युवाओं की मांग आतंकवाद का विनाश

2019-02-16T01:48:43Z

JAMSHEDPUR: शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर कॉ-ऑपरेटिव कॉलेज कैंपस में दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के मिलेनियल्स स्पीक के तहत राजनीटी का आयोजन किया गया। इसमें कॉलेज के छात्रों ने चुनावी मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। चाय की चुस्कियों के साथ सभी ने आतंकवाद के खिलाफ कितनी मिली सफलता, क्या आतंकी घटनाएं चुनाव में आपके निर्णय को प्रभावित करेंगे विषय पर अपने विचार रखे। गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी आत्मघाती हमले पर युवाओं में काफी रोष देखा गया। सभी ने एक स्वर में पाकिस्तान को सबक सिखाने और आंतकवाद को नष्ट करने वाली सरकार को सपोर्ट करने की बात कही। कुछ युवाओं का कहना था कि बीच-बीच में सर्जिकल स्ट्राइक होते रहना चाहिए, जिससे आंतवादियों में डर बना रहे। कुछ का कहना था कि मोदी सरकार में सबसे ज्यादा आंतकी हमले हुए। वहीं, कई आंतकी हमले की वजह सुरक्षा एजेंसी की चूक को बताया।

आतंकी संगठनों सफाया में सफल

मिलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन 2019 का मकसद है 18 से 38 साल वोटर्स के नब्ज को टटोलना है। आखिर इस समय क्या सबसे बड़े मुद्दे है और किस तरह की चुनौतियां सामने आ रही है और इसका कैसे समाधान हो, इसपर उनके विचार लेना है। इस सिलसिले में डिस्कशन में ज्वलंत मुद्दा गुरुवार को हुए पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादी आत्मघाती हमले के कारण सभी ने आतंकवाद विषय पर सभी ने अपनी बात रखी। यह मुद्दा देश की सुरक्षा तथा देश आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। आंतकवाद देश में कम तो हुई पर पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। देश में आतंकी हमला करने वाले इंडियन मुजाहिद्दीन जैसे आतंकी संगठनों के समूल सफाया करने में सरकार सफल रही है। यही कारण है आतंकवादी उरी, पुलवामा, पठानकोट और गुरदासपुर में हमले के अलावा भारत के अंदरूनी हिस्से में कोई भी बड़ी वारदात करने में सफल नहीं रहे। इन चार सालों में आइएसआइएस और अलकायदा ने भारत में पैर जमाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी से अलकायदा और आइएसआइएस के मंसूबे परवान नहीं चढ़ सके, लेकिन इसके बाद भी कश्मीर में आतंकवाद कम नहीं हुआ है।

कश्मीर सबसे कमजोर कड़ी

मिलेनियल्स ने कहा आंतरिक सुरक्षा को लेकर कश्मीर मोदी सरकार की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रही है। कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को रोकने के लिए किये गये प्रयोग पूरी तरह से सफल नहीं हुए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर आतंकियों के एनकाउंटर, हुर्रियत नेताओं को मिलने वाली आतंकी फंडिंग पर लगाम की कोशिशों के बावजूद घाटी में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रहा है। नोटबंदी के बाद फंड बंद होने की बात कही गई थी, लेकिन कश्मीर में आतंकी हमला बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को पुलवामा में आंतकवादी आत्मघाती हमले का भी यही कारण है। मिलेनियल्स ने कश्मीर सबसे की सबसे कमजोर कड़ी है।

बड़ी संख्या में मारे गए आतंकी

मिलेनियल्स ने आतंकवादियों के मरने की भी बात कही। बुरहान बानी की मौत के बाद भड़की हिंसा के बाद लगने लगा था कि कश्मीर के हालात बद से बदतर हो गए थे। हालात 2010 से भी खराब दिख रहे थे, लेकिन धीरे-धीरे सुरक्षा एजेंसियों को आतंकी सरगनाओं को मार गिराने में सफलता मिली।

नक्सली मोर्चे पर अच्छा कार्य

चर्चा के दौरान मिलेनियल्स ने झारखंड के नक्सलियों का भी मुद्दा उठाया। नक्सलियों के मोर्चे पर भी सरकार के लिए पांच साल सफलता भरे रहे हैं। बीच-बीच में वो सुरक्षा बल के जवानों को निशाना बनाने में सफल जरूर होते रहे है। लेकिन समग्र रूप में देखें, तो सुरक्षा बल नक्सलियों पर भारी रहे। कभी देश के 100 से अधिक जिलों को नक्सल प्रभावित श्रेणी में रखा जाता है, लेकिन अब उनकी संख्या 30 तक सिमट गई है। इनमें अधिकांश नक्सल गतिविधियां झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सिमट कर रह गई हैं।

कड़क मुद्दा

आंतरिक सुरक्षा को लेकर कश्मीर मोदी सरकार की सबसे कमजोर कड़ी साबित हो रही है। कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को रोकने के लिए किए गए प्रयोग कुछ सफल रहे और कुछ पूरी तरह से सफल नहीं रहे। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर आतंकियों के एनकाउंटर, हुर्रियत नेताओं को मिलने वाली आतंकी फंडिंग पर लगाम की कोशिशों के बावजूद घाटी में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है।

जितेन किस्कू, स्टूडेंट

मेरी बात

सेना अच्छा काम रही है। आतंकवादियों को सबक सिखाने का कार्य हो रहा है। आंतकवादी सुधरनेवाले नहीं हैं। उरी घटना के बाद सर्जिकल स्ट्राइक से आंतकवादी तथा पाकिस्तान बौखला गए थे। पाकिस्तान में बैठकर आतंकवादियों के आका तरह-तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। आतंकवाद को रोकने के लिए हमें अपनी वोट की कीमत पहचाननी होगी और एक मजबूत सरकार को चुनना होगा।

