स्मारक घोटाले में ठेकेदार इंजीनियर्स के ठिकानों पर ईडी का छापा

2019-02-01T06:01:11Z

- ईडी ने राजधानी में सात ठिकानों को खंगाला

- विजिलेंस भी कर रही है स्मारक घोटाले की जांच

- देर रात तक दो ठिकानों पर जारी थी छापेमारी

LUCKNOW :सपा सरकार में हुए खनन घोटाले में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद गुरुवार को इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) ने पूर्ववर्ती बसपा सरकार में अंजाम दिए गये 14 अरब रुपये के स्मारक घोटाले में भी सात जगहों पर छापेमारी की। ईडी की इस कार्रवाई की जद में राजकीय निर्माण निगम के इंजीनियर, मार्बल सप्लायर और ठेकेदार आए हैं। राजधानी के गोमतीनगर, अलीगंज, कैसरबाग इलाके में सात जगह हुई इस छापेमारी में स्मारक घोटाले से जुडे़ तमाम संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई निर्माण निगम के दो इंजीनियर एसपी गुप्ता व सुरेंद्र कुमार के अलावा स्मारकों के निर्माण का ठेका लेने वाली फर्म ए। कंस्ट्रक्शन के निगम बंधुओं और एक मार्बल सप्लायर के गोमतीनगर स्थित आवास और दफ्तर पर हुई है। देर रात तक दो ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई जारी थी।

आपसी मिलीभगत के मिले सबूत

दरअसल ईडी की जांच में सामने आया कि इंजीनियरों के साथ मिलीभगत कर मार्बल सप्लायर और ठेकेदारों ने ऊंचे दामों पर एक ही तरह के पत्थर को तीन अलग-अलग दामों पर बेचा। इसे 1890, 1190 व 1050 रुपये प्रति क्यूबिक फिट के दाम पर बेचा गया जिससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, निर्माण निगम के इंजीनियर्स ने अपने रिश्तेदारों को ही पत्थरों की सप्लाई का काम सौंप दिया। पत्थरों को मिर्जापुर से राजस्थान ले जाया गया ताकि वहां उन्हें तराशा जा सके। इससे उनकी लागत कई गुना बढ़ गयी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमों को धता बताते हुए पत्थरों का खनन करने के लिए कंसोर्टियम बनाकर लीज दी जाती रही। इंजीनियरों और ठेकेदारों ने घोटाले की काली कमाई का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने और विदेश घूमने में भी किया। सूत्रों की मानें तो इसमें अहम भूमिका निभाने वाले निर्माण निगम के तत्कालीन प्रोजेक्ट मैनेजर की संलिप्तता थी। इसके बाद ईडी ने उनके ठिकानों पर छापे मारने का फैसला लिया।

नेता और शासन के अफसर निशाने पर

दरअसल ईडी ने यह छापेमारी इंजीनियरों पर शिकंजा कसने के लिए की है ताकि इसके जरिए घोटाले के असली आरोपी नेताओं और शासन के अफसरों तक पहुंचा जा सके। ईडी की जांच की जद में तत्कालीन कैबिनेट द्वारा लिए गये फैसले भी है। साथ ही जिन नेताओं और अफसरों की सिफारिश पर पत्थरों के खनन का काम दिया गया, उसकी गहन पड़ताल की जा रही है। ईडी को अंदेशा है कि खनन पट्टे आवंटित करने में सबसे बड़ा घोटाला अंजाम दिया गया था।

विजिलेंस भी कर रही जांच

मालूम हो कि स्मारक घोटाले की जांच यूपी पुलिस की विजिलेंस भी कर रही है। विजिलेंस ने विगत एक जनवरी, 2014 को राजधानी के गोमतीनगर थाने में तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा समेत 199 लोगों को आरोपी बनाकर एफआईआर करायी थी। साथ ही जांच तेजी से करने के लिए एसआईटी भी बनाई जिसके बाद दो मामलों में जांच पूरी कर शासन से आरोपितों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी थी।

इनके खिलाफ मांगी थी अभियोजन स्वीकृति

तत्कालीन खनन निदेशक रामबोध मौर्या, संयुक्त निदेशक सुहेल अहमद फारुकी, निर्माण निगम के सीपी सिंह, राकेश चंद्रा, केआर सिंह, राजीव गर्ग, एके सक्सेना, एसके त्यागी, कृष्ण कुमार, एस। कुमार, पीके शर्मा, एसएस तरकर, बीके सिंह, एके गौतम, बीडी त्रिपाठी, एके सक्सेना, एसपी गुप्ता, एसके चौबे, हीरालाल, एसके शुक्ला, एसएस अहमद, राजीव शर्मा, एए रिजवी, पीके जैन, राजेश चौधरी, एसके अग्रवाल, आरके सिंह, केके कुंद्रा, कामेश्वर शर्मा, राजीव गर्ग, मुकेश कुमार, एसपी सिंह, मुरली मनोहर सक्सेना, एसके वर्मा के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी थी।

फैक्ट फाइल

- 2007 से 2012 के बीच नोएडा, लखनऊ में स्मारक और पार्को का हुआ निर्माण

- 2013 में सपा सरकार ने कराई लोकायुक्त से जांच, लोकायुक्त ने दी रिपोर्ट

- 14 अरब रुपये का घोटाला होने का लोकायुक्त संगठन ने रिपोर्ट में किया दावा

- 199 मिले दोषी, दो पूर्व मंत्री, खनन, निर्माण निगम, पीडब्ल्यूडी के अफसर शामिल

- 01 जनवरी 2014 को विजिलेंस ने गोमतीनगर थाने में दर्ज कराया घोटाले का मुकदमा

- 07 ठिकानों पर ईडी की टीमों ने गुरुवार को मारे छापे, तमाम दस्तावेज कब्जे में लिए


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