आठ जिलों के अफसर मिलकर न भगा पाए दो हिंसक हाथी

2019-07-05T06:01:00Z

ऐसे चला ऑपरेशन

- 25 किमी का सफर तय कर हाथी बहेड़ी से मीरगंज आए

- 04 बजे सुबह परचई गांव के खेत में देखे गए

- 08 जिलों के अफसरों ने शुरू किया ऑपरेशन

- 01 अधिकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ का भी बरेली आया

- 07 बजे शाम को हाथियों को शेरगढ़ की ओर भगाया गया

- 06 से ज्यादा लोग ऑपरेशन के दौरान भगदड़ में घायल

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फ्लैग : पिछले आठ दिनों से नेपाल से आए हाथियों ने मचा रखा है उत्पात, अब तक ले चुके हैं तीन लोगों की जान

- मीरगंज के परचई पहुंचे हाथियों ने लोगों को दौड़ाया, भगदड़ में कई ग्रामीण हुए घायल

- वन विभाग ने शाम को शेरगढ़ की ओर खदेड़ा, रात में हाथियों ने फिर परचई में जमाया डेरा

मीरगंज। बहेड़ी तहसील में शेरगढ़ के तिगड़ी गांव में वन रक्षक को मार डालने के बाद दोनों जंगली हाथी थर्सडे को मीरगंज तहसील के परचई गांव पहुंचे। गांव के पास जंगल में आए इन दोनों हाथियों को देखकर वहां दहशत फैल गई। मंदिरों और मस्जिदों से अनाउंसमेंट कर ग्रामीणों को जंगल और खेतों में न जाने की हिदायत दी गई। इसके बाद भी लोग नहीं माने और तमाशा देखने के लिए जमा हो गए। लोगों को देखकर हाथी भड़क गए और भीड़ को दौड़ा लिया। भगदड़ में कई लोग गिरने से चोटिल हो गए। सूचना मिलने पर पुलिस और आठ जिलों के वन विभाग के अफसर भी गांव पहुंचे। मिर्ची का धुंआ और धमाके कर करीब 12 घंटे बाद शाम को हाथियों को शेरगढ़ की ओर भगा दिया गया। वन विभाग की मेहनत पर तब पानी फिर गया, जब रात में हाथियों ने वापस परचई में अपना डेरा जमा लिया। इस पर वन विभाग ने ग्रामीणों को खेतों की ओर न जाने की हिदायत दी है। आठ दिनों के दौरान हाथी वन रक्षक समेत तीन लोगों की जान ले चुके हैं।

तिगड़ी से पहुंचे गोकुलपुर

तिगड़ी में उत्पात मचाने के बाद वेडनेसडे रात दोनों हाथी गोकलपुर में हरीश गंगवार के बगीचे में पहुंचे थे। सूचना मिलने पर ग्रामीण घरों की छत पर चढ़ गए। उनकी पूरी रात जाग कर कटी। हालांकि हाथी गांव के अंदर नहीं आये और जंगल होते हुए रास और फिर औरांगबाद पहुंच गए।

हाथी तड़के पहुंचे परचई

इसके बाद वे थर्सडे सुबह परचई गांव आ गए। सुबह करीब चार बजे खेत में कूड़ा फेंकने गई कृष्णा देवी की नजर खेत में खड़े दो हाथियों पर पड़ी। उन्हें देखकर हाथियों ने चिंघाड़ना शुरू कर दिया। इससे डरकर वह बेहोश हो गईं। इसके बाद गांव के ही इदरीश को दोनों हाथी नहर के पास ¨सधौली वाले लाला के बाग में नजर आए। इसके बाद ग्रामीणों से सूचना पाकर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई।

परचई में मचाया उत्पात

इलाके को घेरकर टीम ने ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की हिदायत दी। इसके बावजूद गांव के तीन बच्चे इकबाल, फरमान, अरमान और अन्य ग्रामीण हाथियों को देखने उनके पास पहुंच गए। उन्हें देखते ही हाथी उग्र हो गए और सभी को दौड़ा लिया। इन्हें बचाने के लिए वन विभाग की टीम ने कई राउंड फायर किए, जिसके बाद हाथियों ने ग्रामीणों का पीछा करना बंद किया। भगदड़ में कई लोग घायल हो गए।

मिर्ची के धुंए से हाथियों को भगाया

इसके बाद टीम ने मिर्च का धुंआ कर हाथियों को भगाना शुरू किया। शाम करीब 6 बजकर 55 मिनट पर हाथी परचई से शेरगढ़ लौट गए। तब जाकर गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।

बॉक्स : डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अफसर भी पहुंचे

हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग ने व‌र्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर से भी मदद मांगी है। थसर्ड को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारी रोहित रवि भी बरेली पहुंचे। उन्होंने हाथियों को पीलीभीत के जंगल की ओर भगाने की योजना तैयार की है। हाथियों को काबू करने के लिए गोंडा से मुख्य वन संरक्षक संजय बनर्जी, लखनऊ से डीएफओ संजय श्रीवास्तव, रामपुर से डीएफओ अखिलेश कश्यप, झांसी से सुरेश यादव, लखीमपुर से डीएफओ अनिल पटेल और मथुरा के अफसर भी बरेली पहुंचे हैं।

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बॉक्स : हत्या पर जानवरों को भी मिलती है उम्रकैद

जघन्य अपराधों में दोषी पाए जाने पर बदमाशों को उम्रकैद की सजा मिलने के कई मामले आपने पढ़े और सुने होंगे, लेकिन किसी जानवर को उम्रकैद की खबर शायद ही सुरी होगी। यह बात आपको जरूर अजीब लग सकती है, लेकिन यह सच है। जून 2018 में गुजरात के गिर नेशनल पार्क के तीन शेरों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। हमले में तीन लोगों की मौत के बाद की गई जांच में इन तीन शेरों को आदमखोर होने का दोषी को पाया गया था। इसके बाद इन्हें हमेशा के लिए चिडि़याघर के पिंजरे में बंद कर दिया गया।

- डीएफओ भरत लाल के मुताबिक, अगर कोई जानवर आदमखोर या फिर इंसानों पर हमला करना उसकी आदत में शामिल हो जाता है तो उसे उम्र कैद की सजा देकर उसे उम्र भर के लिए चिडि़याघर भेज दिया जाता है।

- डीएफओ का कहना है कि बरेली आए हाथी जानबूझकर इंसानों पर हमला नहीं कर रहे हैं। उनकी जद में आने वालों पर ही वे हमला कर रहे है। अगर हाथी रिहायशी इलाकों में घुसकर इंसानों पर हमला करते हैं तो उन्हें भी उम्रकैद की सजा देकर चिडि़याघर भेज दिया जाता है।


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