साइकिल पर सवार एक पूरा परिवार

2013-10-31T17:19:11Z

DEHRADUN लोग कहते है कि हर चीज की एक उम्र होती है अक्सर किसी तीस या चालीस साल की उम्र वाले इंसान से पूछो कि क्या आप साइकिल चलाते हैं तो जवाब आता है कि अब उम्र नहीं रही लेकिन अगर एक 86 साल के बुजुर्ग आपको न सिर्फ साइकिल चलाते बल्कि खुद को एक रैली के लिए तैयार करते दिखाई दें तो आप क्या कहेंगे दून के 86 साल के वेद प्रकाश एक ऐसे शख्स हैं जो खुद को आई नेक्स्ट के स्पेशल इवेंट बाइकॉथन के लिए अपने आप को तैयार कर रहे हैं इसके लिए वो रोजाना पै्रक्टिस भी कर रहे हैं यही नहीं उनके पूरे परिवार का साइकिल के साथ अपना ही इतिहास रहा है उनके पिता भाई और बेटे सभी की साइकिल के साथ एक अलग ही कहानी है

बलूचिस्तान से आकर दून बस गए
बटवारे से पहले कोइटा बलूचिस्तान में रहने वाले वेद प्रकाश पाकिस्तान बटवारे के बाद देहरादून आकर बस गए. वेद प्रकाश बताते हैं कि 5 साल की उम्र तक बलूचिस्तान की गलियों में ही साइकिल दौड़ाई, लेकिन उसके बाद दून की गलियों से दोस्ती हो गई. यही से एजुकेशन ली और यहीं शादी हो गई. लगभग 80 साल के साइकिल के साथ को वो आज भी नहीं भूले हैं और न इसे अपनी लाइफ से जाने दे रहे. शायद यही वो जज्बा है जो उन्हें उस उम्र में भी वो करने की हिम्मत दे रहा है, जिसे करने के लिए 30 साल की उम्र का जवान खून भी हौसला नहीं कर पाता.

हरिद्वार नहाने रोज जाते थे
वेद प्रकाश बताते हैं कि जवानी में साइकिल से इतना प्यार था कि वो और उनके कुछ दोस्त साइकिल से सुबह पांच बजे हरिद्वार गंगा स्नान के लिए निकल जाते थे और दस बजे तक नहाकर वापस भी आ जाते थे. यहीं नही सहारनपुर, ऋषिकेश, यमुनानगर तक का सफर साइकिल से ही तय कर लिया करते थे.
रोज करते हैं practice
आई नेक्स्ट की स्पेशल एक्टिविटी बाइकाथॉन के बारे में जब से सुना है तभी से वो रेग्युलर मॉर्निंग में साइकिल रैली के लिए ट्रैक पर प्रैक्टिस कर रहे हैं. वो रोज मॉर्निंग में 5 बजे पवेलियन से एनआईवीएच तक साइकिल दौड़ाकर अपने रनिंग टाइम को पहले टाइम से मैच कर रहे हैं. अभी तक उन्होंने 45 मिनट में इस दूरी को तय किया है, लेकिन अभी भी वो लगातार इस टाइम को कम करने में लगे है. उनका कहना है कि उम्र भले ही ज्यादा है, लेकिन हौंसले किसी नौजवान से कम नहीं है. वो रैली में नंबर वन की दौड़ के लिए अपनी पूरी जी जान लगाए हुए है.
साइकिल लवर
वेद प्रकाश बताते हैं कि साइकिल को लेकर उनका जुनून खानदानी है. पहले पिता फिर खुद उसके बाद भाई और फिर बेटा सभी साइकिल लवर हैं. मुंबई में जॉब कर रहे वेद प्रकाश के भाई के बेटे कमल दुग्गल की साइकिल को लेकर अपनी ही एक अनोखी कहानी है. उन्होंने 1988 में प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया से मिलने के लिए दिल्ली तक का सफर साइकिल से ही तय कर दिया. आज इस दूरी को साइकिल की जगह अगर मोटरसाइकिल से भी तय करने की कल्पना की जाए तो लोगों के माथे पर पसीना आ जाए लेकिन उन्होंने इस दूरी को साइकिल से तय किया.
आज लोग साइकिल को बेकार कहते हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना साइकलिंग करे तो उसे लाइफ में कोई बीमारी छू भी न सके. मेरी तमन्ना है कि एक बार वैष्णोदेवी तक का सफर साइकिल से पूरा करूं. यूं तो मैं साइकिल चलाता रहता हूं, लेकिन आई नेक्स्ट के हर साल होने वाले इस इवेंट ने मुझे साइकलिंग करने का एक मकसद दे दिया. इसीलिए मै रोजाना इस रैली के लिए प्रैक्टिस भी कर रहा हूं.
-वेद प्रकाश दुग्गल, बाइकाथॉन 2013 पार्टिसिपेंट
1955 से मैं और मेरा भाई साइकलिंग कर रहे हैं. मैं अब साइकिल कम चलाता हूं, लेकिन भाई रेगुलर साइकलिंग करते हैं. हम 6 भाई है सभी स्पोट्र्स मैन रहे हैं, लेकिन पिता के बाद साइकिल को लेकर दीवानगी सिर्फ भाई में ही देखने को मिली है. शायद इसीलिए वो 86 साल की उम्र में भी इतने फिट है.
-राजेंद्र दुग्गल, भाई
मैंने दिल्ली तक का सफर तब तय किया था जब सिक्ख दंगों को जोर था. उस वक्त ज्ञानी जैल सिंह प्रेसीडेंंट ऑफ इंडिया थे. शांति संदेश के साथ मैं और मेरे कुछ फ्रेंड्स साइकिल का सफर तय कर डेढ़ दिन में दिल्ली पहुंचे और प्रेसीडेंट से मिले. वो बात आज भी भुलाए नहीं भुलती. मैं अपनी बेटी को भी स्पोट्र्स के लिए हमेशा मोटिवेट करता हूं.
-कमल दुग्गल, भाई के बेटे



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