सोनिया गांधी ने जब इस भारतीय खजाने को सहेजने की आेर बढ़ाए थे कदम

2018-12-09T11:14:24Z

कांग्रेस की पूर्व अध्‍यक्ष सोन‍िया गांधी का आज जन्मदिन है। बहुत कम लोग जानते हैं कि सोनिया को शुरुआती दाैर में राजनीति में नहीं बल्कि कला में अधिक रुचि थी। एेसे में आइए इस विशेष दिन पर जानें उनके जीवन के एेसे ही कुछ खास किस्से

कानपुर। सोनिया गांधी का मूल नाम एड्विज एंटोनिया अल्बीना मैनो हैं। इनका जन्म 9 दिसंबर, 1946, लुसियाना इटली में हुआ। भारतीय राजनीति में आज ये एक बड़ी राजनेता हैं। इन्होंने कांग्रेस पार्टी में 1998-2017 तक अध्यक्ष के रूप में भूमिका निभार्इ है। आधिकारिक वेबसाइट ब्रिटानिकाडाॅटकाॅम के अनुसार सोनिया जब कैम्ब्रिज के एक स्कूल में अंग्रेजी की पढ़ार्इ कर रही थीं तभी इनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुर्इ थी।
1968 में शादी के बंधन में बंधी थी सोनिया गांधी

राजीव गांधी कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र थे। सोनिया का भारतीय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के बेटे राजीव से मुलाकात का सिलसिला लंबे समय तक चला। वक्त बीतने के साथ ही सोनिया आैर राजीव गांधी 1968 में शादी के बंधन में बंध गए थे। इसके बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास में सोनिया के साथ रहने लगे थे। राजीव व सोनिया हर मोड़ पर एक दूसरे के साथ खड़े रहे।  
सोनिया राजीव की मदद के लिए हमेशा आगे रहीं
राजीव ने एक कामर्शियल एयरलाइन पायलट के रूप में करियर बनाने के लिए राजनीति छोड़ दी थी। हालांकि 1980 में भाई संजय की मृत्यु हो गई और राजीव राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करना पड़ा था। वहीं 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव प्रधानमंत्री पद पर काबिज हुए। सोनिया ने हमेशा राजीव गांधी की एक पत्नी के रूप में मदद की। उन्होंने पर्दे के पीछे से राजीव के प्रचार में भी मदद की।

राजनीति में नहीं कला में थी सोनिया गांधी की रुचि

बहुत कम लाेग जानते हैं कि साेनिया को राजनीति में नहीं बल्कि कला में रुचि थी। उन्हें पेंटिंग व कलात्मक चीजों से बहुत लगाव था। यही वजह थी कि शादी के बाद भारत आने पर उन्होंने कला संरक्षण का सिलसिलेवार अध्ययन भी किया। 1984 में जब राजीव गांधी चुनाव प्रचार कर रहे थे उस सोनिया गांधी कला सरंक्षण पर विशेष अध्ययन कर रही थीं। इसके साथ ही वह भारतीय कला विरासत के खजाने को सहेजने का काम कर रही थीं। वह इसमें काफी खुश भी थीं, लेकिन 1991 मेें उनकी जिंदगी में अचानक से एक तूफान आया आैर पल भर में सब बदल गया।

सोनिया ने राजनीति में आने से इंकार किया था

1991 में राजीव की हत्या के बाद सोनिया को नेहरू-गांधी राजवंश के उत्तराधिकारी के रूप में देखा गया था। उन्हें कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व की पेशकश की गई थी लेकिन सोनिया ने राजनीति में आने से इंकार कर दिया था। हालांकि कुछ वक्त बाद 1993 में, उन्होंने राजीव के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश के अमेठी का दौरा किया। इसके बाद राजनीति के क्षेत्र में कदम बढ़ा दिए थे। 1998 में सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष बनने काे राजी हुर्इं थी।
विदेश में जन्म होने से नहीं बन पार्इं थी पीएम
सोनिया ने पार्टी को फिर से सशक्त बनाया आैर 2004  के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अच्छी पोजीशन हासिल की थी। उन्हें पीएम बनने का आॅफर दिया गया लेकिन उनका जन्म विदेश में होने का मुद्दा बन गया था। एेसे में उन्होंने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में सेवा देने के लिए कहा। वहीं मां सोनिया के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी अब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं।

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