अब क्लाउड सीडिंग से बुझेगी जंगलों की आग

2019-06-04T10:57:53Z

होमवर्क शुरू हुआ और अब खर्च का आंकलन किया जा रहा। अगले फायर सीजन से कृत्रिम बारिश की संभावना भी

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DEHRADUN: उत्तराखंड में हर साल जंगलों में लगने वाली आग को बुझाने के लिए अब फॉरेस्ट महकमा क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) टेक्नोलॉजी का प्रयोग करेगा. महकमे ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसके लिए होमवर्क शुरू कर दिया गया है. खर्च का आकलन भी किया जाएगा और यह प्रयास पैरामीटर्स पर सही उतरा तो अगले सीजन से इसकी शुरुआत की जाएगी. यह तकनीक सऊदी अरेबिया में यूज की जाती है.


फोरेस्ट चीफ आये सामने

लगातार सूबे के जंगलों में बढ़ रही आग की घटनाओं को लेकर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) जयराज मंडे को मीडिया से मुखातिब हुए. उन्होंने कहा कि क्लाउड सीडिंग तकनीक सऊदी अरेबिया कंट्रीज में यूज किया जाता है. पीसीसीएफ ने कहा कि 71 परसेंट फॉरेस्ट लैंड में हर साल फायर सीजन (15 फरवरी से मानसून आने तक) आग से सैकड़ों हेक्टर जंगल राख हो जाते हैं. जिसके लिए बारिश पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इस बार फरवरी से अपै्रल तक मौसम के साथ देने से आग की मात्र 88 घटनाएं हुई थीं, लेकिन एक मई से अब तक इनमें 1731 का इजाफा हुआ और 2521 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है. उन्होंने बताया कि ऐसे आग की घटनाओं के लिए क्लाउड सीडिंग पर विचार किया जा रहा है. क्लाउड सीडिंग तकनीक ऐसी है, जिससे कहीं के बादल को कहीं लेजाकर बारिश कराई जा सकती है.
क्या है क्लाउड सीडिंग
क्लाउड सीडिंग में कृत्रिम तरीके से बादलों को बारिश के अनुकूल बनाया जाता है. इन पर सिल्वर आयोडाइड या ठोस कार्बन डाईआक्साइड को छोड़ा जाता है. इस प्रक्रिया में बादल नमी सोखते हैं, उसके बाद बारिश होने लगती है. चाइना में भी इसका प्रयोग हो चुका है.

प्रमुख बिन्दु

-राज्य में वन क्षेत्रफल 37999.60 वर्ग किमी.
-फायर सीजन में 8700 किमी फायर लाइन की सफाई की गई.
-40 प्रभागीय वनाधिकारी मुख्यालयों में मास्टर कंट्रोल रूप में स्थापना.
-मुख्यालय में स्टेट कंट्रोल रूम की स्थापना.
-टोल फ्री नंबर 18001804141 व मोबाइल नंबर 7900577999
-स्टेट में 1557 क्रू स्टेशन, हर स्टेशन में 6 से 7 कार्मिक तैनात.
-वन क्षेत्र में 222 वॉच टावर्स व 5212 फायर वाचर.
-फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया वन विभाग को बीट स्तर पर एसएमएस अलर्ट.
-फॉरेस्ट फायर को रोकने के लिए वर्ष 2018-19 में 19.99 करोड़ रुपए खर्च.
-वर्ष 2019-20 में 17.38 करोड़ रुपए की धनराशि उपलब्ध कराई गई.
-पंचायत वनों के लिए 2.36 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई.
-इस वर्ष अब तक 11 कार्मिक फायर रोकने में हुए हैं घायल.



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