इमरजेंसी काउंटर भी हो गया ठप मरीजों की बढ़ी मुसीबत

2019-07-17T06:01:03Z

RANCHI : रिम्स में आउटसोर्सिग पर काम करने वाले स्टाफ ने मंगलवार को अचानक काम ठप कर दिया। इससे इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद हो गए। हड़ताल से पहले काउंटर्स पर रजिस्ट्रेशन के लिए मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। मरीज इस इंतजार में खड़े रहे कि काउंटर खुले तो उनका इलाज होगा। लेकिन स्टाफ ने काम करने से इंकार कर दिया। ऐसे में कई मरीजों की हालत बिगड़ गई। बाद में डेली वेजेज स्टाफ ने रजिस्ट्रेशन शुरू किया। जिसके बाद इमरजेंसी के मरीजों का देर से इलाज शुरू हो सका। आउटसोर्सिग स्टाफ का कहना था कि उन्हें दस महीने से पेमेंट नहीं मिला है। इस स्थिति में वे कैसे काम करेंगे?

नहीं बना गोल्डन कार्ड

हॉस्पिटल में एडमिट होने वाले मरीजों का हर दिन गोल्डन कार्ड बनाया जाता है। जिससे कि इस सुविधा का लाभ पाने वाले मरीजों का हर तरह की बीमारी का इलाज मुफ्त में कराया जा सके। लेकिन एजेंसी के स्टाफ के हड़ताल पर चले जाने की वजह से एक भी मरीज का गोल्डन कार्ड नहीं बनाया जा सका। इस वजह से रिम्स के डॉक्टरों को भी काफी परेशानी हुई।

रजिस्ट्रेशन को लगी रही लंबी लाइन

सुबह से ही मरीज रजिस्ट्रेशन के लिए ओपीडी काउंटर के बाहर लाइन में लगे थे। जब उन्हें पता चला कि स्टाफ ने काम ठप कर दिया है तो सभी इमरजेंसी काउंटर की ओर भागे। इसके बाद तो वहां मरीजों की बाढ़ सी आ गई। उन्हें संभालने के लिए सैप के जवानों और सिक्योरिटी गा‌र्ड्स को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि इमरजेंसी में दो काउंटर में से एक ही काउंटर पर मरीजों की पर्ची काटी जा रही थी। इससे भी मरीजों के इलाज में देरी हुई।

केस वन

सरजू शर्मा को रिम्स में इलाज के लिए एडमिट कराया गया है। उनका डायलिसिस किया जाना है। लेकिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पाया। बेटे सुमंत शर्मा ने बताया कि हर बार काउंटर से निराश होकर लौट जा रहे हैं।

केस टू

विजय को मेडिसीन में इलाज के लिए भर्ती कराने के बाद पिता केदार यादव गोल्डन कार्ड बनवाने पहुंचे। लेकिन वह सुबह से दोपहर तक बैठे रहे पर उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पाया।

वर्जन

आउटसोर्सिग पर काम करने वाले स्टाफ हड़ताल पर गए हैं लेकिन इसकी सूचना देनी चाहिए थी ताकि हम वैकल्पिक व्यवस्था करते। चूंकि पेमेंट को लेकर हम कुछ नहीं कर सकते। ये उनके और एजेंसी के बीच का मामला है। लिंक फेल होने के कारण भी मरीजों को परेशानी हुई जिसे ठीक कराया जा रहा है।

डॉ.विवेक कश्यप, सुपरिंटेंडेंट, रिम्स


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