मोदी सरकार का एक महीना: 5 अच्‍छी और 5 बुरी बातें

Updated Date: Thu, 26 Jun 2014 03:33 PM (IST)

केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार का एक महीना पूरा हो गया है. इस एक महीने में मोदी सरकार ने कई महत्‍वपूर्ण फैंसले लिए और कई फैंसलों से अपनी जनता का आक्रोश भी झेला. आइए जानें मोदी सरकार के वे डिसीजंस जिनसे तारीफ मिली और जनता का रोष.


पांच डिसीजंस जो लाए लोगों का प्यारमोदी सरकार ने सत्ता में आते ही कुछ पांच ऐसे डिसीजंस लिए जिससे उन्हें वोट देने वालों ने विश्वास से कहा 'देखो...यह है हमारा नया पॉवरफुल प्रधानमंत्री'. पिछले 30 दिनों में लिए गए फैसलों में पांच ऐसे फैसलें हैं जिन्होंने नरेंद्र मोदी की छवि एक मजबूत नेता की बनाई. आइए जानें इन फैसलों के बारे में...1- काले धन के लिए SITअगर बात करें सबसे तेज और असरदार फैसले की तो मोदी सरकार द्वारा सत्ता सम्भालने के पहले दिन ही काले धन को वापस लाने के लिए एक एसआईटी बनाई. इस स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एम बी शाह के साथ पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज अरिजित पासायत, सीबीआई के डायरेक्टर, आईबी, रॉ, ईडी, सीबीडीटी चेयरमैन और आरबीआई गर्वनर जैसे ऑफिशियल्स शामिल हैं. 2- 100 दिन का रोडमैप
इन पांच बड़े फैसलों में अपने मंत्रियों को 100 दिनों के रोडमैप तय करने को बोलना भी एक बड़े डिसीजन के रूप में देखा जा रहा है. इसके लिए अपने सभी मिनिस्टर्स को बोलना मोदी सरकार की काम के प्रति कमिटमैंट दिखाता है. 3- मंत्रीमंडलीय समूहों का भंग होना


इसके साथ ही मोदी सरकार ने यूपीए काल में बने सभी मंत्रीमंडलीय को भंग करने का आदेश जारी किया. इस कदम से सभी अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूहों और मंत्री समूह भंग हो गए. मोदी सरकार ने यह कदम उठाकर नौकरशाहों को यह कहा है कि वे बेखौफ होकर फैसले ले सकते हैं. इसके साथ ही मोदी सरकार ने नौकरशाहों को उनसे सीधे संपर्क करने को कहा है. 4- उपयुक्त सचिवों की नियुक्तिइस एक महीनें में केंद्र सरकार ने गुजरात कैडर के IAS अधिकारी राजीव टोपानो को नरेंद्र मोदी का पर्सनल सेक्रेटरी नियुक्त किया है. इसके अलावा ट्राई के पूव चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री का चीफ सेक्रेटरी बनाया गया. इसके साथ ही मंत्रियों को निजी सचिवों की नियूक्ति का अधिकार ना देना भी एक बड़ा फैसला है. 5- भाई भतीजा-वाद से दूरीइन सभी फैसलों के अलावा नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐसा फैसला लिए जिससे दूर-दूर तक मोदी को वोट देने वालों ने सराहा और यह फैसला था अपने मंत्रियों को भाई-भतीजावाद से दूर रहने का आदेश. इस आदेश के तहत मोदी ने अपने सभी मंत्रियों को अपने रिश्तेदारों और जान पहचान वालों को अपने समीप रखने से मना किया है. पांच बातें जो कर गईं परेशान

