कोचिंग को बनाया सहारा यूनिवर्सिटी को नकारा

2019-09-20T06:00:53Z

- डीडीयूजीयू के बीकॉम स्टूडेंट्स को भा रही है कोचिंग

- यूनिवर्सिटी में टीचर्स होने के बाद भी रेग्युलर क्लास करने में करते आनाकानी

GORAKHPUR: डीडीयूजीयू स्टूडेंट्स को आज भी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई रास नहीं आ रही है। ये हम नहीं कह रहे, यहां की बीकॉम और साइंस क्लासेज में रेग्युलर स्टूडेंट्स की गैरमौजूदगी बयां कर रही है। इसकी वजह ये कि यहां के ज्यादातर स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी की पढ़ाई से ज्यादा कोचिंग में भरोसा दिखा रहे हैं। यूनिवर्सिटी ने भी ऐसे स्टूडेंट्स को प्वॉइंट आउट कर उनके शार्ट हो रहे अटेंडेंस की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है।

बन रही लिस्ट

डीडीयूजीयू के साइंस, कॉमर्स फैकेल्टी के स्टूडेंट्स को यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पर भरोसा कम रहता है। यही वजह है कि कॉमर्स स्टूडेंट्स एकाउंटेंसी, स्टैटेस्टिक समेत अन्य सब्जेक्ट के लिए कोचिंग प्रिफर कर रहे हैं। वहीं साइंस फैकेल्टी के स्टूडेंट्स भी फिजिक्स, कमेस्ट्री व मैथमेटिक्स के लिए कोचिंग ज्वॉइन करना ही बेहतर समझते हैं। इसी का नतीजा है कि एडमिशन के बाद दोनों फैकेल्टीज में जुलाई और अगस्त माह में म्भ्-7भ् प्रतिशत के बीच ही अटेंडेंस रही। वहीं सितंबर में भी इन दोनों फैकेल्टीज में अटेंडेंस शॉर्ट हो गई है। दोनों जगह ब्भ्-भ्भ् प्रतिशत के बीच अटेंडेंस पहुंच गई है। ऐसे में कॉमर्स और साइंस फैकेल्टी के टीचर्स ने भी ऐसे स्टूडेंट्स की अलग लिस्ट बनानी शुरू कर दी है जिन्होंने यूनिवर्सिटी की क्लास छोड़ कोचिंग ज्वॉइन कर ली है। जो स्टूडेंट्स क्लास अटेंड कर रहे हैं उनसे अब्सेंट रहने वाले बैचमेट्स के बारे में जानकारी हासिल कर उनके अब्सेंट होने की वजह तलाशी जा रही है। इस बीच कुछ स्टूडेंट्स ने टीचर्स को फीडबैक दिया है कि गायब रहने वाले स्टूडेंट्स सिविल लाइंस व गैस गोदाम गली स्थित कोचिंग सेंटर्स ज्वाइन कर चुके हैं।

बॉक्स

रिसर्च स्कॉलर्स के भरोसे जियोग्राफी डिपार्टमेंट

वहीं जियोग्राफी डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स की मानें तो जो नए टीचर्स आए हैं वे क्लास लेने के बजाय गायब रहते हैं। उनकी जगह नेट-जेआरएफ क्वालिफाई कर चुके रिसर्च स्कॉलर क्लास ले रहे हैं। इससे कई बार स्टूडेंट्स ने जिम्मेदारों को अवगत भी कराया है लेकिन कोई नहीं सुन रहा।

यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स - क्फ्000

जुलाई व अगस्त में अटेंडेंस प्रतिशत - म्भ्-7भ्

सितंबर (क्-क्भ् तारीख तक)- ब्भ्-भ्भ् प्रतिशत

वर्जन

यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को रेग्युलर क्लास करनी चाहिए। जो कोचिंग पढ़ रहे हैं वे अपने फ्यूचर के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जिनके अटेंडेंस शॉर्ट होंगे उनके डिपार्टमेंट के एचओडी उनकी मार्किग करेंगे। नुकसान बच्चों को ही होगा।

प्रो। प्रदीप कुमार यादव, चीफ प्रॉक्टर, डीडीयूजीयू


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