सांसों पर वार कर रहीं कीलें और तार

2019-02-21T06:00:03Z

पेड़ों पर प्रचार सामग्री लगाने के लिए ठोकी जा रही कीलें और लगाए जा रहे कंटीले तार

तना कटने से पेड़ों की बिगड़ रही सेहत

vinod.sharma@inext.co.in

VARANASI

पेड़ों में भी जीवन है, वो बोल नहीं सकते लेकिन उन्हें भी दर्द होता है। मतलबी इंसान को इससे फर्क नहीं पड़ता है। अपने फायदे के लिए उनमें कीलें ठोक देता है, कटीले तारों से उनके बदन को बांधकर जख्मी कर देता है। शहर में पेड़ प्रचार का माध्यम बन गए हैं। लोग कीलें ठोककर और तारों से बांधकर पोस्टर-बैनर लटका देते हैं। इससे पेड़ों को नुकसान पहुंचता है और उनकी मौत भी हो जाती है।

दया नहीं आती

कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रहे शहर को हरा-भरा करने के लिए सरकारी विभागों से लेकर समाजिक संगठन जमकर मशक्कत कर रहे हैं। नए पौधे लगाए जा रहे हैं, पुराने पेड़ों का संरक्षण हो रहा है। तमाम माध्यमों से इनको बचाने का अपील भी की जा रही है लेकिन स्वार्थ में अंधे कुछ लोगों पर यह बेअसर है। कारोबार के प्रचार के लिए पेड़ आसान प्रचार माध्यम बन चुके हैं। हालत यह है कि शहर में सड़कों, चौराहों और रिहायशी इलाकों में लगे पेड़ों को विज्ञापन से पाट दिया गया है। इन्हें लगाने के लिए लोहे की कीलें पेड़ों में ठोंकी जाती हैं। उनपर कंटीले तार लगाकर भी होर्डिग-बैनर लटका दिया जाता है।

जा रही बेजुबान की जान

-कीलें ठोकने और तार बांधने से पेड़ों को जबरदस्त नुकसान पहुंचता है

-पेड़ पर जिस जगह कील लगायी जाती है वहां जायलम को नुकसान पहुंचता है

-गहरी कील ठोकने पर फ्लोयम पर भी असर होता है

-छोटे पेड़ों की नेचुरल ग्रोथ रुक प्रभावित होती है और वो सूख जाते हैं

-कीलों के कारण पेड़ों में फंगस का खतरा रहता है

-तार उन्हें जगह-जगह से चोटिल करते हैं

-तार और कीलों की वजह से सही पोषण नहीं मिल पाता और पेड़ वक्त से पहले मर जाते हैं

पटा हुआ पूरा शहर

-शहर में प्रचार सामग्री लगाने के नियम बनाए गए हैं

-नगर निगम की अनुमति के बिना शहर में कहीं भी किसी तरह की प्रचार सामग्री नहीं लगायी जा सकती है

-इसके लिए बकायदा फीस देनी होती है निगम को

-पेड़-पौधों का इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं हो सकता

-बिना परमीशन के प्रचार करने वालों के खिलाफ जुर्माना की कार्रवाई हो सकती है

-पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है

एक्सप‌र्ट्स की बात

कील ठोकने से पेड़ों की सेहत पर असर पड़ता है। अगर कम उम्र के पेड़ों पर कील लगे तो संभव है कि पेड़ सूख जाएंगे। कील से सीधा नुकसान जायलम और फ्लोएम का नष्ट होना है। जायलम ऊपरी हिस्सा छाल होता है और फ्लोएम अंदर का हिस्सा। जायलम और फ्लोएम पेड़ के हर हिस्से में पोषक तत्व पहुंचाते हैं, तभी पेड़ जिंदा रहता है। कहीं कील चुभता है तो निश्चित रूप से यह क्रिया प्रभावित होती है।

प्रो। कविता शाह, हेड-आईईएसडी (इंस्टीट्यूट आफ इंवायरमेंट संस्टेबल डेवलपमेंट), बीएचयू

कील और तार पेड़ को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इसका तत्काल प्रभाव नहीं दिखता है, लेकिन एक समय के बाद काफी घातक साबित होता है। कीलों से वृक्ष का तना कट जाता है, जिससे पानी और खाद की सप्लाई बाधित हो जाती है। कीलों के जंग से पेड़ों का तना कमजोर और सूखने लगता है। कील से होने वाले सुराख के रास्ते विषाणु पेड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। जो धीरे-धीरे निर्जीव बना देते हैं।

-प्रो। सुरेश दुबे, वनस्पति विज्ञान, बीएचयू

पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। इस पर कील या तार बांधना गैरकानूनी है। सड़कों के किनारे लगे वृक्षों की सुरक्षा के लिए बहुत जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। संबंधित संस्था और व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी होगी। पेड़ों पर जमी धूल तो बारिश के पानी से साफ हो जाता है। विभाग द्वारा पानी का छिड़काव संभव नहीं है।

एनपी शाक्य, डीएफओ

सजा का प्रावधान

पेड़ों में कील ठोकना ट्री प्रोटेक्शन एक्ट के विरुद्ध है। ट्री-प्रोटेक्शन एक्ट में कील ठोकने या नुकीले तार से पेड़ों को नुकसान पहुंचाने पर जुर्माना का प्रावधान है। का उल्लंघन करने पर 15 दिन के कारावास का प्रावधान है।


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