बीते 30 दिनों में नरेंद्र मोदी सरकार ने कुछ ऐसे फैसले भी लिए हैं जिनसें आमजनमानस में मोदी सरकार की ईमेज को धक्का लगा है. आइए जानें वो पांच फैसले और मोदी सरकार की नाकामयाबी की बातें.1- इराक मुद्दे की मिसअंडरस्टेंडिंगइराक में बीती 10 जून से चले आ रहे शिया और सुन्नी समुदाय के टकराव को मोदी सरकार पूरी तरह से भांप नही पाई. गौरतलब है कि अभी भी इराक में लगभग 18000 इंडियन सिटीजंस फंसे हुए हैं लेकिन इन नागरिकों को इराक से निकालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने ना ही कोई बयान जारी किया है और कोई दिखने वाला कदम भी नही उठाया है. हालांकि विदेश मंत्रालय लगातार इस बारे में बात कर रहा है लेकिन अभी तक इंडियंस को इराक से निकालने में कोई बड़ी सफलता नही मिली है. इस बारे में विशेषज्ञों को मानना है कि मोदी सरकार में इंद्रकुमार गुजराल, ब्रजेश मिश्रा और जसवंत सिंह जैसे अनुभवी नेता नही हैं. 2- रेल किराए में बढोतरी
इस फैसले को मोदी सरकार द्वारा लिया गया सबसे ज्यादा अलोकप्रिय फैसले के रूप में देखा जा रहा है. नरेंद्र मोदी द्वारा देश को आईएनएस विक्रमादित्य समर्पित करने के कुछ दिन बाद ही यह फैसला आ गया. इस फैसले से देश भर में मोदी सरकार की किरकिरी हुई. दरअसल मोदी सरकार ने रेलवे की माली हालत को सुधारने के लिए यात्री किराए पर 14.2 परसेंट की बढत और माल भाड़े में 6.5 परसेंट की बढत की है. इस बढत से रेलवे को तकरीबन 8000 करोड़ का फायदा मिलेगा. हालांकि जनता और विपक्ष के साथ-साथ मोदी के सहयोगी दलों ने भी इस कदम को गलत बताया है. देशव्यापी विरोध के बाद इस बढत में कुछ रियायत भी बरती गई है. 3- सब्जी, चीनी और डीजल महंगारेल के अलावा जब मोदी सरकार ने चीनी और डीजल का प्राइस बढा दिया तो देश की जनता सबसे ज्यादा निराश हुई. विपक्ष के आरोपों के अनुसार मंहगाई इस महीनें में तेजी से बढी है और दिल्ली जैसे महानगरों में सब्जी और चीनी जैसे उत्पादों में भी अच्छी खासी बढत देखी गई है. गौरतलब है कि डीजल में 50 पैसे प्रति लीटर की बढत हुई है जिसका असर सभी क्षेत्रों में देखने को मिलता है.  4- कालेधन पर निराशा
हालांकि मोदी सरकार ने देश के कालेधन को देश में वापस लाने के लिए तुरंत एक एसआईटी गठित कर दी है लेकिन स्विस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार स्विस बैंकों में भारतीय धन बढकर 14000 करोड़ हो गया है. इसके साथ ही स्विस बैंक ने इस बारे में जमाकर्ताओं के नाम उजागर करने से मना कर दिया है जिससे मोदी सरकार के ब्लेक मनी वापस लाने के प्रयासों पर पानी फिरता दिख रहा है. 5- राज्यपालों और दिल्ली युनिवर्सिटी विवादइन सभी बातों के अलावा नरेंद्र मोदी सरकार को राज्यपालों के इस्तीफे को लेकर छिड़े विवाद और दिल्ली युनिवर्सिटी-यूजीसी विवाद ने भी काफी परेशान किया है. दरअसल मोदी सरकार के ऊपर आरोप है कि सरकार ने कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देने के संकेत दिए हैं. इसके अलावा दिल्ली युनिवर्सिटी और युजीसी के बीच छिड़े विवाद में एचआरडी मिनिस्ट्री का भी नाम आ रहा है जिसे स्मृति ईरानी हैंडल कर रही हैं. गौरतलब है कि  स्मृति ईरानी को एचआरडी मिनिस्टर बनाए जाने पर भी कम विवाद नही उठे थे. इन सभी विवादों और विश्लेषण के साथ हमें इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि इस सरकार को अभी अपने 60 महीनों के कार्यकाल में 59 महींने और गुजारनें हैं इसलिए इस सरकार की यूपीए सरकार से तुलना करना अभी लाजमी नही होगा.

Posted By: Prabha Punj Mishra
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