खेल खेल में मेंटली स्ट्रॉन्ग बनेंगे बच्चे

2019-07-10T06:00:27Z

चेस और क्रासवर्ड पजल जैसी एक्टिविटीज पर दिया जाएगा बल

रटने की प्रवृति कम होने के साथ ही बढे़गा आई क्यू लेवल

Meerut। स्कूलों में अब स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान के साथ-साथ दिमागी कसरत वाली एक्टिविटीज भी करवानी अनिवार्य होगी। इसके तहत अलग से गेम्स का आयोजन भी होगा। नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में ये अहम पहल की जा रही है।

बढ़ेगी तार्किक क्षमता

स्कूलों में इस तरह की पहल करने का उद्देश्य स्टूडेंट्स में तार्किक क्षमता का विकास करना है। स्टूडेंट्स में बढ़ रही रटने की प्रवृति भी इस योजना के जरिए कम होगी, वहीं उनका आई क्यू लेवल भी बढ़ेगा। इस योजना के तहत स्कूलों मे जहां चेस खेलने को अनिवार्य किया जाएगा। वहीं बच्चों को क्रॉसवर्ड पजल, रिडिल जैसी एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट करने के लिए भी मोटिवेट किया जाएगा।

दिमाग का होगा विकास

शिक्षा अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की एक्टिविटीज से बच्चों के दिमाग का विकास होगा। वहीं उनकी सोच-समझ और डिसीजन लेने की क्षमता भी बढ़ेगी। कम उम्र में ही बच्चों को सही-गलत का भी पता चल पाएगा। ये व्यवस्था सभी क्लासेज और स्टूडेंट्स के लिए की जाएगी।

शासन की ओर से इस तरह की पहल की जा रही है। स्कूलों में इस तरह की गतिविधियां करवाई भी जाती है। इस योजना से बच्चों का मेंटली डेवलपमेंट भी हो सकेगा।

एसके गिरि, एबीएसए, मेरठ


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