राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाली सुविधाएं में कोई कटौती नहीं कौशिक

2019-06-26T06:00:37Z

- बसों में मिलने वाली निशुल्क सुविधा में नहीं की गई कटौती

>DEHRADUN: ट्यूजडे को विधानसभा सत्र के दौरान राज्य आंदोलनकारियों का मामला भी उठा। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक प्रीतम सिंह ने नियम 58 के तहत राज्य आंदोलनकारियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य गठन के 18 साल बाद भी राज्य आंदोलनकारियों को दी जाने वाली सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। जिनकी बदौलत उत्तराखंड राज्य का सपना पूरा हुआ। इधर, संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आंदोलनकारियों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गइर्1 है।

मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को नहीं मिली सजा

विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी आज आंदोलन की राह पर हैं। राज्य आंदोलन के दौरान मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को अब तक कोई सजा नहीं मिल पाई। 10 परसेंट क्षैतिज आरक्षण से भी आंदोलनकारी वंचित हैं, जबकि चिन्हीकरण का मामला अधर में लटका हुआ है। नेता प्रतिपक्ष डा। इंदिरा हृदयेश ने कहा कि आंदोलनकारी पेंशन व 10 परसेंट क्षैतिज आरक्षण से वंचित हैं। बदले में संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने क्षैतिज आरक्षण पर कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के बदौलत ही राज्य का गठन हुआ। सरकार यथासंभव उनके साथ है। वर्ष 2018 में कोर्ट ने क्षैतिज समाप्त कर दिया था। लेकिन राज्य आंदोलनकारियों को मिलने वाली सभी सुविधाएं सरकार की ओर से यथावत रखी गई हैं। उन्होंने रोडवेज की बसों में निशुल्क यात्रा का भी जिक्र किया। विधायक प्रीतम सिंह ने पिछले सत्र के दौरान पीठ की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। बदले में संसदीय कार्य मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि वर्ष 2009 में सबसे पहले चिन्हीकरण की नियमावली तत्कालीन सरकार द्वारा बनाई गई थी। 10 हजार रुपए तक मेडिकल अनुदान देने, पेंशन दिए जाने व बसों में फ्री यात्रा जैसी सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की गई है।

सदन में प्राधिकरणों का मामला भी उठा

विपक्ष ने सदन में प्राधिकरणों का मामला भी उठाया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने नियम 58 के तहत मामला उठाते हुए कहा कि सरकार ने जिलों में प्राधिकरणों का गठन किया है। हिल व ग्रामीण एरियाज में आम लोगों को मकान बनाने व नक्शा पास कराने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि जिलों में बनाए गए विकास प्राधिकरण अधिकारियों के लिए कमाई का साधन बन चुके हैं।

प्राधिकरण बन चुके भ्रष्टाचार के अड्डे

उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा ने कहा कि अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ में प्राधिकरणों को लेकर आंदोलन शुरू हो चुके हैं। मकान बनाने के लिए आम लोगों को पटवारी, तहसीलदार व एसडीएम की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद जेई का चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने कमेटी बनाए जाने और कमेटी की रिपोर्ट आने तक जिलों में प्राधिकरणों पर रोक लगाए जाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष डा। इंदिरा हृदयेश ने भी कहा कि प्राधिकरण भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए हैं। खुद सरकार जानकारियां मांग ले कि दो वर्षो के भीतर प्राधिकरणों में कितनी फाइलें पेंडिंग पड़ी हुई हैं। संसदीय व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने विपक्ष को भरोसा दिया कि ऐसा कोई मामला मिल जाए तो संबंधित अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा, एनएच व स्टेट एनएच की 200 मीटर परिधि में खुद मकान बनाने के लिए किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जा रहा है।


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