2 साल बाद भी एनजीटी के आदेश नहीं मालूम

2019-03-07T06:00:32Z

-एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन रि। जज अरुण टंडन ने जल निगम और नगर निगम अधिकारियों को लगाई फटकार

-2 हफ्ते में टेनरी संचालकों और जल निगम के विवाद सुलझाने के निर्देश, डीएम की अध्यक्षता में होगा फैसला

KANPUR@inext.co.in

KANPUR : गंगा सफाई के लिए जिम्मेदार विभागों को 2 साल पहले दिए गए एनजीटी के आदेशों के बारे में मालूम ही नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि विभागीय अधिकारियों ने क्या किया? यह सवाल जब एनजीटी की मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष रि। जज अरुण टंडन ने जल निगम और नगर निगम से दागे तो अधिकारी बगले झांकने लगे। उन्होंने साफ कहा कि अधिकारी 5 दिन में एनजीटी के 500 पन्नों के आदेशों को पढ़े, इसके बाद काम करें। सर्किट हाउस में रि। जज बैठक कर रहे थे। उनके साथ कमेटी की सदस्य डॉ। अनीता राय, यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव आशीष तिवारी, मुख्य पर्यावरण अधिकारी टीयू खान, कुलदीप मिश्र समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बायोरेमिडिएशन फेल साबित

कुंभ से पहले गंगा में गिरने वाले जिन नालों को टैप नहीं किया जा सका था, उन पर 3 करोड़ रुपए से बायोरैमिडिएशन से उन्हें साफ किया जाना था। लेकिन जांच में बैक्टीरिया की अधिकता मिली है, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गंगा के पानी में कोलीफार्म (बैक्टीरिया) की मात्रा नियंत्रित नहीं की जा सकी है। वहीं रिटायर्ड जज अरुण टंडन ने जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गंगा में गिर रहे नालों की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

जताई नाराजगी

क्रोम लिकर की उठान के रेट के बारे में जानकारी मांगी इस पर नगर निगम के एक्सईएन आरके सिंह ने कहा कि कोई रेट नहीं लिया जाता है, जिस पर कमेटी ने नाराजगी जाहिर की। रिटायर्ड जज ने कहा कि आप लोगों को एनजीटी के 13 जुलाई 2017 को दिए गए आदेशों की जानकारी नहीं है। सिविल लाइंस में सीवर के उफनाने पर भी नाराजगी जताई।

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बायोडायवर्सिटी पार्क बनेगा

एनजीटी की मॉनीटरिंग कमेटी ने केडीए के अधिकारियों को गंगा बैराज के पास बायोडायवर्सिटी (जैव विविधिता) पार्क विकसित करने के निर्देश दिए। यह पार्क केडीए की 25 एकड़ भूमि पर वन विभाग के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। डीएफओ अरविंद यादव के मुताबिक जमीन और पार्क के निर्माण की राशि केडीए वहन करेगा। कई तरह के पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे। उनका संरक्षण होगा।

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डीएम की अध्यक्षता में कमेटी

टेनरी संचालकों और जल निगम के बीच सीईटीपी संचालन को लेकर विवाद है। जल निगम पहले टेनरी संचालकों से 5 रुपए प्रति हाईड के हिसाब से मेंटेनेंस फीस लेता था, लेकिन अब इसे 20 रुपए प्रति हाईड कर दिया गया है। इसको लेकर विवाद बना हुआ है। ऐसे में सीईटीपी मेंटेनेंस को करीब 5 करोड़ रुपए टेनरी संचालकों पर बकाया है। रि। जज अरुण टंडन ने डीएम की अध्यक्षता में रेट निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। 2 हफ्ते का समय दिया गया है।


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