फर्जी निकला डीएल तो दर्ज होगी एफआईआर

2019-05-08T09:58:59Z

गोरखपुर शहर के भीतर वाहनों की जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस का ऑनलाइन परीक्षण ट्रैफिक पुलिस करेगी

- ऑनलाइन चालान में सामने आया मामला, वसूला जुर्माना

- एसपी ट्रैफिक ने जारी किया निर्देश, देंगे पुलिस को सूचना
Gorakhpur@inext.co.in
GORAKHPUR: शहर के भीतर वाहनों की जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस का ऑनलाइन परीक्षण ट्रैफिक पुलिस करेगी. डाटा मिसमैच होने पर आरटीओ से संपर्क करके गलती सुधारने की गुजारिश की जाएगी. लेकिन डीएल पूरी तरह से फर्जी पाया गया तो थाना में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. फर्जी डीएल का मामला सामने आने पर एसपी ट्रैफिक ने यह निर्देश जारी किया है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सिर्फ डीएल देखा जाता था लेकिन लाइसेंस नंबर के आधार पर उसकी ऑनलाइन जांच मौके पर करके लाइसेंस जब्त कर लिया जाएगा.

चेकिंग में सामने आया मामला, वसूल किया जुर्माना
सोमवार को यूनिवर्सिटी के पास वाहन चेकिंग के दौरान इंटरसेप्टर पर तैनात पुलिस कर्मचारियों ने एक वाहन को रोका. नो इंट्री में गलत तरीके से आए वाहन की वजह से आवागमन प्रभावित हो रहा था. ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने जब ड्राइवर से लाइसेंस मांगा तो उसने कन्नौज आरटीओ से जारी संजू यादव के नाम से जारी लाइसेंस दिखाया. ऑनलाइन जांच करने पर मालूम हुआ कि लाइसेंस किसी शराफत हुसैन के नाम से जारी है. फोटो एक पर नाम और पता भिन्न होने पर जब पुलिस कर्मचारियों ने कार्रवाई की शुरू की तो उसने दूसरा डीएल दिखाया जिस पर नाम-पता सही-सही दर्ज किया गया था. गड़बड़ी पाए जाने पर टीम ने ड्राइवर का चालान काट दिया. उसी समय किसी ने वीडियो बनाकर वसूली का आरोप लगाते हुए वायरल कर दिया था जिसको लेकर दो दिनों तक हड़कंप मचा रहा.

लाइसेंस नंबर से ऑनलाइन करेंगे मिलान
एसपी ट्रैफिक ने बताया कि फर्जी डीएल का मामला सामने आने पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. ऑनलाइन चालान की व्यवस्था होने से फर्जीवाड़ा पकड़ में आ रहा है. ट्रैफिक के इंस्पेक्टर और दरोगा एप्स के जरिए पूरा रिकॉर्ड खंगाल सकेंगे. चेकिंग के दौरान अभी तक पुलिस कर्मचारी सिर्फ डीएल देख लेते थे. लेकिन जांच के दौरान लाइसेंस नंबर के आधार पर परीक्षण भी किया जाएगा. यदि नाम-पते में कोई भिन्नता मिली तो उसे सुधारने का निर्देश दिया जाएगा. लेकिन लाइसेंस फर्जी होने पर संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.

इसलिए यूज करते फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस
आरटीओ की पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होने के पूर्व मैन्युल लाइसेंस जारी होते थे. तब मोहर बनवाकर बिचौलिए फर्जी तरीके से लाइसेंस जारी करा देते थे. चेकिंग के दौरान फर्जी लाइसेंस दिखाकर ड्राइवर निकल जाते थे. यदि कहीं पर चालान कट गया तो दर्ज नाम-पते का व्यक्ति नहीं मिलता था. कोर्ट से नोटिस जारी होने पर आरोपी की तलाश नहीं हो पाती थी. लेकिन बाद में बायोमैट्रिक व्यवस्था शुरू होने से इस फर्जीवाड़ा पर लगाम कसने की उम्मीद जगी लेकिन जालसाजों ने इसकी भी काट खोज निकाली है.

वाहन चेकिंग के दौरान ड्राइवर ने फर्जी लाइसेंस दिखाया था. ऑनलाइन जांच में नाम-पते की भिन्नता पाई गई. बाद में ड्राइवर ने ओरिजनल डीएल प्रस्तुत किया जिस पर चालान काटा गया. यह मामला सामने आने पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया है. वाहन चेकिंग के दौरान संदेह होने पर लाइसेंस नंबर की असलियत जांची जाएगी. फर्जी डीएल होने पर जब्त करके एफआईआर कराएंगे.

- आदित्य प्रकाश वर्मा, एसपी ट्रैफिक


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