पिस्टल सटाने और मारपीट करने का मामला रिसर्च स्कॉलर की फिर बिगड़ी हालत

2018-09-25T11:38:08Z

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में फिलॉस्फी डिपार्टमेंट का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है

- आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज में कराया गया भर्ती

- छात्रों ने कार्रवाई को लेकर किया प्रदर्शन

- हॉस्टलर्स ने भी देर शाम पिस्टल सटाने और मारपीट करने वालों के खिलाफ की कार्रवाई की मांग

Gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR: गोरखपुर यूनिवर्सिटी में फिलॉस्फी डिपार्टमेंट का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है. एक तरफ जहां बाहरी लोगों को राजनीति का मौका मिल गया है, तो वहीं दूसरी ओर इसमें अब गुटबाजी भी बढ़ गई है. हालत यह है कि यूनिवर्सिटी में इस मामले को लेकर धरना और प्रदर्शन का दौर भी शुरू हो चुका है. इन सबके बीच रिसर्च स्कॉलर दीपक कुमार की हालत फिर बिगड़ गई. पेट में जलन और शरीर में अकड़कन की शिकायत के बाद उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया.

जोरदार प्रदर्शन कर कार्रवाई की मांग
सोमवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी गेट पर बड़ी तादाद में लोगों ने प्रदर्शन किया. दीपक कुमार की ओर से की गई शिकायत के लिए जिम्मेदार दोनों प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पूर्व छात्र नेताओं के साथ और वर्तमान छात्र नेता भी शामिल हुए. इस प्रदर्शन में कुछ बाहरी सामाजिक संस्थाओं ने भी हिस्सा लिया. सुबह दस बजे यूनिवर्सिटी गेट पर पहुंचे स्टूडेंट्स ने खूब नारेबाजी की और दोनों प्रोफेसर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मंाग की. उन्होंने मांग रखी कि जांच समिति में यूनिवर्सिटी के अलावा बाहरी लोगों को भी शामिल किया जाए.

बाहरी न करें हस्तक्षेप - शिक्षक संघ
इस मामले में शिक्षक संघ की एक मीटिंग मजीठिया भवन में ऑर्गनाइज की गई. इसमें प्रकरण पर विस्तार से चर्चा की गई. कार्यकारिणी ने सीएम को शिक्षक संघ अध्यक्ष की ओर से सौंपे गए ज्ञापन की प्रशंसा की और उच्च स्तरीय जांच कंप्लीट होने तक कोई भी कार्रवाई न होने की बात का सपोर्ट किया. साथ ही शिक्षक संघ ने वीसी के सामने यह मांग रखने की भी बात पर मुहर लगाई कि बाहरी लोगों को यूनिवर्सिटी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के लिए एक लेटर लिखने की बात रखी. साथ ही उन्होंने प्रो. द्वारका नाथ को तत्काल अध्यक्ष पद पर बहाल करने की भी मांग की.

दीपक ने भेजा लेटर
इस बीच दीपक कुमार ने यूनिवर्सिटी को एक लेटर भेजा है, जिसमें उसने कुछ बातों की ओर ध्यान दिलाया है. इसमें उसने लिखा है कि 'मैं विश्वविद्यालय का एक जिम्मेदार शोध छात्र हूं. मैं स्वस्थ्य होकर पढ़ना चाहता हूं और मेरा उत्पीड़न करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद करता हूं. भविष्य में मेरे साथ या मेरे विभाग के किसी अन्य छात्र के साथ उत्पीड़न न किया जाए. इसलिए मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरी इस स्थिति को लेकर कोई भी विद्यार्थी, संगठन या कोई राजनीति या सामाजिक दल आंदोलन और तोड़फोड़ करता है, तो मैं अपने को इससे अलग करता हूं. इसकी मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी. मेरी इस स्थिति के लिए मेरे शोध निर्देशक की कोई भूमिका नहीं है.

 

कार्रवाई की मांग को लेकर मिले हॉस्टलर्स
उधर, रविवार की देर रात विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का न्यौता देने गए कुछ बाहरी तत्वों ने हॉस्टल में रहने वाले एक स्टूडेंट को पीट दिया था. इससे नाराज स्टूडेंट्स सोमवार को वीसी प्रो. वीके सिंह से मिलने पहुंचे. इस दौरान उन्होंने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में सिक्योरिटी बढ़ाने की मांग की साथ ही जो भी इस घटना में शामिल थे, उनको यूनिवर्सिटी से निष्कासित कर गिरफ्तार करवाने की मांग की रखी. वीसी ने तत्काल ही एसपी से बात कर मारपीट करने वालों को गिरफ्तार करने और उन्होंने हॉस्टल की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फोर्स बढ़ाने के लिए भी कहा. उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि चीफ प्रॉक्टर छुट्टी पर हैं, उनके आने के बाद इस मामले में जो भी विश्वविद्यालय का छात्र जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.


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