तस्करों ने तोड़ा जीआरपी का तिलिस्म

2019-02-15T06:00:07Z

ट्रेनों के जरिए चरस की खेप पहुंच रही दिल्ली

डीआरआई ने की बरामदगी, देखती रही आरपीएफ- जीआरपी

द्दह्रक्त्रन्य॥क्कक्त्र:

ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भले मुस्तैदी बढ़ा दी गई है। लेकिन तस्करी का जाल तोड़ पाना आरपीएफ-जीआरपी के लिए मुश्किल नजर आ रहा। बिहार से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में तस्करों की आमद फिर बढ़ गई है। ट्रेनों के जरिए चरस की खेप पहुंचाने का मामला सामने आने से हड़कंप मचा है। पकड़े गए तस्करों ने जांच टीम को बताया है कि वह कई बार ट्रेन से माल पहुंचा चुके हैं। किस्मत के दगा देने पर ही वे पकड़े गए। एसपी जीआरपी का कहना है कि तस्करों पर कार्रवाई के लिए अलर्ट जारी किया गया है।

नेपाल से आती चरस की खेप

डीआईआई राजस्व अभिसूचना निदेशालय की टीम ने सत्याग्रह एक्सप्रेस में 19.6 किलो नेपाली चरस बरामद किया था। दो दिन पहले टीम ने पिपराइच स्टेशन पर ट्रेन की तलाशी ली तो जनरल कोच के टायलेट में छिपाकर रखी गई चरस बरामद हुई। इसके पूर्व जीआरपी गोरखपुर की टीम ने दो फरवरी को एक युवक को अरेस्ट कर उसके पास से पांच लाख रुपए कीमत का करीब सवा पांच किलो चरस बरामद किया था। ट्रेन से माल लेकर दिल्ली जा रहे कैरियर ने जीआरपी को बताया था कि वह बिहार के रास्ते नेपाल की चरस लेकर आ रहे हैं। करीब हर साल ट्रेनों से तस्करी का माल बरामद होता है। हर साल ट्रेनों में चरस की बरामदगी होती है। जीआरपी से जुड़े लोगों का कहना है कि बिहार से आने वाली ट्रेनों में चरस छिपाकर लाई जाती है। नेपाल से बिहार में तस्कर माल की खेप पहुंचा देते हैं। फिर उनको कैरियर के जरिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट किया जाता है। पूर्व में दर्ज 50 से अधिक मुकदमों में इस बात की जानकारी मिली है कि नेपाली चरस की सप्लाई का हब बिहार है। इनमें रक्सौल से आने वाली रेलगाडि़यों में ज्यादातर लोडिंग की जाती है।

चरस ही नहीं, अन्य चीजों की होती तस्करी

तस्करी के लिए ट्रेनों से ज्यादा मुफीद दूसरे साधन नहीं है। बिहार से दिल्ली तक चलने वाली ट्रेनों चरस, अफीम, सोने-चांदी, गांजा सहित कई सामानों की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है। जबकि, लौंग, इलायची, मेवा और सुपारी की तस्करी पुरानी बात हो चुकी है। पकड़े गए तस्करों ने जांच टीम को बताया कि कई ट्रेनों के जरिए रोजाना तस्करी का माल दिल्ली सहित अन्य जगहों पर पहुंच रहा है। इसमें चरस और गांजा की खेप रोजाना दिल्ली ले जाई जाती है।

जांच के लिए बनी थी क्यूआरटी

तीन साल पूर्व ट्रेनों में तस्करी बढ़ने पर तत्कालीन एसपी रेलवे सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने क्यूआरटी का गठन कर दिया था। आरपीएफ के साथ मिलकर क्यूआरटी बिहार से आने वाली ट्रेनों की विशेष जांच पड़ताल करती थी। संदेह के आधार पर यात्रियों के सामान की जांच करने के निर्देश दिए गए थे। तब जीआरपी की सक्रियता से ट्रेनों में तस्करी थम गई थी। लेकिन धीरे-धीरे सुरक्षा एजेंसियों के सुस्त पड़ने से मामला बढ़ता चला गया। हाल के दिनों में ट्रेनों में टोकन सिस्टम लागू किया गया है। इससे ट्रेनों में होने वाली चोरियों सहित अन्य अपराधों पर लगाम कसा है। लेकिन तस्करी के मामलों को पकड़ पाने में जीआरपी को कामयाबी नहीं मिल सकी।

मुखबिरी ही सहारा, पकड़ पाना मुश्किल

जीआरपी से जुड़े लोगों का कहना है कि ज्यादातर बरामदगी जनरल कोच में होती है। कैरियर के जरिए माल दिल्ली भेजने वाले तस्कर टॉयलेट के केबिन सहित अन्य जगहों पर सामान छिपा देते हैं। कई बार भारी भीड़ की वजह से किसी यात्री के सामान की चेकिंग नहीं हो पाती। ऐसे में अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है कि किस यात्री के बैग में संदिग्ध वस्तु है। सटीक मुखबिरी के आधार पर जब जांच होती है तो तब सामान बरामद हो पाता है। ट्रेनों की जांच पड़ताल कम की जाती है।

बिहार से आवागमन करने वाली ट्रेन

सत्याग्रह एक्सप्रेस

सहरसा गरीब रथ

चंपारण हमसफर

बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस

सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस

नई दिल्ली जलपाई गुड़ी एक्सप्रेस

अमृतसर कटिहार एक्सप्रेस

पूरबिया एक्सप्रेस

वैशाली

गोरखधाम

बापूधाम

शहीद एक्सप्रेस

हाल में हुई बरामदगी

11 फरवरी 2019: रक्सौल से दिल्ली जा रही ट्रेन सत्याग्रह एक्सप्रेस में डीआईआई टीम ने 20 किलोग्राम चरस बरामद किया। पिपराइच में तलाशी के दौरान कामयाबी मिली।

02 फरवरी 2019: जीआरपी टीम ने पूर्वी फुट ब्रिज पर पश्चिमी चपांरण निवासी रामबाबू यादव के बैग में रखा चरस बरामद किया। पुलिस को बताया कि नेपाल से चरस लेकर मुरादाबाद पहुंचाने जा रहा था।

21 सितंबर 2018: बिहार से सप्तक्रांति एक्सप्रेस में चरस की खेप लेकर जा रही महिला के बारे में सूचना मिली। ट्रेन के मुरादाबाद पहुंचने पर जीआरपी ने घेराबंदी कर बरामदगी की।

20 सितंबर 2016: सत्याग्रह एक्सप्रेस सुरक्षा में बलों ने तीन करोड़ रुपए की चरस बरामद की। नरकटियागंज रेलवे स्टेशन पर बरामदगी हुई थी।

वर्जन


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