शिक्षा व्यवस्था में जो करेगा सुधार उसी की सरकार

2019-02-17T06:00:50Z

JAMSHEDPUR: शनिवार को बिष्टुपुर प्रधान डाकघर परिसर में दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट ने मिलेनियल्स स्पीक के तहत राजनीटी का आयोजन कराया। मौके पर लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी। चाय की चुस्कियों के साथ सभी ने एजुकेशन सिस्टम कितना बदला और इस बार लोकसभा चुनाव में कितना बड़ा मुद्दा होगा विषय पर अपने विचार रखे। इस विषय पर सभी ने बहस की। सभी प्राथमिक शिक्षा में सुधार तथा बदलाव और इसमें निष्पक्षता लाने और एजुकेशन सिस्टम को आरक्षण से दूर रखने की बाद कही। सरकार को शिक्षकों की बहाली करने में निष्पक्षता बरतने की बात कही। सरकारी कॉलेजों क्वालिटी एजुकेशन की बात कही। युवाओं ने कहा एजुकेशन बदलाव आएगा, तभी देश आगे बढ़ेगा। सरकारी स्कूलों में जो बदहाली की हालत है उसे सरकार जल्द सही नहीं कर पाई, तो आनेवाले वर्ष में देश काफी समस्या होगी। प्राथमिक शिक्षा की स्थिति सुधारने के लिए भारत दुनिया के कई देशों से आर्थिक मदद लेता है, लेकिन वैश्रि्वक मंदी के कारण अगले सालों में इसमें कटौती हो सकती है।

अभी भी हैं शिक्षा से दूर

मिलेनियल्स स्पीक जेनरल इलेक्शन-2019 का मकसद है 18 से 38 साल वोटर्स के नब्ज को टटोलना है। आखिर इस समय क्या सबसे बड़े मुद्दे है और किस तरह की चुनौतियां सामने आ रही है और इसका कैसे समाधान हो, इसपर उनके विचार लेना है। इसमें मिलेनियल्स ने कहा अभी हमारे देश की सबसे ज्यादा जनसंख्या सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है और इन स्कूलों की हालत किसी से छिपी नहीं है। स्कूल में टीचर गायब रहते हैं, जो टीचर पढ़ाते वो भी पढ़ाने के नाम पर खानापूर्ती करते हैं। युवाओं ने कहा कि सरकारी कॉलेज तथा स्कूलों में शिक्षकों की बहाली में आरक्षण हटा दे। मिलेनियल्स ने कहा साक्षरता और शिक्षा के मामले में भारत की गिनती दुनिया के पिछड़े देशों में होती है। अगर हम अपने देश की तुलना आसपास के देशों से करें तो चीन, श्रीलंका, म्यांमार, ईरान से भी हम पीछे हैं। हालांकि, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का वादा संविधान में किया गया है। इसे 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया गया था, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। इसके लिए सरकार के पास धन नहीं था। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर किसी ठोस योजना की शुरुआत नहीं हो सकी। युवाओं ने कहा जब तक हमारा देश साक्षर नहीं होगा तब तक देश आगे नहीं बढ़ेगा

सरकार दे अच्छी शिक्षा

चर्चा के दौरान मिलेनियल्स ने देश में शिक्षा के स्थिति में बाधा का सबसे कारण शिक्षा के निजीकरण को भी माना। इससे सरकारी स्कूलों में देश के बच्चें अच्छी शिक्षा से दूर चले जा रहे हैं। कहा, मुख्यतया प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर मध्यवर्ग का एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा दिलाने के पक्ष में है, इसलिए वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों से निकाल कर प्राइवेट स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। इसमें सबसे बड़ी नाकामी सरकार की है, सरकारी स्कूल में अच्छी एजुकेशन ना होने के कारण ऐसा हो रहा है। अगर सरकार क्वालिटी तथा अच्छा एजुकेशन सरकारी स्कूलों में दे, तो शिक्षा के नाम पर जो व्यापार चल रहा है वो बंद हो जाएगा।

