आमदनी बढ़ने के बावजूद सिटी ट्रांसपोर्ट को घाटा

2018-09-24T06:00:56Z

डीजल के बढ़ते दाम से रोडवेज को लग रहा फटका

2018 के फ‌र्स्ट क्वाटर में हुआ 71.15 लाख का नुकसान

2017 के फ‌र्स्ट क्वाटर में था 30.18 लाख का नुकसान

120 सिटी बसों की अगले साल पूरी हो जाएगी मियाद

Meerut। शहर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले महानगर सिटी ट्रांसपोर्ट की सांसे खुद धीरे-धीरे थमती जा रही हैं। एक तरफ सिटी बसों की हालत अपनी आयु पूरी करने के कारण खस्ता हो चुकी हैं, वही दूसरी तरफ डीजल के लगातार बढ़ते दामों से रोडवेज को घाटा हो रहा है। इससे अलग सिटी ट्रांसपोर्ट की ओर से संचालित की गई योजनाएं पूरी तरफ फ्लॉप साबित हो चुकी हैं जिस कारण से रोडवेज अपने इस घाटे की भरपाई तक नही कर पा रहा है।

दोगुना हो गया घाटा

सिटी ट्रांसपोर्ट ने अप्रैल से जून 2017 के बीच 460.07 लाख रुपये की आय अर्जित की, जबकि 2018 में अप्रैल से जून के मध्य 467 लाख रुपये की आय अर्जित की गई। इस साल रोडवेज को करीब सात लाख रुपए का अतिरिक्त इजाफा हुआ, लेकिन 2017 के फ‌र्स्ट क्वाटर में सिटी ट्रांसपोर्ट को लागत के मुकाबले 30.18 लाख रुपये और 2018 के फ‌र्स्ट क्वाटर में लागत के मुकाबले 71.15 लाख की हानि हुई। रोडवेज के अधिकारियों की मानें तो डीजल के दाम में लगातार वृद्धि है। दाम लगातार बढ़ रहे हैं। जबकि किराया स्थिर है। ऐसे में रोडवेज की प्रति बस आय भी घटी है।

योजनाएं भी पड़ रही भारी

महानगर बस सेवा ने इस वर्ष हैरिटेज बस सेवा और इस साल एसी बस सेवा की शुरुआत की थी, लेकिन हैरिटेज बस सेवा यात्रियों की कमी के कारण शुरुआत में बंद हो गई। जबकि एसी बस सेवा महज शहर के बाहर संचालित हो रही है, जिसके यात्रियो की संख्या भी गिनी चुनी हैं। वहीं करीब पांच साल पहले शुरु की गई महिला बस सेवा भी घाटे में चल रही है इस बस का भी संचालन नुकसान में किया जा रहा है।

कमाई से ज्यादा खर्चा

महानगर सिटी बसों में से करीब 120 बसें अगले साल अपनी आयु पूरी कर रही हैं। इन बसों की हालत इस कदर खस्ता हो चुकी है कि बसें कमाई से ज्यादा अपनी सर्विस में खर्च करा रही हैं। नई बसों के आने तक बसों का संचालन करना रोडवेज की मजबूरी है इसलिए नुकसान के बाद भी रोडवेज बसों का संचालन कर रहा है।

नई बसों से होगा लाभ

रोडवेज के एमडी विजय निगम ने बताया कि डीजल के लगातार बढ़ते दाम सिटी बसों की आय को प्रभावित कर रहा है। हम घाटे को पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं। नई बसों के आने पर कुछ लाभ मिलेगा।


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