खाड़ी देश ले जाए जा रहे पांच बच्चे बरामद

2016-04-30T07:41:33Z

- गोरखपुर में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के खेल का खुलासा, एक व्यक्ति गिरफ्तार

- हैदराबाद ले जाने की तैयारी में थे तस्कर, बिहार के निवासी है सभी बच्चे

GORAKHPUR:

गोरखपुर में मानव तस्करी के जरिये पांच बच्चों को खाड़ी देश भेजने से पहले ही छुड़ा लिया गया है। शुक्रवार की शाम गोरखपुर रेलवे जंक्शन पर एनजीओ की टीम ने एक व्यक्ति के साथ पांच बच्चों को संदिग्ध हालत में मौजूद देख एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सूचना दी जिसके बाद बच्चों को बरामद करते हुए उस व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया जो बच्चों को किसी और व्यक्ति को हैंडओवर करने पहुंचा था। इस मामले में यूनिट के सदस्य और पुलिस उस व्यक्ति की तलाश में जुट गई जो बच्चों को हैदराबाद ले जाने के लिए आने वाला था लेकिन बीच में भंडाफोड़ से चम्पत हो गया।

टीम देख भागने लगा संदिग्ध

शुक्रवार की शाम करीब चार बजे सेफ सोसायटी संस्था के सदस्य रोजाना की तरह स्टेशन पर घर से भागे बच्चों की तलाश कर रहे थे। प्लेटफार्म नम्बर एक पर करीब 10-12 साल के पांच बच्चों के साथ एक संदिग्ध युवक नजर आया। शंका होने पर सेफ सोसायटी मेंबर्स ने ट्रैफिक तिराहा स्थित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर राम सुमेर त्रिपाठी को जानकारी दी। वह महिला एसआई प्रभा, एचसीपी बद्री प्रसाद सिंह, कांस्टेबल जया, शैलोग यादव और गीता के साथ पहुंचे तो बच्चों के साथ मौजूद युवक भागने लगा। लेकिन उसे पकड़ लिया गया।

बच्चे लाने को मिले तीन हजार

हिरासत में लिए गये युवक ने खुद को देवरिया के बघौचघाट का निवासी धनेश बताया। धनेश बताया कि उसके मामा महातम भैंसा डाबर गांव के रहने वाले हैं। वही बच्चों को लाते हैं और बच्चों को यहां गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर दूसरे लोगों को सुपुर्द करने के लिए तीन हजार मिलते हैं। उन्होंने ही कहा था रात आठ बजे तक बच्चों को संभाल कर रखना है। स्टेशन पर कुछ लोग उससे मिलकर बच्चों को अपने साथ ले जाएंगे। धनेश के पास से एक एटीएम कार्ड सहित कई कागजात मिले हैं।

फाजिलनगर से ले आया ठेकेदार

बच्चों ने पूछताछ में टीम को बताया कि वे सभी बिहार के पश्चिमी चंपारन के ठकरहा, मल्हाई गांव के रहने वाले हैं। उनको गोरखपुर घूमाने के बहाने ला गया है। एक व्यक्ति ने उनके माता-पिता को कहा था कि कुछ दिन घूमने के बाद वो सभी को घर पहुंचा देगा। उस व्यक्ति के बारे में बच्चे ज्यादा नहीं जानते थे। गांव से देवरिया लाने के बाद उन्हें धनेश के साथ गोरखपुर घूमने के लिए भेजा गया।

हैदराबाद जाने थे बच्चे

धनेश ने बताया कि बच्चों को कौन लेने आने वाला था ये उसे नहीं पता। सिर्फ इतना पता है कि बच्चों को कुछ लोग गोरखपुर से हैदराबाद ले जाते। पुलिस को आशंका है कि ये बच्चे अरब देशों में भेजे जाते जहां ऊंट दौड़ में उनका इस्तेमाल किया जाता। सभी बच्चे बेहद गरीब परिवार के हैं जिन्होंने संभवत: बच्चों को काम दिलाने के आश्वासन पर यहां भेज दिया होगा।

ऊंट पर बांधते हैं बच्चों को

पूर्व एशियाई देशों से गरीब बच्चों को अरब में ले जाकर ऊंट दौड़ में लगाने का चलन पुराना है। अरब में ऊंट दौड़ बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय खेल है और इस खेल में बच्चों को ऊंट पर बांध दिया जाता है। बच्चों का रोना-चीखना सुन कर ऊंट तेज दौड़ते हैं। इसके लिए बड़ी संख्या में भारत, बांग्लादेश आदि से बच्चों की तस्करी की जानी है। इस दौड़ में कई बार ऊंट से गिर जाने पर बच्चों की जान भी चली जाती है।

सेफ सोसायटी के सदस्यों की मदद से बच्चों को बरामद किया। उनसे बातचीत करके जानकारी जुटाई जा रही है। प्रथम दृष्टया बच्चों की तस्करी या उनकी सौदेबाजी से जुड़ा मामला लग रहा है।

-राम सुमेर त्रिपाठी, इंस्पेक्टर, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट

रेलवे स्टेशन पर इस तरह का मामला पहली बार पकड़ा गया। संदेह होने पर उनको पुलिस के हवाले किया गया। एक साथ पांच बच्चे मिले। इसके पहले संस्था की ओर से 169 बच्चों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है।

-क्रिस्टोफर, प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर, सेफ सोसायटी

Posted By: Inextlive

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