अस्पताल में इलाज न मिलने पर खटखटाया था कोर्ट का दरवाजा, सुनवाई से पहले कोरोना संक्रमित की चली गई जान

Updated Date: Fri, 05 Jun 2020 10:57 AM (IST)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह से तैयार रहने का दावा भले करते हों मगर हकीकत कुछ और है। दिल्ली में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग जिन्हेंं कोरोना था उनकी इलाज न मिलने के चलते जान चली गई। हालांकि उन्होंने मरने से पहले कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार दावा कर रही है कि उसने राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना से लड़ाई के सारे बंदोबस्त कर लिए हैं। मगर केरजीवाल के इन दावों पर सवाल तब उठा, जब दिल्ली में एक 80 साल के बुजुर्ग की इलाज न मिलने के चलते जान चली गई। मरने से पहले बुजुर्ग ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मगर कोर्ट में सुनवाई होने से पहले ही बुजुर्ग की जान चली गई। इस बात की जानकारी उनके वकील ने दी।

दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों ने कर दिया था मना

नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के नंदनागरी में रहने वाले 80 वर्षीय बुजुर्ग कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। उन्होंने इलाज के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), राजीव गांधी अस्पताल, मैक्स हॉस्पिटल पटपडग़ंज आदि सहित विभिन्न प्रमुख अस्पतालों के दरवाजे खटखटाए थे, लेकिन उनके प्रयास बेकार थे क्योंकि सभी अस्पतालों ने उन्हेंं यह कहते हुए एडमिट करने से मना कर दिया कि, अस्पताल में जगह खाली नहीं है।

फिर खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

2 जून को अधिवक्ता आरपीएस भट्टी के माध्यम से बुजुर्ग ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ याचिका दायर की थी। जिसकी शुक्रवार को सुनवाई होनी थी मगर एक दिन पहले ही बुजुर्ग की मौत हो गई। उनके अधिवक्ता ने याचिकाकर्ता के निधन की खबर की पुष्टि की। उनकी याचिका में याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि वे उत्तरदाताओं को तुरंत सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधा के साथ याचिकाकर्ता को समायोजित करने की व्यवस्था करें और बीपीएल योजना के तहत उन्हेंं मुफ्त चिकित्सा प्रदान करें।

इलाज के अभाव में चली गई जान

याचिका के अनुसार, मृत बुजुर्ग शख्स की तबियत 25 मई को खराब हुई थी और उन्हेंं पूर्वी दिल्ली के एक अस्पताल में ले जाया गया। याचिका में कहा गया है, "उक्त अस्पताल के कर्मचारियों ने लापरवाही से कोरोना वायरस पॉजिटिव मरीज के निकट बुजुर्ग को रख दिया। इस प्रकार याचिकाकर्ता संक्रमित हो गया और उसकी हालत और बिगड़ गई, जिसके कारण वेंटिलेटर की आवश्यकता हुई। तब उस अस्पताल ने याचिकाकर्ता के बेटे से अपने पिता को किसी दूसरे हॉस्पिटल में ले जाने की बात कही। मगर दूसरे अस्पतालों ने भी बेड न होने की वजह से एडमिट करने से इंकार कर दिया और अब बुजुर्ग की वायरस से संक्रमित होकर जान चली गई।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
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