है कि राजनैतिक विरोधी होने की वजह से प्रेम शंकर कुछ न कुछ करते रहते हैं।

कोर्ट के आदेश, आदेश के अनुपालन के संबंध में अभी कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में एसओ से बात करने के बाद जानकारी दे सकेंगे।

ब्रजेश सिंह, एसपी ग्रामीण

न्यायालय काआदेश सर्वोपरि है। इस मामले में मुकदमा दर्ज करके पुलिस विवेचना करे। किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। न्यायालय का निर्णय सर्वमान्य है। भरोसा है कि इस मामले में न्याय मिलेगा।

राजेश त्रिपाठी, विधायक, अध्यक्ष मुक्तिपथ सेवा संस्थान

जीवनी लिखना अपराध नहीं, लेकिन इसके माध्यम से दूसरों को अपमानित करना, लोगों को नीचा दिखाना गलत है। पुलिस की कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

प्रेमशंकर मिश्र, पूर्व विधिक सलाहकार एवं संस्थापक सदस्य, मुक्तिपथ सेवा संस्थान


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