अंजन सेन, स्टूडेंट

नोटबंदी से आतंकवाद प्रभावित हुआ है। आतंकवाद का पूरी तरह से खत्म होना देश का एक सबसे बड़ा मुद्दा है। यह देश की सुरक्षा का सवाल है। आखिर कैसे पाकिस्तानी आतंकवादी हमारे देश में घुस कर सेना पर वार कर रहे है। जरूर देश में स्लीपर सेल की संख्या बढ़ी है, जो देश की सूचना उन तक पहुंचाती है।

अमित कुमार महापात्रा, स्टूडेंट

आतंकवाद पर सरकार दोष नहीं दे सकते हैं। यह हमारे देश पर अटैक है, सेना पर अटैक है, सरकार ने झारखंड में नक्सलियों का काफी सफाया किया गया है। नक्सलियों के मोर्चे पर भी सरकार के लिए पांच साल सफलता भरे रहे हैं। बीच-बीच में वो सुरक्षा बल के जवानों को निशाना बनाने में सफल जरूर होते रहे हैं।

सुरजित कुमार मुर्मू, स्टूडेंट

आतंकवादी हमलों में मोदी सरकार में कमी हुई है। रक्षा मामलों में कई कार्य हुए हैं। आर्मी को इस सरकार ने काफी छूट दी है। इसका नतीजा सर्जिकल स्ट्राइक के तौर हम देख सके हैं। आतंकवादी सुधरेंगे नहीं, वे किसी हमला करते रहेंगे, चाहे किसी की भी सरकार हो।

देवव्रत दुबे, स्टूडेंट

सरकार अच्छा कार्य कर रही है। जो आंतकी घटना हुई वो सुरक्षा एजेंसी के चूक के कारण हुई, देश में स्लीपर सेल संख्याओं में बढ़ोतरी हुई है। हम ऐसी सरकार चुनेंगे जो आतंकवाद पर काबू पाए।

-दिलीप कुमार टुडू, स्टूडेंट

पिछले 30 साल से आतंकवाद जारी है। हां जरूर यह एक चुनावी मुद्दा रहेगा। हमें यह भी देखना पडे़गा कि क्या पिछली सरकार से यह सरकार आतंकवाद के मामले में सुरक्षा मामले में कितना काम की है। इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठ कर समाधान कराना चाहिए। आतंकवाद के मुद्दे पर हमें एकजुट हो लड़ना होगा।

लव कुमार महतो, स्टूडेंट

आम चुनाव में आतंकवाद और देश की सुरक्षा दो बड़े मुद्दे रहेंगे। पूर्ववर्ती सरकारों ने सुरक्षा के क्षेत्र के काम किया है लेकिन कल हुई घटना ने एक बार फिर देश के लोगों को सुरक्षा के विषय में सोचने पर मजबूर कर दिया है। देश में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

बबिता कुमारी, स्टूडेंट

जरूर रहेगा हम युवाओं के देश की सुरक्षा पर सोचना होगा। देश की आतंरिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह जरूरी है देश की सेनाएं सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके। देश में इस तरह की घटनाएं है इसके लिए सरकार को कठोर कदम उठाना होगा।

अंजलि शर्मा, स्टूडेंट

हाल के वर्षो में देश की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, लेकिन गुरुवार को पुलवामा में हुई घटना के बाद एक बार फिर से देश के लोगों को सोचना पड़ेगा। देश की सुरक्षा व्यवस्था में छेद से युवाओं को इस चुनाव में देश की सुरक्षा का खासा ख्याल रखना होगा।

नम्रता चंपी, स्टूडेंट

अपने दुश्मनों पर विजय पाकर ही देश की सुरक्षा की जा सकती है। प्रदेश में नक्सली घटनाओं में कमी कर लोगों को सुधरने का मौका दिया जा रहा है। जिससे आने वाले दिनों में देश के आंतरिक दुश्मनों पर विजय मिलेगी। लेकिन देश की सुरक्षा के लिए नौजवानों को आने वाले चुनाव में ध्यान रखना होगा।

शबनम सोरेन, स्टूडेंट

देश में इस तरह की घटना न हो इसके लिए हम युवाओं को सोचना होगा। हर बार लोकसभा चुनाव से पहले विभिन्न पार्टियां हमारी सुरक्षा का दावा करती हैं, लेकिन सच्चाई तो यह है कि आज भी कई राज्यों में शांति स्थापित नहीं हो सकी है। लोकसभा चुनाव में सुरक्षा बड़ा मुद्दा रहेगा।

दमयंती मुर्मू, स्टूडेंट

देश की तत्कालीन सरकार ने आतंकवाद और सुरक्षा में काम किया है। लेकिन देश में इतनी बड़ी घटना के बाद और सतर्कता की जरूरत है। आगामी लोक सभा चुनाव में हम सभी एक मजबूत सरकार का चुनाव करेंगे।

जूली सिंह, स्टूडेंट

देश में राजनेता सरकार बनने से पहले देश की सुरक्षा पर बात करते हैं, लेकिन वहीं सत्ता में बैठने के बाद वह देश की सुरक्षा के बारे में भूल जाते हैं। इसलिये यह जिम्मवारी युवाओं की है कि देश को एक योग्य उम्मीदवार मिले तो देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती दे सके।

रश्मि सोरेन, स्टूडेंट


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