MillennialsSpeak #RaajniTEA में रांची के युवाआें कहा जीएसटी की खामियां दूर करें तभी बनेगी बात

2019-02-20T12:06:35Z

मिलेनियल्स का नब्ज टटोलने के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का मिलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन2019 का कारवां रेडक्रॉस सोसाइटी के दफ्तर के पहुंचा

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RANCHI: क्या इस लोकसभा चुनाव में जीएसटी मुद्दा बनेगा? जीएसटी से जुड़ी परेशानियां क्या मतदान करने वक्त मतदाताओं के जेहन में रहेगा? जीएसटी किस हद तक चुनाव को प्रभावित कर सकता है. इस बाबत मिलेनियल्स का नब्ज टटोलने के लिए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट का मिलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन-2019 का कारवां रेडक्रॉस सोसाइटी के दफ्तर के पहुंचा. यहां युवाओं ने चुनाव और जीएसटी पर खुलकर रखी अपनी बात.

अच्छा कदम
समाजसेवी और कारोबारी नितिन अग्रवाल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि जीएसटी सरकार का अच्छा कदम है. एक देश एक टैक्स और टैक्स चोर रोकने के लिए जीएसटी को लागू किया गया है, लेकिन इसमे अभी भी कई तरह की खामियां हैं जिसका खामियाजा कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है. सरकार को चाहिए कि इसे दूर करने की पहल करे. बेहतर होगा कि हर सामान पर जीएसटी की दर एक जैसी हो, ताकि किसी तरह का भ्रम न तो कारोबारियों और न ही उपभोक्ताओं को हो. सामानों की कैटेगरी बनाकर उसपर जीएसटी की दर अलग-अलग निर्धारित करना किसी भी एंगल से उचित नहीं प्रतीत हो रहा है. अगर इसे दूर कर लिया जाए तो जीएससी के कारोबार को और रफ्तार मिलेगी.

एक देश एक टैक्स की है पहल
विकास सिंह ने कहा कि एक देश एक टैक्स को लेकर सरकार द्वारा लागू किया गया जीएसटी बेहतरीन कदम है. इससे टैक्सों में काफी हद तक समानता आई है. इससे पहले टैक्स को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग व्यवस्था थी. एक ही सामान पर किसी राज्य में 30 परसेंट को कहीं 20 तो कहीं 10 परसेंट टैक्स वसूला जाता था. इससे कारोबारियों को तो दिक्कतें होती थी साथ ही कर चोरी की भी आशंका बनी रहती थी. इतना ही नहीं, लागत का बड़ा हिस्सा इस गैप से निपटने, दूसरे राज्यों में कीमतों पर नजर रखने और तरह-तरह के वैट फ ॉर्म को भरने के लिए बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे. लेकिन, जीएसटी लागू होने के बाद इससे कारोबारियों को राहत मिल गई है.

बिना प्लानिंग के किया लागू
प्रिया कुमारी बताती हैं जीएसटी की मार सबसे ज्यादा कारोबारियों पर पड़ी है. जीएसटी बिल व्यापारियों और ग्राहकों के साथ धोखा है.इसमें नियम कानून इतने ज्यादा हैं कि आधा समय तो इनको समझने में ही निकल रहा है. प्रिया कुमारी ने कहा कि बिना प्लानिंग के ही जीएसटी को लागू कर दिया गया. इसके तहत छोटी सी छोटी गलती पर भारी जुर्माना है, ऐसे में छोटे कारोबारियों पर अगर जुर्माना लगता है तो उनका कारोबार तबाह हो जाता है. ऐसे में आखिर कोई कैसे अपने कारोबार को बढ़ा सकेगा. जीएसटी अफसरों को मनमानी करने की पूरी छूट दे रखी है. वे अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल कारोबारियों को परेशान करने में कर रहे हैं. ऐसे में इस चुनाव में कहीं न कहीं जीएसटी अहम रोल निभाएगा.

कड़क बात

जीएसटी एक अच्छी प्रणाली है, मगर बिना प्लानिंग के इसे लागू करना बहुत सही नहीं है. इसमें सब कुछ कंप्यूटराइज्ड है. लेकिन, ऐसे कारोबारियों की आज भी बड़ी तादाद है जो कंप्यूटर व इंटरनेट फ्रेंडली नहीं हैं. जिस वजह से न तो वे जीएसटी से पूरी तरह वाकिफ हो पाए हैं और न ही इससे जुड़े डिटेल्स ऑनलाइन दे पा रहे हैं. ऐसे में इनके लिए अलग से विकल्प होना चाहिए. इतना ही नहीं, इसकी कागजी प्रक्रिया काफी पेचीदी व लंबी है. इस कारण काराबोरियों का काफी समय इसे पूरा करने में ही जाया हो जाता है. साथ ही जीएसटी को लेकर काफी भ्रांतियां हैं, पहले उनको दूर करना चाहिए. सरकार को जीएसटी की पूरी जानकारी लोगों को देनी चाहिए,

