सुरक्षा का 'कलर कोड'

2018-12-21T06:00:49Z

जिला महिला अस्पताल प्रशासन ने तैयार की कलर्ड कोड व्यवस्था

हर खतरे के लिए एक अलग रंग का कोड, मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए उठाया कदम

Meerut। अब बड़ी दुर्घटना या अन्य इमरजेंसी के दौरान जिला महिला अस्पताल में कलर्ड कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसके तहत खतरे की स्थिति को हैंडल करने लिए अस्पताल प्रशासन और स्टॉफ तय कलर्ड कोड में ही एक-दूसरे को सूचना देंगे। इसके लिए बकायदा स्टॉफ को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।

ये है योजना

हाल ही में जिला महिला अस्पताल को नई चार मंजिला मैटरनिटी विंग में शिफ्ट किया गया है। 100 बैड वाले इस विंग में अलग-अलग फ्लोर पर गर्भवती व प्रसूताओं के लिए वार्ड बनाए गए हैं। अस्पताल में आग लगने, प्राकृतिक आपदा, बम होने या किसी अन्य इमरजेंसी के दौरान मरीजों में भगदड़ न मचे और स्थिति को कंट्रोल कर लिया जाए इसके लिए कलर कोड की योजना तैयार की गई है।

ऐसे किया जाएगा लागू

अस्पताल के पहले तल पर एनाउंसमेंट पैनल तैयार किया जाएगा।

यहां कार्यरत स्टॉफ को कलर्ड कोड का प्रयोग सिखाया जा रहा है।

अगर अस्पताल के किसी हिस्से में आग लगी है, तो वहां मौजूद कर्मचारी इसके लिए रेड कोड का प्रयोग करेगा।

अन्य स्टॉफ ये सुनते ही समझ जाएंगे कि आग लगी है।

साथ ही अस्पताल प्रशासन को भी इसी कोड से सूचित करेगा।

पैनल पर मौजूद कर्मचारी एनाउंस कर पूरे अस्पताल में इसी कोड के जरिए सूचना देगा।

अन्य स्टॉफ प्रभावित स्थल पर पहुंचेगा। जिसके बाद अस्पताल के मरीज व उनके सहायकों को सुरक्षित स्थानों में शिफ्ट किया जाएगा। ताकि अफरा-तफरी न मचे।

यह होगा फायदा

कलर कोड योजना को लागू करने के लिए आपातकालीन स्थिति में बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। बल्कि इससे जहां एक तरफ मरीजों को पैनिक होने से बचाया जा सकेगा। वहीं समय रहते स्थिति को कंट्रोल करने में भी सहायता मिलेगी। इस योजना को लागू करने से पहले अस्पताल स्टॉफ को प्रशिक्षित किया जा रहा है। वहीं इंटरकॉम की भी व्यवस्था भी लागू की जाएगी।

ये है कलर कोड

कोड रेड - आग लगने की स्थिति में

कोड ब्लू - दिल का दौरा पड़ने का स्थिति में

कोड येलो - बाहरी आपदा, भूकंप, ट्रेन एक्सीडेंट, बाढ़ इत्यादि

कोड ब्लैक -चिकित्सालय में बम होने की स्थिति में

कोड पिंक - बच्चा चोरी हो जाने की स्थिति में

अस्पताल में अधिकतर प्रसूताएं ही आती हैं। आपदा की स्थिति में भगदड़ होती है तो गर्भवती महिला और बच्चे को भी नुकसान हो सकता है। ऐसा न हो इसके लिए ही इस को तैयार किया जा रहा है।

डॉ। मनीषा वर्मा, एसआईसी, जिला महिला चिकित्सालय


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