महज चार घंटे ही ओपीडी में रहते हैं डॉक्टर साहब

2019-12-11T05:45:23Z

- सुबह से आकर इंतजार करते हैं मरीज, मनमानी पर उतारू हैं बेली हॉस्पिटल के डॉक्टर

PRAYAGRAJ: पेशेंट सुबह से आकर लाइन में लग जाते हैं, लेकिन डॉक्टर्स का पता नहीं रहता। इंतजार करते-करते दो घंटे बीत जाते हैं। तब कही जाकर डॉक्टर की ओपीडी शुरू होती है। यह कहानी बेली हॉस्पिटल की है। जहां पर मनमानी पर उतारू डॉक्टर्स ओपीडी में मरीजों को पूरा समय नहीं दे रहे हैं। उनकी इस हरकत से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर कोई सवाल पूछे तो जवाब मिलता है कि राउंड पर हैं डॉक्टर साहब। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने मंगलवार सुबह हास्पिटल का रियलिटी चेक किया तो हकीकत सामने आ गई।

सीन नंबर वन

दस बजे तक आंएगे डॉक्टर

सुबह 9:17 मिनट पर रिपोर्टर ईएनटी की ओपीडी में पहुंचा तो पता चला कि डॉक्टर साहब को आने में थोड़ा समय लगेगा। मौके पर मौजूद वार्ड ब्वाय ने कहा कि पर्चा जमा कराकर बाहर बैठ जाइए। जब डॉक्टर आएं तो इसके बाद ही देखेंगे। सोरांव से आई दीपिका ने कहा कि वह भी एक घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रही है।

सीन नंबर दो

कोई बताने वाला भी मौजूद नही

सुबह 9:20 बजे रिपोर्टर बगल में मौजूद पीडियाट्रिक ओपीडी में पहुंचा। यहां पर भी डॉक्टर नदारद थे। पता चली की ओपीडी डॉ। प्रशांत पांडेय की है। वह भी 9:30 बजे के बाद ही बैठेंगे। हालांकि यह बात पब्लिक ने बतायी। यह जानकारी देने के लिए कोई अधिकृत कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था।

सीन नंबर तीन

यहां भी निराश हुए पेशेंट

पीडियाट्रिक ओपीडी के बगल मौजूद वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ यूपी पांडेय के रूम के बाहर भी काफी मरीज थे। लेकिन उन्हे भी निराशा हाथ लगी। डॉक्टर यहां भी सुबह 9:25 बजे तक नही आए थे। बेली गांव से आई रेनू ने बताया कि उन्हें अपने बच्चे दिखाना है और तीसरा नंबर लगा है। जल्दी आने का कोई फायदा नहीं हुआ।

सीन नंबर चार

थोड़ी देर बाद आइए, अभी डॉक्टर नही है

नई बिल्डिंग में स्थित सीनियर कंसल्टेंट जी सिंह की ओपीडी का दरवाजा तो खुला था, लेकिन अंदर डॉक्टर मौजूद नही थे। सुबह 9:30 बजे रिपोर्टर ने अटेंडेंट से पूछा तो उसने कहा कि पर्चा जमा कर दीजिए। आधे घंटे बाद ही डॉक्टर मिलेंगे। इसके बाद रिपोर्टर के अगले सवाल का उसने जवाब देना जरूरी नही समझा

सीन नंबर पांच

एक घंटे से बैठी थी महिलाएं

फीमेल ओपीडी में डॉ। भावना शर्मा का कमरा खुला था, लेकिन वह नही थी। सुबह 9:35 बजे तक उनके कमरे में महज एक महिला अटेंडेंट नजर आ रही थी। जब उसने कैमरा देखा तो वह भी फ्रेम से बाहर हो गई। महिलाओं ने बताया कि वह पिछले एक घंटे से डॉक्टर के आने का इंतजार कर रही हैं।

केवल चार घंटे की ओपीडी

अक्सर डॉक्टर्स ब्लेम करते हैं कि उनकी ओपीडी में डेढ़ से दो सौ मरीज आते हैं। इससे उन पर वर्क लोड बढ़ जाता है। लेकिन सच तो यह है कि वह सुबह आठ बजे के बजाय दस बजे से ओपीडी में आते हैं। बाकी समय राउंड के नाम बीत जाता है। अधिक पूछताछ पर जवाब भी नही मिलता। अगर डॉक्टर्स नौ बजे से भी ओपीडी अटेंड करे तो इससे मरीजों को काफी सहूलियत मिल सकती है। जबकि मरीज सुबह 8:30 से हॉस्पिटल पहुंच जाते हैं।

राउंड पर निकली सीएमएस ने देखी सच्चाई

मंगलवार सुबह खुद सीएमएस डॉ। सुषमा श्रीवास्तव 9:30 बजे राउंड पर निकली थीं। उन्होंने देखा कि तमाम ओपीडी खाली पड़ी है। यह देखकर उन्हें निराशा हाथ लगी। उन्होंने कोर्ट एविडेंस सहित अन्य ड्यूटी पर गए डॉक्टर्स को छोड़कर अन्य को जल्द से ओपीडी में पहुचंने को कहा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर्स को समय से ओपीडी में बैठने की हिदायत पूर्व दी है।

राउंड करने में जितना समय लगता है उसके बाद डॉक्टर्स को ओपीडी पहुंच जाना चाहिए। जो डॉक्टर्स समय से ओपीडी नही आते उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनको पहले ही समय पर पहुंचने की हिदायत दी जा चुकी है।

डॉ। सुषमा श्रीवास्तव, सीएमएस, बेली हॉस्पिटल

Posted By: Inextlive

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