चिकनगुनिया का कहर तोड़ न दे कमर

2019-06-29T06:00:57Z

- बारिश में इंफेक्शन से बढ़ जाते हैं इसके पेशेंट्स

- मच्छरों से फैलने वाली बीमारी हो जाती खतरनाक

GORAKHPUR: बारिश के मौसम में मच्छरों की बढ़ती तादाद से चिकनगुनिया के पेशेंट्स तीन से चार गुना बढ़ जाते हैं। लक्षण नजर आने पर लोग कई तरह के फीवर में कन्फयूज होकर रह जाते हैं। ऐसे में समय रहते बीमारी का उपचार न होने से कभी-कभी यह जानलेवा हो जाती है। इसका असर हर उम्र के लोगों पर होता है। वायरल इन्फेक्शन के कारण होने वाली यह बीमारी चिकनगुनिया वायरस ले जाने वाले मच्छरों के काटने के कारण होती है। डॉक्टर्स का कहना है कि ऐडीस इजिप्ती और एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर ही इस बीमारी को लेकर आते हैं। ऐसे में इस बीमारी से निपटने के लिए पहले से तैयारी करनी होगी। थोड़ी सी सावधानी बरतकर इससे निजात पाई जा सकती है।

दिन और दोपहर में काटती मादा मच्छर

डॉक्टर्स का कहना है कि मच्छर से पैदा होने वाले चिकनगुनिया का प्रकोप एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में ज्यादा पाया जाता है। मादा मच्छरों के काटने पर इसका वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संचारित होता है। मच्छर के काटने के आमतौर पर चार से छह दिनों के भीतर यह बीमारी नजर आने लगती है। चिकनगुनिया के मच्छर घर से ज्यादा बाहर काटते हैं।

बीमारी के प्रमुख लक्षण

- अचानक तेज बुखार

चिकनगुनिया के शुरुआती लक्षणों में से सबसे प्रमुख तेज बुखार का होना है। यह बुखार 102 डिग्री सेल्सियस से लेकर 104 डिग्री सेल्ससियस तक पहुंच जाता है। इसका बुखार हफ्तेभर या दस दिनों तक भी बना रह सकता है।

- जोड़ों में तेज दर्द

बदन के विभिन्न जोड़ों में तेज दर्द होना इसके लक्षणों में शामिल है। इसका असर होने पर जोड़ों में तेज दर्द होता है जिसकी वजह से हाथ-पैर के मूवमेंट में भी तकलीफ होती है। ये दर्द काफी दिनों तक बना रहता है। कुछ लोगों को जोड़ों में दर्द के साथ ही सूजन की शिकायत भी हो जाती है।

- रैशेज या चकत्ते पड़ जाना

इस बीमारी के लक्षणों में यह भी है कि त्वचा में चकत्ते पड़ जाते हैं। लेकिन यह कोई जरूरी नहीं है कि हर किसी के शरीर पर चकत्ते या रैशेज पड़ें। लेकिन कुछ लोगों में ऐसे लक्षण भी नजर आते हैं। ये चकत्ते चेहरे पर, हथेली पर और जांघों पर हो सकते हैं।

बीमारी के अन्य प्रमुख लक्षण

सिर में तेज दर्द होना

मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द

चक्कर आना और उल्टी जैसा महसूस होना

डॉक्टर की सलाह लेकर कराएं लैब टेस्ट

डॉक्टर्स का कहना है कि अगर इस तरह के लक्षण नजर आते हैं तो बीमारी घातक हो सकती है। ऐसे में तत्काल किसी डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड का टेस्ट कराएं। रिपोर्ट आने पर उसे डॉक्टर को दिखाकर जरूरी दवाएं लेते हुए बेड रेस्ट करें। बरसात के मौसम में बीमारियों की तादाद अधिक होती है। ऐसे में हर साल करीब 30 से 40 फीसदी पेशेंट्स चिकनगुनिया के भी आते हैं। डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज में पेशेंट्स की लाइन लगी होने की वजह से समय से उपचार मिलने में प्रॉब्लम आ सकती है। इसलिए समय रहते इस बीमारी से निपटने के कारगर उपाय करने होंगे।

इसके बचाव के हैं ये तरीके

चिकनगुनिया वायरस की बीमारी है और ये इंफेक्टेड एडिस मच्छरों के काटने से होती है। इसलिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि मच्छरों के काटने से बचकर रहें। अपने आसपास सफाई रखें ताकि मच्छर पनप ना पाएं। पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनें।

ये बरतें सावधानी

- चिकनगुनिया की कोई स्पेसिफिक मेडिसीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में डॉक्टर की दी हुई दवा ही लें। खुद से इलाज करने से बचें और कोई भी दवा न खाएं।

- घर पर रहें और जितना ज्यादा हो सके आराम करें। इस दौरान आराम करना सबसे ज्यादा जरूरी है।

- चिकनगुनिया में अक्सर लोगों को डी-हाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लिक्विड डाइट लेना भी फायदेमंद रहेगा।

- अगर आप किसी दूसरी बीमारी के लिए भी दवा ले रहे हैं तो अपने डॉक्टर को उसके बारे में जरूर बताएं। एक साथ दो तरह की दवाइयां लेना खतरनाक भी हो सकता है।

- उन चीजों को ज्यादा से ज्यादा लें जिनसे विटामिन सी मिले। विटामिन सी इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है।

- बीमारी के लक्षण नजर आने पर बहुत अधिक ऑयली और स्पाइसी खाने से परहेज करें।

- नारियल पानी और सब्जियों का सूप जरूर लें। इस दौरान शरीर बहुत कमजोर हो जाता है, ऐसे में ये लिक्विड डाइट एनर्जी देने का काम करती है।

- आइस पैक को तौलिए में लपेटकर जोड़ों पर रखें और हल्के हाथों से दबाएं। इससे दर्द में फायदा होगा।

कोट

चिकनगुनिया वायरल डिजीज है। मच्छरों के काटने से फैलता है। रेनी सीजन में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। विभिन्न तरह के मच्छर होते हैं। कौन सा मच्छर किस रूप में है यह जान पाना मुश्किल होता है। दिन के समय और रात में बदन को पूरी तरह से ढककर रखें। मच्छरदानी लगाकर सोएं। बीमारी के लक्षण नजर आने पर तत्काल डॉक्टर की राय लें। बरसात में इसके पेशेंट्स भी 30 से 40 फीसदी बढ़ जाते हैं।

डॉ। बीके सुमन, सीनियर फीजिशियन, डिस्ट्रिक्ट हास्पिटल

मानसून सीजन में बीमारियों की तादाद बढ़ जाती है। मच्छरों के काटने से होने वाली कई बीमारियों का असर होता है। ऐसे में एक अभियान चलाकर इससे बचाव का उपाय बताया जाता है। मच्छरों के काटने से बचाव के लिए मच्छरदानी के प्रयोग पर जोर दिया जाता है। सभी अस्पतालों में बीमारियों से निपटने के लिए इंतजाम किए गए हैं। उपचार की तैयारी पूरी कर ली गई है।

- एसके तिवारी, सीएमओ, गोरखपुर


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