अमेरिकी हिरासत केंद्रों में बीमारी और भूख से जूझ रहे शरणार्थी ट्रंप प्रशासन ने रिपोर्ट को नाकारा

2019-07-08T15:50:13Z

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि अमेरिकी हिरासत केंद्रों में क्षमता से ज्यादा संख्या में रखे गए शरणार्थी और उनके बच्चे भूख और बीमारियों से जूझ रहे हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि भोजन और पानी की कोई कमी नहीं है।

कानपुर। अमेरिका में अवैध रूप से दाखिल होने वाले शरणार्थियों के लिए मेक्सिको से लगी सीमा पर बनाए गए हिरासत केंद्रों की बदतर स्थिति सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि इन हिरासत केंद्रों में क्षमता से अधिक संख्या में रखे गए शरणार्थी और उनके बच्चे भूख और बीमारियों से जूझ रहे हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने इस दावा को नकार दिया है। उन्होंने कहा है कि हिरासत केंद्र सुरक्षित हैं और वहां भोजन व पानी की कमी नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार और अल पासो टाइम्स ने रविवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि टेक्सास के क्लिंट इलाके में बने हिरासत केंद्र में बच्चों को रोते-चिल्लाते पाया गया। कई बच्चे चिकनपॉक्स और खुजली से पीड़ित थे। इन बच्चों के कपड़े भी गंदे पाए गए। इसके अलावा वहां चिकित्सा देखभाल की कमी भी पाई गई।

हिरासत केंद्रों का लिया जायजा
अमेरिका के कार्यवाहक गृह सुरक्षा मंत्री केविन के मैकलेनन और अमेरिकी नागरिकता व आव्रजन सेवा के निदेशक केनेथ टी क्यूकेनली ने इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताते हुए ख़ारिज कर दिया है। मैकलेनन ने कहा, 'मैं यह कह सकता हूं कि वहां भोजन और पानी की कमी नहीं।  हालांकि मैं इस बात से इनकार भी नहीं कर रहा कि सीमा पर चुनौतीपूर्ण हालात हैं।' वहीं क्यूकेनली ने भी इस बात को स्वीकार किया कि अमेरिका की दक्षिणी-पश्चिमी सीमा पर शरण मांगने आ रहे शरणार्थियों की बढ़ती संख्या के कारण सरकारी व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने खुद कई हिरासत केंद्रों का जायजा लिया और उन्हें सुरक्षित पाया। उनका संचालन भी ठीक से हो रहा है।'

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पकड़े गए कई शरणार्थी

अमेरिका के सीमा अधिकारियों ने इस साल अब तक मेक्सिको से लगती दक्षिणी सीमा पर करीब छह लाख 64 हजार शरणार्थी पकड़े हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 144 फीसद ज्यादा है। बॉर्डर पेट्रोल विभाग के अनुसार, 2018 में सीमा पर 283 शरणार्थियों की मौत हुई थी। कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि यह संख्या कम बताई गई।



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