चीनी मिल घोटाला मनी लांड्रिंग का केस दर्ज जांच के दायरे में तमाम राजनेता और ब्यूरोक्रेट्स

2019-07-12T09:29:38Z

ईडी चीनी मिलों की बिक्री की माया पता लगाएगी। घोटालेबाजों के ठिकानों पर जल्द होगी छापेमारी की कार्रवाई

lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: बीते दस साल में यूपी में हुए तमाम घोटालों की जांच को लेकर  सीबीआई और इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी)क्र की सक्रियता बढ़ती जा रही है। हालिया मामला बसपा सरकार में 21 सरकारी चीनी मिलों की बिक्री से जुड़़ा है जिसमें सीबीआई के बाद ईडी ने भी केस दर्ज कर लिया है। ईडी ने सीबीआई द्वारा  इस मामले में दर्ज की गयी एफआईआर के आधार पर आरोपितों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया है और जल्द ही आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी कर घोटाले से जुड़े अहम सुबूत जुटाने की तैयारी में है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने केस दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।

1100 करोड़ का घोटाला
बसपा सरकार में 21 सरकारी चीनी मिलों को औने-पौने दामों में बेचने में हुए करीब 1100 करोड़ रुपये के घोटाले का केस राजधानी स्थित सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने विगत 26 अप्रैल को दर्ज किया था। वहीं दो दिन पहले सीबीआई ने घोटाले के सुराग तलाशने को तत्कालीन प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री नेतराम के गोमतीनगर और चीनी निगम के तत्कालीन एमडी विनय प्रिय दुबे के अलीगंज स्थित आवास को खंगाला था। इसके अलावा सहारनपुर में खनन कारोबारी इकबाल के दोनों पुत्रों और उनके करीबियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गयी थी। सीबीआई ने इस मामले में कुल 14 ठिकानों पर छापे मारकर कई अहम सुबूत जुटाए हैं। इस बीच ईडी ने सीबीआई से एफआईआर हासिल करके मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कर लिया।
नेतराम की भूमिका की भी जांच
ईडी के अधिकारियों की मानें तो इस घोटाले में तमाम राजनेता, ब्यूरोक्रेट्स और कंपनियों की भूमिका की जांच होनी है। इसके अलावा पूर्व आईएएस नेतराम और विनय प्रिय दुबे की घोटाले में भूमिका का पता भी लगाया जाएगा। ध्यान रहे कि दोनों सीबीआई की एफआईआर में फिलहाल आरोपित नहीं है। बताते चलें कि सीबीआई ने सात चीनी मिलों की बिक्री को लेकर दर्ज एफआईआर में दो बोगस कंपनियों के कर्ता-धर्ता दिल्ली निवासी राकेश शर्मा, गाजियाबाद निवासी धर्मेंद्र गुप्ता, सहारनपुर निवासी सौरभ मुकुंद, सहारनपुर निवासी मोहम्मद जावेद,
दिल्ली निवासी सुमन शर्मा, सहारनपुर निवासी मोहम्मद नसीम अहमद एवं मोहम्मद वाजिद अली को नामजद किया था। बाकी 14 चीनी मिलों को लेकर छह अलग-अलग पीई दर्ज की थी।
इन कंपनियों ने खरीदी थी चीनी मिलें
 वेव इंडस्ट्रीज लिमिटेड
- इंडियन पोटाश लिमिटेड
- गिरासो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड
- एसआर बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड
- नीलगिरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड
- त्रिकाल फूड एंड एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड
- नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड

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फैक्ट मीटर
 2007 में उप्र राज्य चीनी निगम की मिलों के निजीकरण व विक्रय का फैसला
- 21 मिलों को 2010 और 2011 में निजी कंपनियों को सस्ते में बेच दिया गया
- 09 नवंबर 2017 को लखनऊ के गोमतीनगर थाने में घोटाले की एफआईआर दर्ज
- 26 अप्रैल 2019 को सीबीआई ने यूपी सरकार की सिफारिश पर केस दर्ज किया
- 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा का चीनी मिल बिक्री घोटाला होने का है अनुमान



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