नेपाली हाथियों ने पकड़ी वापसी की राह

2019-07-11T11:00:30Z

-शहर के करीब आने पर हरकत में आए थे वन विभाग के अधिकारी

-बहेड़ी का रुख किया, वहां से पीलीभीत के जंगल भेजा जा सकेगा

बरेली : जिले में दो लोगों की जान ले चुके नेपाली हाथियों को बेहोश किए जाने की योजना टाल दी गई। वजह यह है कि अब वे दोनों उस रास्ते पर वापस जा रहे हैं, जिधर से आए थे।

दोनों हाथी बीते सोमवार को शहर से करीब पंद्रह किमी दूर स्थित बंद रबर फैक्ट्री तक आ गए थे। तब मंगलवार को दोनों को बेहोश करने की योजना बनी मगर, बारिश होने लगी। दूसरी ओर, हाथी भी रबर फैक्ट्री परिसर से निकलकर मंसूरगंज गांव पहुंच गए, उधर से ही दोनों रबर फैक्ट्री तक आए थे। खेतों में खड़े हाथियों के चारों ओर दूर तक पानी भरा था, इसलिए ट्रैंक्यूलाइज किए जाने की योजना को टाल दिया गया था। मंगलवार रात हाथी मंसूरगंज से सात किमी दूर दिनरा मिर्जापुर गांव के खेतों में पहुंच गए। पानी भरे खेतों में टहलते रहे। यह वही गांव है, जहां हाथी सात जुलाई को थे।

वापसी का रास्ता पकड़ लिया, अब इंतजार करेंगे

झांसी के मुख्य वन संरक्षक एवं अभियान के नोडल अधिकारी पीपी सिंह ने बताया कि दोनों हाथी अब उसी रास्ते वापस जा रहे, जिससे आए थे। वे शहर से दूर जा रहे। अब बेहोश करने की योजना स्थगित कर दोनों को बहेड़ी तक उसी रास्ते पर हांककर ले जाएंगे, जिधर से आए थे। वहां से सटे पीलीभीत बॉर्डर के जंगलों तक दोनों हाथियों को पहुंचाने की कोशिश है।

यह है पूरा मामला

नेपाल से रास्ता भटक कर दो हाथी पीलीभीत, उत्तराखंड के रास्ते बहेड़ी क्षेत्र में घुस आए थे। 27 जून को हाथियों ने भट्टी गांव में किसान लाखन सिंह को कुचलकर मार डाला था। वहीं, तीन जुलाई को शीशगढ़ के तिकड़ी गांव में वन रक्षक हेमंत कुमार को पटककर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद से बिगड़ैल हाथियों ने यहां डेरा जमा रखा था। सोमवार को दोनों नेपाली हाथी शंखा नदी पार कर शहर के करीब पहुंच गए थे। तब वन विभाग ने दुधवा से चार प्रशिक्षित हाथी मंगवाकर उन्हें ट्रैंक्यूलाइज करने की रणनीति बनाई थी।


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