95 का बजट 46 करोड़ का प्रस्ताव विकास के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा

2019-01-24T06:00:35Z

- अधर में वार्डो का विकास कार्य, बेनतीजा रही अधिकारियों की बैठक

-118 प्रस्तावों पर नगर निगम प्रशासन ने लगाई है मुहर, 22 हुए खारिज

GORAKHPUR: पार्षदों की मांग, कई बार प्रदर्शन के बाद हर वार्ड के विकास कार्य के लिए मांगे गए 2-2 प्रस्ताव भी अधर में लटक गए हैं। निगम के पास पर्याप्त बजट का अभाव विकास कार्यो में रोड़ा बन सकता है। निगम के 70 वार्डो से 140 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं जिनमें से 118 को जांच के बाद स्वीकृति मिल गई है। सभी कार्यो को पूरा कराने के लिए निगम को 46 करोड़ रुपए का बजट चाहिए लेकिन निगम के पास 14वें वित्त व अवस्थापना निधि को मिलाकर कुल 9.5 करोड़ रुपए ही हैं। बजट की समस्या को लेकर डीएम व नगर आयुक्त के विजयेंद्र पांडियन ने निगम अधिकारियों के साथ मीटिंग की थी लेकिन काफी कोशिश के बाद भी बजट की कमी को दूर करने का कोई रास्ता अधिकारी नहीं खोज पाए। दूसरी ओर, मार्च के पहले सप्ताह में लोक सभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो जाएगी, जिसके बाद से नए टेंडर भी नहीं हो पाएंगे। ऐसे में वार्डो में विकास कार्य कराने की पार्षदों की मंशा पर एक बार फिर पानी फिर सकता है।

20 प्रतिशत ही हो सकते हैं कार्य

सड़क निर्माण, पथ प्रकाश व पेयजल से जुड़े कार्यो को पूरा करने के लिए निगम ने 118 प्रस्तावों को हरी झंडी दिखा दी है जबकि 22 प्रस्ताव खारिज किए गए हैं। 70 वार्डो के 118 प्रस्ताव कार्यो को पूरा कराने के लिए निगम को 46 करोड़ खर्च करने होंगे लेकिन निगम के पास 9.5 करोड़ का बजट ही है जिससे केवल 20 प्रतिशत काम ही कराए जा सकते हैं। अगर निगम ने उपलब्ध बजट से ही विकास कार्य कराना शुरू किया तो ज्यादातर वार्डो को निराशा ही हाथ लगेगी। प्रस्तावों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी ने 22 प्रस्तावों को निरस्त कर दिया है।

ठंडे बस्ते में पार्षद वरीयता

बोर्ड की शुरुआती बैठकों में ही पार्षद वरीयता के जरिए प्रत्येक वार्ड में 25-25 लाख का विकास कार्य कराया जाना था। बजट का बहाना करते-करते एक साल बीत गया लेकिन कोई कार्य नहीं कराया जा सका। जिससे पार्षदों में काफी निराशा थी। इससे पहले सभी वार्डो से 187 करोड़ रुपए का प्रस्ताव नगर निगम द्वारा शासन को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव भेजे हुए साल बीतने को है लेकिन अभी तक शासन की सहमति नहीं प्राप्त हुई है। दो बार निराशा मिलने के बाद अगर इस बार भी काम नहीं हुआ तो यह पार्षदों के लिए एक झटका होगा।

वर्जन

पार्षदों से जो प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं उनको पूरा करने में 46 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जबकि निगम के पास उपलब्ध बजट सिर्फ 9.5 करोड़ है। बजट को लेकर बैठक की गई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

- सुरेश चंद, चीफ इंजीनियर

Posted By: Inextlive

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