खुलते ही बंद हो जाती है दून हॉस्पिटल की लैब

2019-07-04T06:00:19Z

- दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की पैथोलॉजी लैब में 8 बजे से 11.30 बजे तक ही लिए जा रहे सैंपल

देहरादून,

दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की पैथोलॉजी लैब में सिर्फ साढ़े 3 घंटे ही सैंपल लिए जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार लैब को 24 घंटे ओपन रहना चाहिए। ऐसे में कुछ ही मरीजों को सरकारी जांचों का लाभ मिल रहा है और उन्हें दिक्कत हो रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है। क्योंिक अक्सर जब इमरजेंसी केसेज पहुंचते हैं, तो लैब बंद होती है। मरीज को बाहर से महंगी जांच करानी पड़ती है। दून हॉस्पिटल मैनेजमेंट कई बार 24 घंटे लैब फैसिलिटी देने का दावा तो कर चुका है, लेकिन यह धरातल पर नहीं उतरा।

कर्मचारियों की कमी का बहाना

दून हॉस्पिटल मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं लगातार लड़खड़ाती जा रही हैं। हाॉस्पिटल मैनेजमेंट बेहतरी के दावे तो कर रहा है लेकिन व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही। अव्यवस्थाओं के लिए कर्मचारियों की कमी को बहाना बनाया जा रहा है। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 24 घंटे लैब फैसिलिटी मिलनी चाहिए, लेकिन दून हॉस्पिटल में सिर्फ साढ़े 3 घंटे ही मरीजों के सैंपल लिए जा रहे हैं। लैब सुबह 8 बजे से 11.30 बजे तक ही खुलती है। इसके बाद सैंपल नहीं लिए जाते। लैब बंद होने के बाद अगर इमरजेंसी केस आ जाए तो मरीज की जांच के लिए प्राइवेट लैब का रुख करना काफी महंगा पड़ता है। दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ। आशुतोष सयाना ने बताया कि इस समस्या का समाधान कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद ही सम्भव है, जिसके लिए कई बार शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। दून हॉस्पिटल की पैथोलॉजी 1 चौथाई कर्मचारियों के भरोसे चल रही है।

हेपेटाइटिस-सी की जांच आज से शुरू

दून हॉस्पिटल में करीब 6 माह बाद हेपेटाइटिस-सी की जांच आज से शुरू होने जा रही है। हॉस्पिटल मैनेजमेंट की गलती की वजह से कुछ दिनों पहले एचसीवी ट्राइडॉट कार्ड टेस्ट की किट की जगह रैपिड टेस्ट की किट भेज दी गई थी इसे वापस कर एचसीवी ट्राइडॉट कार्ड टेस्ट मंगा लिए गए हैं। एचसीवी की जांच दून हॉस्पिटल में मात्र 50 रुपए में होगी, जबकि प्राइवेट लैब में 900 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। बीते 19 जून से दून हॉस्पिटल में हेपेटाइटिस बी की जांच शुरू हो पाई थी। हेपेटाइटिस की जांच इन्फेक्शन होने और ऑपरेशन से पहले कराना अनिवार्य होता है। अभी भी 10 से ज्यादा जरूरी जांचों के लिए 1 हफ्ते का इंतजार करना पड़ सकता है। जिसमें वीडीआरएल, विडाल, टाइफी डॉट, सीआरपी, आरएएफ प्रमुख हैं।


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