सीटेट में धुमायदार पेपर ने कैंडीडेट्स को किया खूब परेशान

2018-12-10T06:00:47Z

- सीटेट में सवालों को घुमाकर पूछने से भी कैंडीडेट्स हुए परेशान

- दो पालियों में एक लाख से अधिक ने दिया एग्जाम

LUCKNOW : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा सी-टेट में संडे को लंबे सवालों ने कैंडीडेट्स को काफी परेशान किया। खासकर इंग्लिश में पूछे गए पैसेज से सभी को दिक्कत हुई। कैंडीडेंट्स को ढ़ाई घंटे में डेढ़ सौ सवाल हल करने थे ऐसे में एक सवाल के लिए एक मिनट ही कैंडीडेंट्स को मिला। जबकि पैसेज को पढ़ने में ही पंद्रह मिनट निकल गए।

करीब 1 लाख ने दिया एग्जाम

राजधानी में सीटेट के लिए 161 सेंटर्स बनाए गए थे। जहां सवा लाख कैंडीडेंट्स को एग्जाम देना था। इसमें एक लाख से अधिक कैंडीडेंट्स एग्जाम में शामिल हुए। पहली पाली में ज्यादा कैंडीडेंट्स शामिल हुए वहीं कई कैंडीडेंट्स ने दोनो पाली का एग्जाम नहीं दिया।

इंग्लिश आई टफ

कैंडीडेंट अजित ने बताया कि इंग्लिश का सेक्शन काफी टफ था। पैसेज काफी लंबे थे जिन्हें पढ़ने में काफी समय लगा। वहीं सिनोनिम्स, एंटोनिम्स, कंप्रेहेंशन और प्रिपोजीशन से सवाल आए थे जिन्हें करने में काफी समय लगा। वहीं आएशा ने बताया कि इस बार पैसेज को पढ़कर सीधे सवाल हल करना मुश्किल था। बाल विकास और शिक्षा शास्त्र के सवाल भी काफी डीटेल में पूछे गए थे।

पर्यावरण अध्ययन में पूछा इतिहास का सवाल

कैंडीडेंट एसके कश्यप का दावा है कि पर्यावरण अध्ययन में कुछ सवाल इतिहास के पूछे गए, जो सिलेबस के बाहर के थे। जे सीरीज में सवाल संख्या 76 में पूछा गया कि गोलकुंडा किला किसने बनवाया। ये भी पर्यावरण अध्ययन से संबंधित सवाल नहीं है। नेहा वर्मा का कहना था ऑप्शनल के लिए फॉर्म भरते समय हिंदी और इंग्लिश के साथ संस्कृत और उर्दू का भी ऑप्शन था, लेकिन पेपर आया तो केवल हिंदी और इंग्लिश का आप्शन ही था।

कोट

ओवरऑल पेपर आसान था। पिछले साल की तुलना में इस बार का पेपर काफी आसान रहा है। इंग्लिश में पैसेज काफी लेंदी थे। जिसे पढ़ने और समझने में काफी टाइम लगा।

अजित

पेपर काफी आसान आया था। पर लेंदी होने के कारण इसे हल करने में काफी समय लग रहा था। इंग्लिश थोड़ी टफ रही। जिसकी उम्मीद नहीं थी।

कृष्ण चंद्र

सवाल काफी लम्बे और घुमाकर पूछे गए थे, खासतौर पर इंग्लिश का पार्ट काफी लम्बा था। वहीं ईवीएस और साइकोलॉजी काफी आसान रही।

नेहा वर्मा

केवल इंग्लिश ने काफी परेशान किया। बाकि ओवरऑल पेपर काफी आसान था। पिछली बार पेपर इस बार की तुलना में कठिन आया था।

सुनिल

पेपर काफी लेंदी होने के कारण सवालों को हल करने में काफी समय लग रहा था। लगभग सभी सवालों को काफी घुमाकर पूछा गया था।

आएशा


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