आम बात

जीएसटी लागू होने के बाद यह आशंका जाहिर की जा रही थी कि महंगाई बढ़ेगी, लेकिन यह सही साबित नहीं हुई. इसके लागू होने के बाद से ही थोक और खुदरा महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में है. सरकार ने जीएसटी के दायरे में आने वाले 1200 से अधिक आइटम में से अधिकांश पर जीएसटी की दर शून्य रखी है. अधिकतम 28 प्रतिशत जीएसटी वाले स्लैब में शामिल उत्पादों और सेवाओं को घटाकर लगभग 50 पर लाया गया. कुल मिलाकर 300 से ज्यादा आइटम पर जीएसटी की दरें कम की गयीं, जहां तक आम कारोबारियों का सवाल है तो उन्हें अलग-अलग टैक्स भरने के झंझट से मुक्ति तो जरूर मिली, लेकिन शुरुआती दौर में जीएसटी के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए उन्हें कई दिक्कतों से गुजरना पड़ा था.

 

युवाओं ने क्या कहा

जीएसटी ने सामानों पर टैक्स के मामले में पूरे देश में एकरुपता ला दी है. लेकिन, लाभ के साथ साथ जीएसटी से जुड़ी कुछ परेशानियां भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इसकी कागजी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की जरूरत है, ताकि कारोबारियों को रिटर्न फाइल करने में हो रही झंझटों से निजात मिल सके. बता दें कि साल में हर कारोबारी को तीन बार जीएसटी रिटर्न देना होता है.

सोहेल अंसारी

जीएसटी लागू करने का फायदा नहीं देखने को मिल रहा है. एक ही प्रोडक्ट में टैक्स का दो स्लैब होना कर चोरी और हाफ बिलिंग को बढ़ावा दे रही है. कर चोरों ने चोरी के नए रास्ते ढूंढ लिए हैं. जीएसटी के लागू हुए डेढ़ साल से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन पोर्टल सही से काम नहीं कर रहा है. टेक्निकल जानकारी रखने वाले लोगों को जीएसटी से लाभ हुआ है लेकिन छोटे दुकानदारों के खर्चे बढ़ गए हैं.

अंश जायसवाल

जीएसटी लाने का मुख्य मकसद जनता को चीजें एक दर और कम दामों पर उपलब्ध कराना है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं देखने को मिल रहा है. कर की दरें कम होने के बाद भी जनता को सभी चीजें उतने ही दामों पर मिल रही हैं. जीएसटी लागू करने की रफ्तार बहुत सुस्त है. इस वजह से आम जनता को इसकी राहत नहीं मिल रही. इसके पीछे केंद्र और राज्य सरकारों की आधी अधूरी तैयारी भी जिम्मेदार है.

सुरभि सुचिता

जीएसटी बिल लागू होने से सबसे ज्यादा खामियाजा छोटे व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है. देश में जितना भी कारोबार है उसमें सबसे अहम भूमिका छोटे व्यापारी ही निभाते हैं. कई ऐसे छोटे व्यापारी हैं जिनके बैंक में अकांउट तक नहीं हैं, केंद्र और सरकार के बटवारे में व्यापारियों का उत्पीड़न हो रहा है. इसके अलावा टैक्स का प्रतिशत बढ़ा दिया गया है जिसको एक प्रतिशत ही रखना चाहिए.

मनीषा कुमारी

सरकार की ओर से जीएसटी बिल लागू होने से सब कुछ ऑनलाइन हो जायेगा, लेकिन कई ऐसे व्यापारी हैं जिनको ये प्रक्रिया ही नहीं आती है. उन व्यापारियों के लिए ये सबसे बड़ी प्रॉब्लम है, इसके अलावा कई जगहों पर नेट कनेक्टिविटी ही नहींए वहां के व्यापारी कैसे व्यापार करेंगे, इसके बारे में भी विचार किया जाना चाहिए, इसके अलावा वायदा कारोबार को जीएसटी से अलग किया जाए.

पवन कुमार

जीएसटी में सारे अधिकार कर्मचारियों को दे दिये गये हैं. ऐसे में व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं है. मेरे विचार से सबसे पहले तो जीएसटी काउंसिल में व्यापारियों का प्रतिनिधित्व का आप्शन होना चाहिए. हर ट्रेड के व्यापारियों को समय- समय पर बुलाकर मीटिंग की जानी चाहिए, इसके अलावा जीएसटी के प्रावधानों को और सरल बनाया जाए.

वसीम राजा

जीएसटी बिल की टैक्स प्रणाली बहुत ही जटिल है इसको आसान किया जाना चाहिए. इसके अलावा जो कर्मचारियों को पूरा अधिकार दिया गया है उसको हटाया जाये. इससे व्यापारियों के शोषण की पूरी संभावना है. ऐसे में सरकार को बिना व्यापारियों की सहमति और विश्वास में लेकर करना चाहिए.

शिल्पा कुमारी


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