स्कूलों से शिक्षक रहते हैं गायब

मिलेनियल्स ने कहा की सरकारी स्कूलों पढने वाले बच्चों के सर्वागीण विकास के बात करते हैं, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। सरकार द्वारा मीड डे मील जैसी योजनाएं लागू करने से बच्चे स्कूल नहीं आएंगे। बच्चों को स्कूल में शिक्षक उपस्थिति भी मिलनी चाहिए। आज नब्बे प्रतिशत से ज्यादा सार्वजनिक खर्च की राशि भारतीय स्कूलों में अध्यापकों के वेतन और प्रशासन पर ही खर्च होती है। फिर भी विश्व में बिना अनुमति अवकाश लेने वाले अध्यापकों की संख्या भारत में सबसे अधिक है। हमारे स्कूलों में अध्यापक आते ही नहीं हैं और चार में से एक सरकारी स्कूल में रोज कोई न कोई अध्यापक छुट्टी पर होता है।

साक्षरता बढ़ी फिर भी पीछे

मिलेनियल्स ने कहा आज भारत में साक्षरता पहले से कुछ बढ़ी है। अंग्रेजों के शासन के अंत तक होने वाली यानी 1947 में भारत की साक्षरता दर केवल 12 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़ कर 74.04 प्रतिशत हो गई। पहले से छह गुना अधिक, लेकिन विश्व की औसत शिक्षा दर से काफी कम। हालांकि साक्षरता के लिए सरकार काफी सक्रिय रही है। समय-समय पर कई तरह की योजनाएं लाती रही है।

कई स्कूलों में पानी नहीं

बहस के दौरान मिलेनियल्स ने कहा कि हमारे जिले में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जहां बच्चों को पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं कराया गया है। खुले में शौच ना करने की बात तो सरकार करती है, पर देश के ज्यादातर ऐसे सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय की सुविधा नहीं है, हमारे जिले के भी कई स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। शहरों की झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में चलने वाले स्कूलों में शिक्षक या तो नहीं हैं या फिर आते नहीं। इसलिए उन्हें दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है। अगर सरकार एजुकेशन सिस्टम में सुधार नहीं लाती है तो इसका खामियाजा सरकार भुगतना पड़ सकता है।

आज यहां होगा प्रोग्राम

स्थान-जुबिली पार्क मेन गेट, साकची

समय - दोपहर एक बजे

मेरी बात

शिक्षा के क्षेत्र में निजीकरण तथा बाजारीकरण को सरकार को पहले खत्म करना चाहिए। शहरों की झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण इलाकों में चलने वाले स्कूलों में शिक्षक या तो नहीं हैं या फिर आते नहीं। इसलिए उन्हें दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान लगा हुआ है। जिले में शिक्षकों के अटेंडेंस के लिए ई-विद्यावाहिनी एप्प लांच तो की गई, पर इसका फायदा नहीं हुआ, अगर हमें एजुकेशन में बदलाव लाना है, सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारनी है, तो अपने वोट की कीमत पहचानी होगी तथा ऐसी सरकार को चुनना होगा जो इसमें बदलाव लाए,

रोज तिर्की, साकची

कड़क मुद्दा

बिल्कुल एजुकेशन सिस्टम एक बड़ा मुद्दा रहेगा इस बार के चुनाव में। देश के सबसे ज्यादा छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें थर्ड क्लास की शिक्षा मिल रही है। किसी स्कूल में पीने का पानी नहीं है, किसी में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सरकार को एक बार सोचना चाहिए, अगर हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मुहैया करा पाएंगे, तो देश कैसे आगे बढ़ पाएगा। यदि सरकारी स्कूलों की बदहाली कम नहीं हुई, तो लोकसभा चुनाव के पिछले नतीजों में बदलाव लाना होगा।

अभिषेक क्षत्रिय, बिष्टुपुर

हां एजुकेशन सिस्टम में बदलाव एक चुनावी मुद्दा रहेगा। सबसे ज्यादा जनसंख्या सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है, सरकारी स्कूल की हालत किसी से छिपी नहीं है। स्कूल में टीचर गायब रहते हैं, जो टीचर पढ़ाते वो भी पढ़ाने के नाम पर खानापूर्ती कर रहे हैं।

आर स्वर्णलता, परसुडीह

सरकारी कॉलेज तथा स्कूलों में शिक्षकों की बहाली में आरक्षण हटा दे। इससे बच्चों को ज्ञान प्राप्ति में कोई कमी ना आए। एजुकेशन सिस्टम में एडमिशन में आरक्षण को हटा देना चाहिए।

