Coronavirus Impact: यहां लॉकडाउन में सबकुछ बंद है, लेकिन ताबूत बनाने वालों को 24 घंटे करना पड़ रहा काम

2020-04-08T15:48:08Z

कोरोना वायरस के कारण भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में भारी संख्या में लोग संक्रमित हो चुके हैं और उनमें से बहुत सारे लोगों की मौत भी हो चुकी है। इस वक्‍त कुछ ऐसे भी देश हैं जहां पर कोरोना से मरने वालों की संख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि उन्हें दफनाने के लिए ताबूत कम पड़ रहे हैं।

मेड्रिड (रॉयटर्स)यूरोप के कई देशों में कोरोना महामारी का असर और कहर दोनों ही काफी ज्यादा है। इस वक्त स्पेन में एम तरफ पूरा देश कोरोना के कारण लॉकडाउन में पूरी तरह से रुका हुआ है, वहीं दूसरी तरफ कोरोना के कारण देश में हुई हजारों मौतों के बाद उनके लिए ताबूत की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई। यही वजह है कि लॉकडाउन में सब कुछ बंद भले हो लेकिन ताबूत यानी कॉफिन बनाने वाली कंपनियों को दिन रात काम करना पड़ रहा है। स्पेन में ताबूत बनाने वाली एक बड़ी फर्म Ataudes Chao में कर्मचारी हर वक्‍त काम कर रहे हैं, यहां तक कि कंपनी ने ताबूत की अप्रत्याशित भारी डिमांड को देखते हुए तमाम नए कर्मचारी भी हायर किए हैं, ताकि वो मांग की पूर्ति कर सकें।

कुल मांग का सिर्फ 70 परसेंट बन पा रहे हैं ताबूत

बता दें कि स्पेन में कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या का आंकड़ा 14000 के पास पहुंच चुका है। ताबूत बनाने वाली कंपनी का कहना है कि सामान्‍य दिनों की अपेक्षा हमारे ऑर्डर्स 8 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं। स्पेन में ताबूत बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक और 110 साल पुरानी कंपनी की सीईओ मारिया चाव ने यह बात बताते हुए आगे कहा, हम मेड्रिड और आसपास के इलाकों में ताबूत की मांग को पूरा करने के लिए हर रोज 300 लकड़ी के ताबूत बनाकर भेज रहे हैं। इस कंपनी ने पिछले 10 दिनों के दौरान 6 नए परमानेंट कर्मचारियों को हायर किया है ताकि वह अपनी ताबूत बनाने की प्रोडक्शन कैपेसिटी को बढ़ा सकें। उन्होंने बताया कि इन ताबूतों की डिलीवरी से जुड़े लोग भी इस इमरजेंसी के दौरान लगातार काम कर रह हैं। इसके अलावा इस कंपनी के ग्लेशिया स्थित प्लांट में भी 1 दिन में 11 घंटे काम किया जा रहा है। मारिया ने बताया कि कोरोना इफेक्‍ट को लेकर हमने ताबूत की जिस मांग का अंदाजा किया था, दुर्भाग्य से उसकी मांग उससे ज्यादा बढ़ गई और हम वर्तमान में उस डिमांड का सिर्फ 60 से 70 परसेंट ही बना पा रहे हैं। मारिया ने बताया कि कंपनी में हम आजकल चारों ओर से कॉफिन बॉक्स से घिरे हुए हैं जो कि अंतिम संस्कार के लिए भेजे जाने का इंतजार कर रहे हैं।

ताबूतों से हटा दिए सभी तरह के धार्मिक चिह्न

इन हालात में बिना धार्मिक परंपरा के होने वाले अंतिम संस्‍कार को देखते हुए कंपनी ने ताबूतों पर से किसी भी तरह के कैथोलिक या अन्‍य धार्मिक चिह्न हटा दिए हैं। इन ताबूतों में से कुछ के ऊपरी हिस्‍से में कांच लगा होता था, पहले काफी पॉपुलर रहे ये कॉफिन आजकल बेकार और रिस्‍की मानकर नहीं बनाए जा रहे, क्‍योंकि कांच टूटने से आसपास वालों को कोरोना के इंफेक्‍शन का खतरा हो सकता है।

Posted By: Chandramohan Mishra

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