फेसबुक पर विदेशी युवती से न करें दोस्ती हो सकता है ऐसा

2019-04-11T08:51:52Z

फेसबुक पर लंदन की युवती से बीएड छात्र को दोस्ती पड़ी महंगी

- गिफ्ट लेने के चक्कर में कर्जा लेकर रुपया जमा कराया, और रुपया मांगने पर ठगी का हुआ अहसास

- फ्रेंड लिस्ट से जाकर पता किया युवती का भेद, पीडि़त छात्र ने पुलिस से की मामले में शिकायत

agra@inext.co.in
AGRA: अगर फेसबुक पर किसी फॉरनर से दोस्ती कर रहे हैं तो जरा सोच समझ कर कदम बढ़ाएं, फॉरनर फ्रेंडशिप के नाम पर आपके साथ फ्रॉड हो सकता है. ऐसा ही एक मामला थाना छत्ता क्षेत्र में देखने को मिला है. यहां पर शातिर ने विदेशी युवती बन कर बीएड के छात्र को शिकार बनाया. पहले फेसबुक और फिर व्हाट्सअप चैटिंग कर उसे विश्वास में ले लिया, फिर गिफ्ट देने का लालच दिया और रुपये अकाउंट में जमा करा लिए. ठगी का अहसास होने पर पीडि़त ने पुलिस से शिकायत की है.

एक महीने पहले हुई थी मुलाकात
छत्ता क्षेत्र निवासी छात्र बीएड की पढ़ाई कर रहा है. 24 मार्च को उसकी मुलाकात फेसबुक पर यूके लंदन की रहने वाली युवती से हुई. युवती ने अपना नाम कैथरीन गोल्ड बताया. खुद को एयरपोर्ट पर मैनेजर बताया. दोनों की फेसबुक पर दोस्ती हो गई. युवती ने उसे अपना व्हाट्सअप नंबर दिया. दोनों की चैटिंग होने लगी. युवती देर तक छात्र से बात करने लगी.

छात्र से मिलने की बोली बात
चैटिंग के एक सप्ताह बाद फेसबुक फ्रेंड ने छात्र से मिलने की बात बोली. उसने बोला कि वह उससे मिलना चाहती है. उसने छात्र से उसका एड्रेस सेंड करवाया. युवती ने बोला कि वह आएगी तो कोई होटल में कमरा देख लेना रुकने के लिए. छात्र ने उसे रुकवाने को बोल दिया. शातिर युवती ने छात्र को बताया कि उसने वीजा के लिए एप्लाई कर दिया है. छात्र ने उसे कुछ होटल के फोटो भी सेंड कर दिए कि कौन से होटल में रूम बुक कराना है. इसके बाद युवती ने छात्र को व्हॉट्सअप कॉल कर बताया कि वह एक पार्सल भेज रही है. उसे रिसीव कर लेना. उसने बताया कि उसमें तुम्हारे लिए गिफ्ट है.

कोरियर से आया छात्र को कॉल
छात्र के मुताबिक 5 अप्रैल को उसने कोरियर किया था. 8 अप्रैल को चैन्नई के एक कोरियर से कॉल आया. कोरियर की महिला कर्मचारी ने बोला कि आपका कोरियर आया है, आप इसे रिसीव करें, लेकिन ये तब तक आपके पास नहीं भेजा जा सकता, जब तक आप 19500 रुपये अकाउंट में जमा नहीं कराते. साथ ही छात्र की महिला मित्र ने उसे कोरियर की एक स्लिप भी सेंड की थी. उसमें लिखा था बैलेंस टू बी पेड- 19500

स्कैन के बाद फिर से मांगा रुपया
छात्र ने रुपये अकाउंट में ट्रांसफर करा दिए. इसके बाद फिर से कॉल आया इस बार महिला कर्मचारी ने बताया कि आपका पार्सल स्कैन किया गया है. उसमें कुछ इलैक्ट्रॉनिक सामान और 20 हजार पाउंड हैं. इसे इंडियन करेंसी में चेंज करके देंगे, लेकिन इसके लिए आपको पहले 68 हजार रुपये जमा कराने होंगे. छात्र के पास इतना रुपया नहीं था. पहले तो उसने मना कर दिया लेकिन फिर वह तैयार हो गया.

दोस्तों से मदद लेकर जमा किया रुपया
छात्र ने किसी तरह अपने दोस्तों से बात कर रुपया उधार लिया. उसने 30 हजार रुपया जमा कर लिया और एकाउंट में ट्रांसफर कर दिया. कोरियर की महिला कर्मचारी ने छात्र को चैन्नई का कोरियर एड्रेस भी सेंड किया था. पहले तो वह 30 हजार में मान गए पर बाद में पूरा रुपया जमा कराने की बात होने लगी. दो दिन तक उससे बात होती रही. 10 अप्रैल को कोरियर कंपनी महिला कर्मचारी ने साफ बोल दिया कि बॉस ने पूरा रुपया जमा करने को बोला है, नहीं तो पार्सल नहीं भेजा जा सकता. इस पर छात्र का माथा ठनक गया.

फ्रेंड लिस्ट से बात कर हुआ खुलासा
छात्र ने विदेश महिला मित्र की फ्रेंड लिस्ट में जाकर कुछ लोगों के नम्बर लिए और उनको कॉल किया. छात्र ने उन्हें सारी कहानी बताई तो उन लोगों ने भी इस बारे में बताया कि उनके पास भी इसी तरह मैसेज आया था. इस पर छात्र को अहसास हुआ कि वह बहुत बड़ी ठगी का शिकार हुआ है. इसी के बाद छात्र ने पुलिस में मामले की शिकायत की. साइबर सेल मामले की जांच कर रही है.

- इन बातों पर दें ध्यान

गिफ्ट के माध्यम से विदेशी करेंसी इल्लीगल है, ये विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत अपराध है.

रुपया इस तरह से एक देश से दूसरे देश नहीं आ सकता

लीगल कोरियर कभी इस तरह का पार्सल असेप्ट नहीं करेगा

फेसबुक पर विदेशी से बात करने के साथ, उसके बारे में पूरी जानकारी करें

उसका पासपोर्ट मंगवा कर वहां की एम्बेसी से पता करें

किसी की लुभावनी बातों में आकर कभी भी न फंसे

किसी को अपना फोटो और एड्रेस न भेजें

इस तरह के कई मामले आ चुके हैं. हैकर्स इसी तरह फर्जी फेसबुक आईडी बना कर युवकों को बहका देते हैं. गैंग में युवतियां भी शामिल होती हैं, जो कॉल पर बात करती हैं. इनसे किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए. पहले पूरी तरह से क्रॉस चेक करना चाहिए, इसके बाद ही आगे बात करनी चाहिए. कभी बातों में फंस कर इमोशनल नहीं होना चाहिए.
- अनुज अग्रवाल, साइबर एक्सपर्ट


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