एस संतोष, किताडीह

साक्षरता और शिक्षा के मामले में भारत की गिनती दुनिया के पिछड़े देशों में होती है। अगर हम अपने देश की तुलना आसपास के देशों से करें तो चीन, श्रीलंका, म्यांमार, ईरान से भी पीछे हैं। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर किसी ठोस योजना की शुरुआत नहीं हो सकी। जब तक हमारा देश साक्षर नहीं होगा तब तक देश आगे नहीं बढ़ेगा।

मिथिलेश कुमार तिवारी, आदित्यपुर

प्राथमिक शिक्षा का स्तर काफी खराब है। अगर प्रारंभिक शिक्षा ही ऐसी रहेगी तो आगे की शिक्षा कैसी होगी? हम उसी सरकार को सपोर्ट करेंगे को देश के भविष्य तथा प्रारंभिक शिक्षा में सुधार करे।

विकास कुमार साहु, बागबेड़ा

सरकारी स्कूल में शिक्षा स्तर पर ध्यान देना चाहिए। अभी जमशेदपुर में हाई स्कूल की बात करें, तो एक कक्षा में 82 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। तो आप ही बताए कैसे शिक्षा में सुधार हो पाएगा। कैसे देश के भविष्य को अच्छी शिक्षा मिलेगी। इसके साथ योग्य शिक्षकों की बहाली होनी चाहिए जिससे बच्चों को गुणवत्ता पुर्ण शिक्षा मिल पाए।

शुभम कुमार, जुगसलाई

एक्जाम के बाद कॉपी जांचने की प्रक्रिया सही होनी चाहिए, जिस विषय के टीचर को कॉपी चैक करनी चाहिए वे कॉपी चेक नहीं करते हैं। इससे स्टूडेंट्स को सही मा‌र्क्स नहीं मिल पाते हैं, इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।

निधि कुमारी

सरकारी स्कूलों पढ़ने वाले बच्चों के सर्वागीण विकास के बात करते हैं, पर ऐसा नहीं हो पा रहा है। सिर्फ सरकार द्वारा मीड डे मील जैसी योजनाएं लागू करने से बच्चे स्कूल नहीं आएंगे। बच्चों को स्कूल में शिक्षक उपस्थिति भी मिलनी चाहिए।

अमर तिवारी, जुगसलाई

एजुकेशन सिस्टम में बदलाव होना चाहिए, शिक्षकों कमी के कारण आज बच्चे स्कूल नही जाना चाहते, आज नब्बे प्रतिशत से ज्यादा सार्वजनिक खर्च की राशि भारतीय स्कूलों में अध्यापकों के वेतन और प्रशासन पर ही खर्च होती है। फिर भी विश्व में बिना अनुमति अवकाश लेने वाले अध्यापकों की संख्या भारत में सबसे अधिक है। इस मुद्दे पर सरकार ध्यान देनी चाहिए।

लव कुमार, बारीडीह

यूनीवर्सिटी में पढ़ाई का लेवल काफी डाउन है, टीचर के बहाल होने के बाद उनका बीच बीच में टेस्ट में लेते रहना चाहिए है। जिससे उनकी योग्यता बरकरार रहे, तथा विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके।

कौशल प्रधान, साकची

सरकारी स्कूलों स्टूडेंट्स की बेसिक सुविधाएं भी नही मिल रही है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है। खुले में शौच ना करने की बात तो सरकार करती है, पर देश ज्यादातर ऐसे सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां शौचालय की सुविधा नहीं है, हमारे जिले के भी कई स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नही है। अगर ऐसा रहा तो सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

सरोज पात्रों, कदमा

शिक्षा में निजीकरण को कम होना चाहिए, यह तभी हो सकता जब सरकारी एजुकेशन सिस्टम सही हो, कॉलेजों में किताबों की व्यवस्था होनी चाहिए, जो शहर के कॉलेज के लाइबरेरी में किताब नदारत होते है, सरकारी कॉलेज में भ्रष्टाचार कम होना चाहिए, इसमें जो बदलाव लाएंगे उन्हे वोट करुंगा लोकसभा चुनाव में अपने मत का प्रयोग करुंगा।

कमल अग्रवाल , गोलमुरी


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.