CJI पर महाभियोग नोटिस रद मामला सुप्रीम कोर्ट में 45 मिनट बहस के बाद कांग्रेस ने वापस ली याच‍िका

2018-05-08T16:38:58Z

सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस को राज्यसभा के सभापति द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याच‍िका रद हो गई। बता दें इस मामले में कुछ देर हुई सुनवाई के बाद कांग्रेस के दोनों सांसदों ने अपनी याचिका वापस ले ली है। यहां पढ़ें पूरा मामला

आखिर पांच न्यायाधीशों की पीठ किसके आदेश गठित हुई
नई दिल्ली (प्रेट्र)। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस को 23 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के खारिज कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस के दो सांसदों सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी याग्निक ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। ऐसे में आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। करीब 45 मिनट की सुनवाई के बाद जस्टिस एके सीकरी ने याचिका को खारिज कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि याचिका दायर करने वाले दोनों सासंदों ने अपनी याचिका वापस ले ली थी। इस मामले में सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुनवाई के लिए संविधान पीठ के गठन पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आखिर पांच न्यायाधीशों की पीठ किसके आदेश गठित हुई है।
आदेश की कॉपी मिलने के बाद इस पर चुनौती दे सकते
वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यसभा सभापति को नोटिस देने वाले 50 सांसदों में से सिर्फ दो ने ही शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। कांग्रेस के अलावा इसमें छह पार्टियां शामिल हैं लेकिन इस मामले में कांग्रेस के केवल दो सांसदों ने ही सर्वोच्च न्यायालय से संपर्क किया है। इससे स्थिति साफ है कि उन लोगों को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू महाभियोग नोटिस खारिज किए जाने का फैसला मंजूर है। किसी को कांग्रेस को समर्थन नहीं किया। कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि यह मामला एक प्रशासनिक आदेश के माध्यम से पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ है। ऐसे में प्रधान न्यायाधीश इस मामले में ऐसा आदेश नहीं दे सकते है। वह पीठ के गठन संबंधी आदेश की कॉपी मिलने के बाद इस पर चुनौती दे सकते हैं।

पीठ ने नहीं दिखाई रुचि कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ली

वहीं जस्टिस एस ए बॉबडे, एन वी रामन, अरुण मिश्रा और एके गोयल समेत पीठ ने कहा कि यह एक बहुत ही अभूतपूर्व स्थिति है। यहां सीजेआई पार्टी है और अन्य चार न्यायाधीशों की भी कुछ भूमिका हो सकती है। हम कुछ नहीं जानते हैं। इसके बाद पीठ ने कपिल सिब्बल से पूछा कि चीफ जस्टिस द्वारा पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित करने के प्रशासनिक आदेश की प्रति यदि दोनों सांसदों को दे दी जाये तो इससे क्या होगा। इस पर कपिल ने कहा कि इसके बाद वे फैसला करेंगे कि चुनौती दी जाए या नहीं। हालांकि पीठ ने कपिल सिब्बल की इस दलील को स्वीकार करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली। बतादें कि कांग्रेस के दो सांसदों ने सभापति के आदेश को चुनौती देते हुए कल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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