जब मिलेगा तानपुरा और तबला तभी सब मिलकर बजाएंगे हारमोनियम

2019-07-19T06:00:52Z

-अभावों का मारा डीडीयूजीयू का फाइन आर्ट एंड म्यूजिक डिपार्टमेंट

-स्टूडेंट्स के लिए नहीं हैं पर्याप्त मेज-कुर्सियां, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स का भी टोटा

-एचओडी की डिमांड में रोड़े अटका रहा अकाउंट डिपार्टमेंट

GORAKHPUR: एक तरफ गोरखपुर विश्वविद्यालय के होम साइंस डिपार्टमेंट की छत पर टाइल्स लगाकर पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है तो दूसरी तरफ उससे ठीक सटे बिल्डिंग में स्थित फाइन आर्ट एंड म्यूजिक डिपार्टमेंट के स्टूडेंटस के पास बैठने तक के लिए न चेयर है और न पढ़ने के लिए म्यूजिकल इंस्टूमेंटस।

संसाधनों के अभाव से जूझते इस डिपार्टमेंट में कुर्सी-मेज से लेकर म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स तक की कमी है। इसके लिए एचओडी की ओर से सवा सात लाख रुपए तक के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स व कला सामग्री की डिमांड की गई है। लेकिन प्रशासनिक भवन के अकाउंट डिपार्टमेंट की मनमानी के चलते न तो प्रस्तावित बजट पर मुहर लगाई गई और न ही स्टूडेंट्स के लिए डिमांड की गई सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। अब एचओडी ने वीसी से इस संबंध में मिलकर इन आइट्म्स की मांग करने का फैसला किया है।

न मिली मेज और न ही मिला इज्लस

डीडीयूजीयू के फाइन आर्ट एंड म्यूजिक डिपार्टमेंट की एचओडी प्रो। उषा सिंह बताती हैं कि उनके डिपार्टमेंट में एडमिशन लगभग हो चुके हैं। डिपार्टमेंट में टीचर्स की नियुक्ति भी हो गई है। ऐसे में न्यू और ओल्ड स्टूडेंट्स के पठन-पाठन के लिए जरूरी सामग्रियों व म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की बेहद जरूरत है। उन्होंने वीसी को लिखे लेटर में कहा है कि जितनी भी सामग्रियां हैं वे सभी दस वर्ष पहले की हैं जिनकी स्थिति ठीक नहीं है। नए म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जरूरत है। लेकिन अकाउंट डिपार्टमेंट के जिम्मेदारों ने इन यंत्रों व स्टूडेंट्स के लिए डिमांड की गई 40 मेज को उपयोगी न बताते हुए मांग पत्र को खारिज कर दिया है। कई बार पत्राचार करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। करीब सात लाख रुपए के वाद्य यंत्रों की मांग की है। लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं है। इसके साथ ही कीमती वाद्य यंत्रों के रखरखाव के लिए टाइल्स युक्त दो रेक की मांग की गई वो भी नहीं मिला।

एचओडी तक की सुनवाई नहीं

एचओडी बताती हैं कि डिपार्टमेंट की मरम्मत के लिए जो मैंने मांग किया था, वह न करके सिर्फ दरवाजा, खिड़की और दीवारों की रंगाई-पुताई के अलावा कोई काम नहीं किया गया। जबकि डिपार्टमेंट की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं। म्यूजिक क्लास के पास सीढ़ी है, जिसे तोड़कर बाहर से बनाए जाने की डिमांड की थी लेकिन नहीं किया गया। छत पर भी मरम्मत का काम हुआ तो वह भी संतोषजनक नहीं हुआ। मरम्मत कार्य कराने वाली आरईएस फर्म के जिम्मेदार नो ड्यूज के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें भी तभी नो ड्यूज करूंगी जब काम पूरा कंप्लीट कर लेंगे।

छत पर लगा दिया था टाइल्स

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने शासन के बजट का गोरखपुर विश्वविद्यालय ने कैसे दुरुपयोग किया था इसका खुलासा किया था। होम साइंस डिपार्टमेंट की छत पर टाइल्स लगाने का मामला 13 जुलाई को प्रकाशित किया था। इसके बाद भी अभी तक यूनिवर्सिटी प्रशासन कुछ नहीं कर सका है।

जहां एक डिपार्टमेंट सात लाख रुपए के लिए तरस रहा है वहीं, बगल के डिपार्टमेंट की मरम्मत के लिए 48 लाख रुपए आवंटित कर दिया गया। इसका नतीजा ही था कि छत पर टाइल्स लगा दिया गया।

इनकी की गई है डिमांड

1- ग्राफिक प्रिंटिंग मशीन - 1 अदद - 1,00000

2- सितार स्पेशल - 5 अदद - 16,000

3- तानपुरा लेडीज - 5 अदद - 16,000

4- तानपुरा जेंट्स - 5 अदद - 16,000

5- तबला स्पेशल - 15 जोड़ी - 10,000

6- हारमोनियम स्केल चेंजर - 6 अदद - 20,000

7- इलेक्ट्रॉनिक्स तानपुरा - 6 अदद - 15,000

कुल - कला सामग्री एवं संगीत वाद्य यंत्र का अनुमानित मूल्य सात लाख रुपए

वर्जन

प्रो। वीके सिंह, वीसी, डीडीयूजीयू


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